हाल के वर्षों में आर्थिक विकास को गति देने के लिए औद्योगिक विकास को गतिमान करना आवश्यक… Read More
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वर्तमान भारतीय समाज दुखों के समुद्र में डूबा हुआ है। मजदूरों का न कोई गांव है न… Read More
सारी विपत्तियों का आविर्भाव निरक्षरता से हज्योतिबा फुले ने अपनी पुस्तक ‘गुलामगिरी’ (स्लेवरी) में स्पष्ट लिखा है… Read More
25 दिसंबर को ‘मनुस्मृति दहन दिवस’ पर देश के कई राज्यों सहित बिहार-यूपी में बहुजन संगठनों ने… Read More
हावर्ड फॉस्ट के कालजयी उपन्यास स्पार्टाकस का हिंदी अनुवाद अमृत राय ने आदिविद्रोही शीर्षक से किया है।… Read More
आदिम दौर के तमाम नियम आज भी बदस्तूर जारी हैं। जगह-जगह लोगों को बंधुआ मजदूर या गुलाम… Read More
‘‘इंसानी ज़िंदगी का दायरा सिर्फ इश्क और मुहब्बत तक महदूद नहीं। क्या इसके अलावा और बहुत से… Read More
(वर्चस्ववाद की बुनियाद के मौलिक तत्वों में से एक है श्रेष्ठतावाद, जो यह दावा करता है कि… Read More