Wednesday, March 29, 2023

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जनपक्षीय कवि, लेखक, पत्रकार सुरेश सलिल की स्मृति में

हिंदी, साहित्य और पत्रकारिता में अमूल्य योगदान करने वाले 19 जून 1942 को जन्मे जनपक्षीय कवि, लेखक सुरेश सलिल अपने लेखन, संपादन, पत्रकारिता तथा अनुवाद से आजीवन मानवता की सेवा करने के बाद 22 फरवरी को दुनिया को अलविदा...

आजादी की लड़ाई में कई तरक्कीपसंद शायरों ने सीधे तौर पर की थी हिस्सेदारी

देश की आज़ादी लाखों-लाख लोगों की कु़र्बानियों का नतीज़ा है। जिसमें लेखक, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों ने भी एक अहम रोल निभाया। ख़ास तौर से तरक़्क़ीपसंद तहरीक से जुड़े लेखक, कलाकार आज़ादी के आंदोलन में पेश-पेश रहे। अपने गीत, ग़ज़ल, नज़्म, नाटक, अफ़सानों और आलेखों के...

जश्न और जुलूसों के नाम थी आज़ादी की वह सुबह

देश की आज़ादी लाखों-लाख लोगों की कु़र्बानियों का नतीज़ा है। जिसमें लेखक, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों ने भी अपनी बड़ी भूमिका निभाई। ख़ास तौर से तरक़्क़ीपसंद तहरीक से जुड़े लेखक, कलाकार मसलन सज्जाद ज़हीर, डॉ. रशीद जहां, मौलाना हसरत मोहानी,...

एक अलहदा शाम अलहदा शख्सियत के नाम

नई दिल्ली। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (नई दिल्ली) में असगर वजाहत, रामशरण जोशी, इब्बआर रब्बी, विष्णु नागर, राजेश जोशी आदि कई आमंत्रित नागरिकों के बीच 19 जून 2022 की वो शाम बुजुर्ग कवि, लेखक, पत्रकार और संपादक सुरेश सलिल...

पुस्तकों को सेल्फ़ में क़ैद न करो, उन्हें बांटो!

अंग्रेजी के एक बहुत बड़े लेखक थे स्टीवेंसन।  वे एक बार बस में सफर कर रहे थे और कोई पुस्तक पढ़ने में तल्लीन थे। जब उनका स्टाप आया तो वे फट से उतर गए मगर अपनी पुस्तक वहीं छोड़...

हिंदी का लेखक-प्रकाशक विवाद: साहित्य और जीवन के भ्रम और यथार्थ

सोशल मीडिया पर हिंदी के लेखकों और प्रकाशकों के बीच संबंध के बारे में अभी जो बहस उठी है, वह जितनी दिलचस्प है, उतनी ही विचारोत्तेजक भी है। इसमें एक प्रकार से हिंदी साहित्य और पाठकों के बीच के...

किताब में छिपी है गांव की पीड़ा और किसानों का दर्द

लेखक चाहते थे कि पुस्तक प्रसारित हो तो देश में रोज़गारविहीन जन विरोधी विकास नीति पर देशव्यापी बहस छिड़ सकती है और हमारे द्वारा प्रस्तुत वैकल्पिक विकास नीति के पक्ष में जनमत बन सकता है। किताब पढ़ते और आज...

मोहन राकेश ने दी हिंदी नाटकों को एक नई पहचान

मोहन राकेश हिंदी साहित्य के उन चुनिंदा साहित्यकारों में हैं जिन्हें ‘नयी कहानी आंदोलन’ का नायक माना जाता है और साहित्य जगत में लोग उन्हें उस दौर का ‘महानायक’ कहते हैं। मोहन राकेश का जन्म 8 जनवरी, 1925 को...

सीपी-कमेंट्री: अफ्रीकी लेखक को साहित्य और एक महिला समेत दो पत्रकारों को शांति का नोबेल पुरस्कार

नोबेल पुरस्कारों के 2021 के विजेताओं का चयन बहुत अप्रत्याशित माना जा रहा है। अधिकतर लोगों ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि इस बार नोबेल शांति पुरस्कार लोकतंत्र और टिकाऊ शांति के लिए आवश्यक अभियक्ति की आजादी की...

पुस्तक समीक्षा: एक यायावर की यादों के साथ रोमांचकारी पाठकीय यात्रा

देश के वरिष्ठ पत्रकार और प्रतिबद्ध लेखक-विचारक उर्मिलेश के संस्मरणों की किताब ' ग़ाज़ीपुर में क्रिस्टोफर कॉडवेल' के प्रकाशन की घोषणा हो चुकी है। नवारूण प्रकाशन से आने वाली यह किताब जल्द ही पाठकों के हाथ में होगी। प्रकाशन...

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मनरेगा के लिए मोदी सरकार की नई मजदूरी दर कॉरपोरेट लेबर लूट को बढ़ाएगी, मजदूरों का पलायन बढ़ेगा: धीरेंद्र झा

पटना 29 मार्च 2023। अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुधवार...