Sunday, May 29, 2022

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भारत की वामपंथी पार्टियों के सामने चुनौतियां

वामपंथी आंदोलन एक वैश्विक परिघटना रही है और इससे जन्म लेने वाली भारत की वामपंथी पार्टियां भी खुद को इस वैश्विक आंदोलन का हिस्सा मानती रही हैं और अब भी मानती हैं। इसकी सबसे मुखर अभिव्यक्ति उनके नामों में...

नये रेडिकल विकल्प की तलाश में है बहुजन राजनीति

डा. अंबेडकर दलित राजनीति के जनक माने जाते हैं। उन्होंने ही गोलमेज कांफ्रेंसों में दलितों को राजनीतिक अधिकार दिए जाने की मांग उठाई तथा गांधी जी के कड़े विरोध के बावजूद दलितों को हिंदुओं से अलग अल्पसंख्यक वर्ग का...

पीके-कांग्रेस जुदा-जुदा: तू भी खुश मैं भी, पर बीजेपी क्यों ज्यादा खुश?

कांग्रेस खुश है कि पीके ने उसके ऑफर को ठुकरा दिया। यह खुशी कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के ट्वीट में नज़र आती है जिसमें वे पीके का आभार भी जताते हैं और यह भी बताते हैं कि...

आखिर क्या है कांग्रेस पार्टी का संकट?

सन् 2020, 2021 और 2022 के विधान सभा चुनावों के परिणामों के यदि देखें तो ये परिणाम कांग्रेस पार्टी के लिए काफी निराशाजनक रहे हैं। 2019 के विधान सभा चुनावों में कांग्रेस की छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में...

गुजरात में इस बार भी विदेशी नेताओं के दौरों का चुनावी इस्तेमाल करेगी भाजपा

गुजरात में विधानसभा के चुनाव लिए वैसे तो सभी प्रमुख पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं, लेकिन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी इस मामले में सबसे आगे है। चुनाव के मद्देनजर उसकी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की परियोजना पर तो देशव्यापी...

संघ-भाजपा के सर्वसत्तावाद के विरूद्ध वैकल्पिक-राजनीति किधर है?

भारतीय़ जनता पार्टी और आरएसएस का सर्वसत्तावाद सन् 2022 में अपने विराट रूप में सामने आया है। यूपी सहित चार राज्यों के चुनाव में कामयाबी हासिल करने के बाद केंद्रीय सत्ता पहले से भी ज्यादा आक्रामक नजर आ रही...

दूसरे दलों से आए अवसरवादी नेताओं की शरणस्थली बन गई है भाजपा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थापना को 42 साल पूरे हो चुके हैं। 6 अप्रैल 1980 को तत्कालीन जनता पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी के नाम से अस्तित्व में आई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की यह राजनीतिक...

माकपा की कांग्रेस: कम्युनिस्टों की छोटी-बड़ी लाइन का द्वन्द्व 

भारत की नई लोकसभा के 2024 में निर्धारित चुनाव के लिए नई मोर्चाबंदी की आहट है जो तेज नहीं तो बेआवाज भी नहीं है। नई  मोर्चाबंदी 2022 में ही तय राष्ट्रपति चुनाव में कुछ हद तक साफ हो सकती...

आने वाले समय में बढ़ जाएगी राष्ट्रीय स्तर की पार्टियों की तादाद 

भारत में इस समय आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय स्तर के मान्यता प्राप्त कुल सात राजनीतिक दल हैं, लेकिन आने वाले समय में इनकी संख्या में इजाफा हो सकता है। हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के...

सीपीएम की 23वीं कांग्रेस: अन्तर्विरोधों और द्वंद्वों की सही समझ के आधार पर पूरे मसौदा दस्तावेज का होना चाहिए पुनर्लेखन!

सीपीआई(एम) की 23वीं कांग्रेस केरल के कन्नूर शहर में आगामी 6-10 अप्रैल 2022 को होने जा रही है। इस कांग्रेस में बहस के लिए पार्टी की केंद्रीय कमेटी ने राजनीतिक प्रस्ताव का एक मसौदा जारी किया है। आगे एक...
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दूसरी बरसी पर विशेष: एमपी वीरेंद्र कुमार ने कभी नहीं किया विचारधारा से समझौता

केरल के सबसे बड़े मीडिया समूह मातृभूमि प्रकाशन के प्रबंध निदेशक, लोकप्रिय विधायक, सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री...
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