Wednesday, October 27, 2021

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संविधान

अंग्रेजों के सेडिशन कानून में बसती है बीजेपी की आत्मा!

सेडिशन, धारा 124A के अनेक मुकदमों में सबसे ताज़ा और विवादास्पद मुकदमा दिशा रवि का है, जिन्हें किसान आंदोलन 2020 के समर्थन में, एक टूलकिट को संपादित और सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार...

संविधान में समाजवाद और पंथनिरपेक्ष शब्द जोड़ना इंदिरा गांधी की बड़ी देनः शाहनवाज़ आलम

लखनऊ। अल्पसंख्यक कांग्रेस ने आज रविवार को उत्तर प्रदेश के सभी ज़िलों में संविधान चर्चा दिवस मनाया। अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 42वें संविधान संशोधन के ज़रिए संविधान की...

राइट टु हेल्थ मौलिक अधिकार, सरकार सस्ते इलाज की व्यवस्था करे: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बताया। भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। स्वास्थ्य के अधिकार में सस्ता उपचार शामिल है, इसलिए, यह...

किसान आंदोलन के समर्थन में पूर्व नौकरशाहों के समूह ने लिखा खुला पत्र

पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों (आईएएस, आईपीएस, आईएफएस) के एक समूह 'सीसीजी' ने किसान आंदोलन को लेकर एक खुला पत्र लिखा है। पत्र में 78 पूर्व नौकरशाहों के हस्ताक्षर हैं। पत्र की शुरुआत में नौकरशाहों के समूह (CCG) का परिचय देते...

मौजूदा भारतीय संदर्भ के जटिल प्रश्न और पब्लिक इंटैलेक्चुअल की भूमिका!

पिछले दिनों अंग्रेजी में लिखने-पढ़ने और बोलने वाले बड़े लेखक का एक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इंटरव्यू सुन रहा था। उन्हें महानगरीय समाज के भद्रलोक में बड़ा लोक-बुद्धिजीवी (पब्लिक-इंटैलेक्चुअल) माना जाता है। यह इंटरव्यू कुछ महीने पहले का था...

धर्म के चश्मे से जन आंदोलनों को देखना आत्मघाती और राष्ट्रघाती

अब एक नया तर्क गढ़ा जा रहा है कि इन किसानों को भड़काया जा रहा है। यह भड़काने का काम कांग्रेस कर रही है। कांग्रेस एक विपक्षी दल है और इन कृषि कानूनों को चूंकि सरकार जो भाजपा की...

प्रशासन में अविश्वास को बढ़ाने का काम करेगा लव जिहाद कानून

गत वर्ष अगस्त महीने में फरीदाबाद, हरियाणा के डीसीपी विक्रम कपूर ने मातहत इंस्पेक्टर के ब्लैकमेल से तंग आकर सर्विस रिवाल्वर से खुद को गोली मार ली थी। पुलिस ने खुंदक में एक स्थानीय अख़बार के संपादक का नाम...

‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता के बगैर संविधान खोखले वायदों के दस्तावेज से कुछ ज्यादा नहीं’

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमणियम ने कहा है कि प्रत्येक संस्थान के गौरव और चुनौती के अपने क्षण होते हैं। वर्तमान में चुनौती के क्षण हैं जब न्यायपालिका का एक संवैधानिक कर्तव्य है कि वे संवैधानिक स्वतंत्रता के प्रति सचेत...

आखिर न्यायपालिका का कितना समर्पण चाहिए उप राष्ट्रपति जी!

पूरे देश में आम हो या खास सभी में यह भावना बलवती होती जा रही है कि मोदी सरकार के प्रति न्यायपालिका का रुख काफी लचीला है और वर्ष 2014 के बाद विशेषकर उच्चतम न्यायालय राष्ट्रवादी मोड में फैसला...

केरल की वाम सरकार ने अध्यादेश किया रद्द, क्या मोदी सरकार जनविरोधी कानूनों को करेगी खत्म!

भारी जन विरोध का सम्मान करते हुए केरल के राज्यपाल ने केरल की वाममोर्चा सरकार की सिफारिश पर केरल पुलिस अधिनियम, 2011 की विवादास्पद धारा 118-ए को सम्मिलित करने वाले पहले वाले अध्यादेश को वापस ले लिया है। केरल...
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हाय रे, देश तुम कब सुधरोगे!

आज़ादी के 74 साल बाद भी अंग्रेजों द्वारा डाली गई फूट की राजनीति का बीज हमारे भीतर अंखुआता -अंकुरित...
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