Saturday, October 23, 2021

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बांग्ला साहित्य की विद्रोही दलित चेतना का हिंदी दीप

जब बांग्ला साहित्य और समाज की उदार और विद्रोही चेतना को हिंदी इलाके के संकीर्ण राष्ट्रवाद और बंगाल में पहले से मौजूद हिंदू चेतना से पराजित करने का राजनैतिक अभियान और सांस्कृतिक आख्यान अपने चरम पर हो तब प्रोफेसर...

दावत, जहां मेजबान और मेहमान में गुफ्तगू तक नहीं!

दावत चाहे किसी धन कुबेर की हो या किसी निर्धन की, उसमें एक गर्म जोशी होती है, मिलने मिलाने का सिलसिला होता है और मेहमान और मेजबान के बीच संवाद होता है। पर कुछ दावतें ऐसी भी होती हैं...
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कोविड काल के दौरान बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति का हुआ बड़े स्तर पर ह्रास

कोविड काल में बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति का काफी बड़ा नुकसान हुआ है। इसका खुलासा ज्ञान विज्ञान समिति...
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