Wednesday, October 27, 2021

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न्यायपालिका

देश के न्यायिक इतिहास में कई बदतर मिसालें दर्ज कर गए जस्टिस बोबडे

भारत के 47वें प्रधान न्यायाधीश पद से शरद अरविंद बोबडे सेवानिवृत्त हो गए हैं। 23 अप्रैल को उनके कार्यकाल का आखिरी दिन था। करीब 17 महीने पहले जब उन्होंने प्रधान न्यायाधीश का पदभार संभाला था, उस वक्त देश की...

क्या लोवर ज्यूडिशियरी में ही फ्लर्ट करना गुनाह है?

उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस बोपन्ना और जस्टिस राम सुब्रमण्यन की पीठ ने मध्य प्रदेश में जिला अदालत के एक पूर्व जज की अपील पर कहा कि न्यायपालिका में किसी जज के अपने विभागीय जूनियर अधिकारी...

कायरता ही सरकार की बन गई है बहादुरीः महुआ मोईत्रा

संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस चल रही है, जिसमें विपक्ष सरकार पर बुरी तरह हमलावर है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने 'घृणा और कट्टरता' को लेकर सरकार पर तीखा हमला किया और आरोप लगाया...

न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के प्रति चिंतित है बॉम्बे हाई कोर्ट

बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को एनसीपी के नेता एकनाथ खडसे की याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि अगर न्यायपालिका और जांच एजेंसियां जैसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई स्वतंत्र रूप से काम...

अर्णब चैटगेटः सरकार और न्यायपालिका में छाया चिरपरिचित सन्नाटा

अब तो यह बात भी खुलकर सामने आ गई कि मोदी सरकार और रिपब्लिक चैनल में गहरी सांठगांठ है और टीआरपी घोटाले में गोस्वामी पर सरकार का वरदहस्त था। दरअसल रिपब्लिक टीवी को प्रसार भारती के स्वामित्व वाले डायरेक्ट-टू-होम...

अर्णब केस: महाराष्ट्र विस में प्रस्ताव पास, न्यायपालिका की किसी नोटिस का जवाब नहीं देगी विधायिका

महाराष्ट्र विधानसभा में रिपब्लिक टीवी के एडिटर-एंकर अर्णब गोस्वामी के खिलाफ लाए गए विशेषाधिकार उल्लंघन प्रस्ताव पर विधायिका और न्यायपालिका के बीच संवैधानिक टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। महाराष्ट्र के दोनों सदनों में एक प्रस्ताव पास हुआ...

मौजूदा भारतीय संदर्भ के जटिल प्रश्न और पब्लिक इंटैलेक्चुअल की भूमिका!

पिछले दिनों अंग्रेजी में लिखने-पढ़ने और बोलने वाले बड़े लेखक का एक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इंटरव्यू सुन रहा था। उन्हें महानगरीय समाज के भद्रलोक में बड़ा लोक-बुद्धिजीवी (पब्लिक-इंटैलेक्चुअल) माना जाता है। यह इंटरव्यू कुछ महीने पहले का था...

‘न्यायिक बर्बरता’ की संज्ञा पर तिलमिला गए कानून मंत्री!

26 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित संविधान दिवस समारोह में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने न्यायपालिका की ‘निष्पक्ष आलोचना’ और ‘परेशान करने वाली प्रवृत्ति’ की बात की, जो...

‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता के बगैर संविधान खोखले वायदों के दस्तावेज से कुछ ज्यादा नहीं’

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमणियम ने कहा है कि प्रत्येक संस्थान के गौरव और चुनौती के अपने क्षण होते हैं। वर्तमान में चुनौती के क्षण हैं जब न्यायपालिका का एक संवैधानिक कर्तव्य है कि वे संवैधानिक स्वतंत्रता के प्रति सचेत...

आखिर न्यायपालिका का कितना समर्पण चाहिए उप राष्ट्रपति जी!

पूरे देश में आम हो या खास सभी में यह भावना बलवती होती जा रही है कि मोदी सरकार के प्रति न्यायपालिका का रुख काफी लचीला है और वर्ष 2014 के बाद विशेषकर उच्चतम न्यायालय राष्ट्रवादी मोड में फैसला...
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हाय रे, देश तुम कब सुधरोगे!

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