Monday, October 18, 2021

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जन्मदिन पर विशेष: भविष्य की दुनिया की पेरियार की परिकल्पना

(आज रामासामी पेरियार का जन्मदिन है, भारत को आधुनिक राज्य बनाने में जितनी भूमिका डॉ. आंबेडकर की है, उतनी ही पेरियार की भी है। अपनी-अपनी भूमिका में दोनों महान हैं। डॉ. आंबेडकर साधारण परिवार से आए थे, अपने श्रम,...

नए नेतृत्व की तलाश में दलित राजनीति

इतिहास सिखाता है और अपने आपको दोहराता भी है। बहुत साफ-साफ यह सच दलित, शोषित और वंचितों के आन्दोलन में दिखाई दे रहा है। समतामूलक समाज की अवधारणा के पहले के सूत्रधार महान सन्त रैदास के बाद भारत की...

बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष: बुद्ध धम्म और भारत में प्रतिरोध की बहुजन-श्रमण प्रगतिशील परंपरा

मार्क्स ने कहा था "अब तक विद्यमान सभी समाजों का लिखित इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है।" यह वर्ग-संघर्ष विचारों के संघर्ष के रूप में भी मुखर रूप से सामने आता है। भारत में वर्ग-संघर्ष ने खुद को वर्ण-संघर्ष...

अवसरवाद से पासवान नहीं बन सके, दलितों के पासबान

भारत में दलित राजनीति का एक विशेष अर्थ है और इसके विस्तार का इतिहास अतीत तक जाता है। इसमें संत और राजनीतिज्ञ दोनों सम्मिलित हैं। दलित आंदोलन और राजनीति भारत के महत्वपूर्ण विषयों में से एक अतिमहत्वपूर्ण विषय है।...

पेरियार जयंती: सच्ची रामायण का विरोध धार्मिक से कहीं ज्यादा राजनीतिक है

(ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितंबर, 1879—24 दिसंबर, 1973) बीसवीं शताब्दी के महानतम चिंतकों और विचारकों में से एक हैं। उन्हें वाल्तेयर की श्रेणी का दार्शनिक, चिंतक, लेखक और वक्ता माना जाता।‘  भारतीय समाज और भारतीय व्यक्ति का मुकम्मल...

पेरियार पर आईं पुस्तकें बदलेंगी हिंदी पट्टी का दलित चिंतन

साहित्य के शोधकर्ताओं के लिए यह एक शोध का विषय है कि ईवी रामासामी पेरियार (17 सितंबर, 1879-24 दिसंबर, 1973) के मूल लेखन का कोई संग्रह आज तक उस तरह से हिंदी साहित्य में क्यों उपलब्ध नहीं था,...

राम मंदिर निर्माण से पहले उत्तर भारत पहुंची ‘सच्ची रामायण’, पेरियार और पोंगापंथ का होगा आमना-सामना

(भारतीय विधायिका और न्यायपालिका ने मिलकर पिछले दिनों ऐसा परिदृश्य बनाने की कोशिश की मानो राम भारत के संपूर्ण बहुसंख्यक हिंदू जन मानस का प्रतिनिधित्व करते हों। कमोवेश इसी मूल तर्क पर अयोध्या में राम मंदिर बनने जा रहा...

पेरियार के जन्मदिन पर विशेष: संविधान में सुरक्षित है ‘ईश्वर नहीं है’ कहने का अधिकार

क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार महज आस्थावानों के लिए ही लागू होता है? कभी कभी साधारण से प्रश्न का उत्तर पाने के लिए भी अदालती हस्तक्षेप की जरूरत पड़ती है। मद्रास उच्च न्यायालय की - न्यायमूर्ति एस मनिकुमार और...

पेरियार का द्रविड़ आंदोलन भी जातीय और छुआछूत के भेदभाव से नहीं कर सका जनता को मुक्त

ईवी रामास्वामी पेरियार के 'द्रविड़ कड़गम आंदोलन' का केवल एक ही निशाना था आर्य ब्राह्मणवादी और वर्ण व्यवस्था का अंत कर देना, जिसके कारण समाज ऊंच और नीच जातियों में बांटा गया है। द्रविड़ कड़गम आंदोलन उन सभी शास्त्रों, पुराणों और देवी-देवताओं में...
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‘पिंक’ से तुलना न करें तो देखने लायक है ‘रश्मि रॉकेट’

'सूर्यवंशम' जैसी फ़िल्म की शुरुआत में एक महिला के लिए जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया वह...
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