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संस्कृति-समाज

जन्म दिवस विशेष: ‘अंगारे’ के अहम अफ़साना निगार अहमद अली

हिंदुस्तानी अदब में प्रोफ़ेसर अहमद अली की पहचान ‘अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ’ के संस्थापक सदस्य और ‘अंगारे’ के अफ़साना निगार के तौर पर होती [more…]

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राजनीति

जन्मदिवस पर विशेष: आज सुभाष चंद्र बोस की किसे जरूरत है?

8 सितंबर 1922 को दिल्ली में इंडिया गेट के निकट स्थित छतरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 फुट ऊंची नेताजी सभुाष चन्द्र बोस की [more…]

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संस्कृति-समाज

जन्मदिन विशेष: वृंदावनलाल वर्मा के उपन्यासों में इतिहास और कल्पना का अद्भुत समन्वय

हिंदी साहित्य में वृंदावनलाल वर्मा की पहचान ऐतिहासिक उपन्यासकार की है। ऐतिहासिक उपन्यासकार के रूप में उनका कृतित्त्व विशेष महत्त्व रखता है। उनसे पूर्व हिंदी [more…]

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संस्कृति-समाज

जन्मदिन पर विशेष: अल्लामा इक़बाल और इश्तिराकियत

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(अल्लामा इक़बाल की शायरी के हिंद उपमहाद्वीप में हज़ारों की तादाद में शैदाई हैं। शायर अली सरदार जाफ़री भी उनमें से एक हैं। जाफ़री ने [more…]

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संस्कृति-समाज

जन्मदिन पर विशेष: अदाकारी, इंसानियत और दरियादिली में बेमिसाल थे पृथ्वीराज कपूर

भारतीय सिनेमा में पृथ्वीराज उस बेमिसाल शख़्सियत का नाम है, जिनकी शानदार अदाकारी के साथ-साथ उनकी बेजोड़ इंसानियत और बेपनाह दरियादिली के भी कई क़िस्से [more…]

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संस्कृति-समाज

जन्मदिन पर विशेष: पारसी थियेटर से रंंगीन फिल्मों तक का सफर करने वाले फिल्मकार सोहराब मोदी

भारतीय सिनेमा में सोहराब मोदी उस हस्ती का नाम है, जिन्होंने अपने करियर का आग़ाज़ पारसी थियेटर से किया। देश भर के शहर-शहर, कस्बे-कस्बे थियेटर [more…]

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संस्कृति-समाज

जन्मदिवस पर विशेष: बेगम अख़्तर के बग़ैर ग़ज़ल अधूरी है

वे सरापा ग़ज़ल थीं। उन जैसे ग़ज़लसरा न पहले कोई था और न आगे होगा। ग़ज़ल से उनकी शिनाख़्त है। ग़ज़ल के बिना बेगम अख़्तर [more…]

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संस्कृति-समाज

जन्मदिवस पर विशेष: आधुनिक हिंदी के जनक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने साहित्य को ‘जन’ से जोड़ा

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (9 सितंबर 1850-6 जनवरी 1885) आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं। इनका मूल नाम ‘हरिश्चन्द्र’ था। ‘भारतेन्दु’ उनकी उपाधि थी। उनका [more…]

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संस्कृति-समाज

जन्मदिवस पर विशेष: सामाजिक यथार्थ के अनूठे व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई

हरिशंकर परसाई हिंदी के पहले रचनाकार थे, जिन्होंने व्यंग्य को विधा का दर्जा दिलाया और उसे हल्के-फुल्के मनोरंजन की परंपरागत परिधि से उबारकर समाज के [more…]

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संस्कृति-समाज

दो बीघा ज़मीन: बिमल रॉय की ऑल टाइम क्लासिक फ़िल्म के सात दशक

भारतीय सिनेमा में बिमल रॉय का शुमार बा-कमाल निर्देशकों में होता है। उन्होंने न सिर्फ़ टिकिट खिड़की पर कामयाब फ़िल्में बनाईं, बल्कि उनकी फ़िल्मों में [more…]