Friday, August 19, 2022

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मौत की प्रयोगशाला बनकर रह गया है कोरोना का इलाज

आगरा (उत्तर प्रदेश) पारस अस्पताल में कोराना के गंभीर मरीजों को मारने के लिए जो माकड्रिल किया गया उससे स्पष्ट हो चुका है कि कोरोना महामारी को डॉक्टरों ने एक प्रयोगशाला के रूप में लिया। कोरोना मरीजों के साथ...

कोरोना में श्रृंग्वेरपुर घाट का हाल, मुन्नू पंडा की जुबानी

60 वर्षीय मुन्नू पंडा प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर घाट के पंडा हैं। इस घाट पर वो पिछली कई पीढ़ियों से पंडा का काम करते आ रहे हैं। और हजारों लोग कई पीढ़ियों से उनके जजमान हैं। गौरतलब है कि गंगा किनारे...

मेरी मातृभूमि का कोई मुआवजा नहीं हो सकता: सुंदरलाल बहुगुणा

(जन्म-09 जनवरी 1927, मृत्यु- 21 मई 2021) (मई 1995 में वर्तमान में उत्तराखण्ड में शिक्षक नवेंदु मठपाल टिहरी बांध आंदोलन और वहां के डूब क्षेत्र के गांवों की स्थितियों को नजदीक से समझने टिहरी गए। वे तब श्रीनगर गढ़वाल में पत्रकारिता...

जलती चिताओं पर ‘सकारात्मकता’ का पाठ पढ़ाने वाले से मुक्ति चाहता है देश

क्या कोई जिम्मेदार आदमी इतना संवेदनहीन और क्रूर हो सकता है कि कोरोना महामारी में आक्सीजन की कमी से मरने वाले लोगों को 'मुक्ति’ मिलने की बात कहे। आरएसएस के कर्णधार तो अपने इस संगठन को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी...

स्मृति शेष: शेषनारायण सिंह

सिरहाने 'मीर' के आहिस्ता बोलोअभी तकी रोते-रोते सो गया हैमीर तकी ‘मीर’ (1723 – 1810)अदब की दुनिया में 'ख़ुदा-ए-सुख़न’ यानि शायरी का ख़ुदा माने जाने वाले उर्दू के बड़े शायर ‘मीर’ यकीनन, सीनियर सहाफी शेषनारायण सिंह को नहीं जानते...

पांच साल में 6500 लोग काम के दौरान मारे गये

पिछले पांच सालों में कारखानों, बंदरगाहों, खदानों और निर्माण स्थलों पर कम से 6500 कर्मचारियों की काम के दौरान मौत हुई है। यानि हर रोज 3.56 लोगों की मौत। ये जानकारी खुद केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने संसद को सूचित...
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ताज़ियादारी में विवाद और मुस्लिम समाज के ख़तरे

अभी हाल में मुहर्रम बीत गया, कुछ घटनाओं को छोड़कर पूरे मुल्क से मुहर्रम ठीक ठाक मनाए जाने की...
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