Friday, July 1, 2022

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मोदी सरकार का कोरोना पैकेज़ बना पहेली, जनता के लिए ‘बूझो तो जानें’ का खेल शुरू

‘यशस्वी’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में ‘कर्मठ’ वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने पाँच दिन तक कोरोना राहत पैकेज़ बाँटने का अखंड यज्ञ किया। ताकि 130 करोड़ भारतवासियों को ‘आत्म-निर्भर’ बनने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये...

वित्त मंत्री ने पहले दिल तोड़ा और अब जले पर नमक छिड़क दिया

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के 12 मई को 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के ऐलान के क्रम में वित्तमंत्री ने मंगलवार को मात्र 4.4 लाख करोड़ के अप्रत्यक्ष पैकेज को देख और सुन कर लोगों का दिल टूट गया...

20 लाख करोड़ के पैकेज से भी है भुखमरी की लड़ाई!

20 लाख करोड़ का पैकेज सामने आ जाने के बाद मजदूरों का घर लौटना बंद हो जाएगा? रोजगार छिन जाने की प्रतिकूल स्थिति का सामना कर रहे मजदूरों को क्या बड़ी राहत मिल गयी है? क्या उन्हें दोबारा रोजगार...

महामारी और लोगों की मौत को नियति मान लिया है सरकार ने!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह मान लिया है और देश को भी बता दिया है कि कोरोना महामारी का स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर मुकाबला करने के लिए उनकी सरकार जितना कर सकती थी, वह कर चुकी है। अब...

आख़िर क्यों वित्तमंत्री के ऐलान झुनझुने जैसे ही हैं?

ग़रीब हो या अमीर, अब तो सभी 20 लाख करोड़ रुपये के सुहाने पैकेज़ वाले झुनझुने की झंकार सुनने को बेताब हैं। लेकिन वित्तमंत्री की पहले दिन की पेशकश में ग़रीबों के लिए कुछ नहीं था। हो सकता है,...

24 घंटे में ही उतर गया 20 लाख करोड़ के पैकेज का खुमार

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने जब मंगलवार 12 मई को 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया और कहा कि इस पैकेज का इस्तेमाल देश के हर वर्ग किसान, मजदूर, लघु उद्योगों और कामगारों की मदद के लिए...

जनता के ऊँट में निर्मला का जीरा: भारत ने प्रतिव्यक्ति 1200 और अमेरिका ने दिया 4.55 लाख रुपये

मोदी सरकार ने गरीबों के लिए 1.70 लाख करोड़ के पैकेज का कुछ उसी तरह ऐलान किया है जैसे बजट में सब्जबाग दिखाए जाते हैं। पूरे देश में लगभग 75 फीसद आर्थिक गतिविधियाँ ठप हैं क्योंकि लॉकडाउन चल रहा...

आर्थिक पैकेज के नाम पर झुनझुना

देश के तमाम आर्थिक वर्गों में से ज्यादातर के लिए इस पैकेज में नहीं है कुछ केंद्र के हर फैसले के बाद यह सोचने की मजबूरी होती है कि आखिर सरकार के आर्थिक नीति निर्धारकों को भारत की वास्तविक दशा-...

निर्मला की थाली में गरीब के हिस्से पर डाका, टैक्स स्लैब और एलआईसी संबंधी घोषणा ने मध्यवर्ग को किया निराश

नई दिल्ली। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए सरकार का बजट आ गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन के 2 घंटे 42 मिनट के भाषण में जनता के लिए क्या था उसे समझना किसी के लिए बेहद मुश्किल है। एलआईसी...

माफ करिये निर्मला जी! हमारा राष्ट्रहित आपके राष्ट्रहित से मेल नहीं खाता

मेरा का नेटवर्क आज काम नहीं कर रहा है. किसी तरह 2 जी पर अब काम कर रहा है। इसका मतलब क्या हो सकता है? क्या आईडिया का आईडिया गुल होने वाला है? निर्मला सीतारमण शायद इस पर भी कह दें, कि...
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