Thursday, October 28, 2021

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philosophy

सत्य के बरक्स झूठ का भीमकाय बनना

महात्मा गांधी ने एक बार कहा था, "सत्य ही ईश्वर है"। सत्य शब्द का प्रयोग कई अर्थों में किया जाता है। एक अर्थ में वह एक दार्शनिक कथन या सिद्धांत हो सकता है, जो ज्ञान की हमारी खोज की...

जयंती पर विशेष: संत रविदास की दार्शनिक चेतना

दर्शन अपने आप में अति व्यापक और गूढ़ शब्द है। दुनिया भर में दर्शन और फिलॉस्फी को अपने-अपने ढंग से व्याख्यायित किया गया है। आमतौर पर दर्शन को सत्य को जानने की कला के रूप में परिभाषित किया जाता...

सत्ता ‘रंग-नुमाइश’ कराती है, ताकि रंगकर्म का विचार मर जाए!

रंगकर्म माध्यम है, यह सोचने या मानने वाले अधूरे हैं। वो रंगकर्म को किसी शोध विषय की तरह पढ़ते हैं या किसी एजेंडे की तरह इस्तेमाल करते हैं, पर वो रंगकर्म को न समझते हैं न ही रंगकर्म को...

‘शिक्षक दिवस’ और सर्वपल्ली राधाकृष्णन के गौरव-गान के मायने

कहते हैं कि इतिहास एक ‘ट्रेचरस टेरेन’ है जहां बतायी जाने वाली चीजें कम होती हैं और छिपाई गई या तोड़-मरोड़कर बतायी जाने वाली चीजें ज्यादा। कुछ विद्वान इतिहास को ‘स्टेग्नोग्राफी’ के रूप में भी देखते हैं यानी एक...

फेसबुक फ्रैंड्स हैं या आईटी सेल के एजेंट?

कुछ दिन पहले एक नामचीन गांधीवादी लेखक इस बात पर परेशान रहे कि फेसबुक उनकी पोस्टों को कम्युनिटी स्टैंडर्ड के खिलाफ मानकर उनके एकाउंट का वेरिफिकेशन मांग रहा था। ठीक बैंकों में मांगे जाने वाले केवाईसी की तरह। उसके...

अथातो चित्त जिज्ञासा- भाग 4: मनोविश्लेषण का अपना नया सामाजिक संदर्भ

अथातो चित्त जिज्ञासा- भाग 4 (जॉक लकान के मनोविश्लेषण के सिद्धांतों पर केंद्रित aएक विमर्श की प्रस्तावना) (4) मनोविश्लेषण का अपना नया सामाजिक संदर्भ मानव जीवन के समग्र सांस्कृतिक परिदृश्य में अधुनातन यंत्रों के प्रयोग से आए मूलभूत परिवर्तनों का हमें पूरा अंदाज...

अथातो चित्त जिज्ञासा-3: भारतीय तंत्र शास्त्र से मिलता है फ्रायड का दर्शन शास्त्र

(जॉक लकान के मनोविश्लेषण के सिद्धांतों पर केंद्रित एक विमर्श की प्रस्तावना) जो भी हो, यहां हमारा विषय दर्शनशास्त्र, समाजशास्त्र या क्रांति का विज्ञान भी नहीं है । भारतीय तंत्र की चर्चा यहां अनायास ही मन की समस्याओं की चर्चा...

जयंती पर विशेष: तत्वदर्शी संत रविदास, यानी एक समाज वैज्ञानिक रविदास

मनुष्य जब गहरी चिंतन-प्रक्रिया से गुज़रते हुए चेतना के साथ उच्चतर होता जाता है, तब उसकी आत्मा, उस परम सत्य का अहसास करती है, जिससे पूरी प्रकृति सृजित हुई है, तो वह प्रकृति के कण-कण के साथ आंदोलित हो...

नास्तिक, गे, लेस्बियन और थर्ड जेंडर भी सीएए-एनआरसी के खिलाफ़ सड़कों पर

दिल्ली के सोमांश सैनी नास्तिक हैं और वो एनआरसी-सीएए के खिलाफ़ प्रोटेस्ट कर रहे हैं। सोमांश का कहना है कि एनआरसी में जो नास्तिक माइनारिटी बाहर छूट जाएंगे वो नागरिक कानून-2019 की धार्मिक खांचेबंदी के चलते वापस भारत की...

गांधी दर्शन: समरसता की बुनियाद पर टिकी अर्थव्यवस्था और राजनीति

हम सब विकास के जिस मॉडल को आदर्श मानते हैं वह मनुष्य विरुद्ध प्रकृति के नैरेटिव पर आधारित है। यही कारण है कि हमारी अभिव्यक्तियां प्रकृति पर विजय प्राप्त करना और प्रकृति को अपने अधीन करना जैसी होती हैं। प्रकृति के...
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भाई जी का राष्ट्र निर्माण में रहा सार्थक हस्तक्षेप

आज जब भारत देश गांधी के रास्ते से पूरी तरह भटकता नज़र आ रहा है ऐसे कठिन दौर में...
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