Monday, October 18, 2021

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सरायकेला: एफएक्स कंपनी का आदिवासियों के पूजा स्थल पर कब्जे की कोशिश, विरोध में उतरे ग्राम सभा के लोग

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झारखंड में सरायकेला खरसावां जिले के मौजा आसनबनी में मेसर्स एफएक्स कॉरपोरेशन इंडियन प्रा. लि. द्वारा आदिवासी समुदाय के जाँताल पूजा स्थल पर किये जा रहे अवैध कब्जे के मामले को लेकर ग्राम सभा और एफएक्स कंपनी आमने-सामने आ गए हैं। इस विवाद के चलते क्षेत्र में हिंसा की आशंका पैदा हो गयी है। 

आरोप है कि सरकारी जमीन और बंदोबस्ती जमीन सहित आदिवासी समुदाय के जाँताल पूजा स्थल पर मेसर्स एफएक्स कॉरपोरेशन इंडियन प्रा.लि. द्वारा अवैध कब्जा किया जा रहा है। 

जानकारी के मुताबिक कंपनी द्वारा इस कब्जे को लेकर ग्राम सभा की एक बैठक पिछली 25 जुलाई को संपन्न हुई और एफएक्स कंपनी के अधिकारी बीएन तिवारी से भूमि का दस्तावेज मांगा गया जिसे बीएन तिवारी ने ग्राम सभा की 26 जुलाई की बैठक में दिखाया था। मगर तिवारी द्वारा दिया गया दस्तावेज, ग्राम सभा की जांच समिति द्वारा किए गए जांच के दौरान गलत पाया गया। जिससे यह साफ हो गया है कि कंपनी आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे की तैयारी में है।

ग्राम सभा की बैठक।

बता दें कि आसनबनी गांव में आदिम जनजाति के पुरखों से स्थापित जाँताल पूजा स्थल की जमीन को एफएक्स कंपनी द्वारा अपनी बताकर बलपूर्वक कब्जा किया जा रहा है और जेसीबी (JCB) मशीन के द्वारा पूजा स्थल को क्षतिग्रस्त कर उसका समतलीकरण किया जा रहा है। इतना ही नहीं एफएक्स कंपनी द्वारा इस जाँताल पूजा स्थल की जमीन पर चहारदीवारी भी खड़ी की जा रही है, जिसके कारण पूजा स्थल के पीछे बसे सबर जनजाति के लोगों के निकलने का रास्ता भी बंद हो रहा है। जिसकी शिकायत के बाद भी प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया है, अत: इस मामले को ग्राम सभा ने संज्ञान में लेकर कंपनी से जमीन के कागजात की मांग की जो जाली निकला। 

अब ग्रामीणों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है। ग्रामीणों ने कंपनी द्वारा किए जा रहे कब्जे के खिलाफ कमर कस लिया है। बावजूद इसके इस बात की पूरी संभावना है कि कंपनी द्वारा अपनी ताकत और पैसे का इस्तेमाल करके उक्त जमीन पर कब्जा किया जा सकता है। यह भी संभव है कि ऐसी स्थिति में ग्रामीण और कंपनी में टकराव की भी स्थिति पैदा हो, जो आने वाले दिनों में हिंसा का रूप ले सकती है। ऐसे में मामले पर प्रशासन की लपरवाही भविष्य में प्रशासन के गले की हड्डी भी बन सकती है। 

सामाजिक कार्यकर्ता अनूप महतो कहते हैं कि ”जाँताल पूजा स्थल का बलपूर्वक अतिक्रमण किया जाना और जेसीबी मशीन के जरिये पूजा स्थल को क्षतिग्रस्त किया जाना, पूरे झारखंडी समाज और झारखंडी संस्कृति पर खुल्लम-खुला चोट है, और यह पूरी तरह से निंदनीय है।”   

वह आगे कहते हैं कि ”इस क्षेत्र में अनुसूचित जाति और आदिम जनजाति निवास करते हैं, इस पूंजीवादी व्यवस्था और करपोरेटी षड्यंत्र के चलते आदिवासियों के रहन-सहन और सांस्कृतिक, रीति-रिवाज में छेड़छाड़ हो रही है, जिससे आदिवासियों और मूलवासियों का जीवन यापन प्रभावित हो रहा है।”

 वे बताते हैं कि सरायकेला-खरसावां जिला के कई क्षेत्रों में क्षेत्रीय पूजा स्थल, पारंपरिक शमशान स्थल के साथ-साथ झारखंड सरकार की अनाबद भूमि को भी कारपोरेटी षड्यंत्र के तहत भू-माफिया बलपूर्वक कब्जा कर रहे हैं और प्रशासन सभी मामलों पर चुप्पी साधे हुए है। झारखंड में सरकार तो बदली है, परंतु जो प्रशासनिक अधिकारी हैं, उनके चरित्र व रुतबे में कोई बदलाव नहीं आया है।

मामले को लेकर 26 जुलाई को ग्राम सभा की हुई बैठक में ग्राम सदस्यों ने प्रस्ताव पारित किया जिसके तहत निम्न निर्णय लिए गए।

● जब तक इस विवादित जांताल पूजा (स्थल) जमीन के मेसर्स एफएक्स कॉरपोरेशन इंडियन प्रालि द्वारा सच्चे कागजात प्रस्तुत नहीं किया जाते हैं, तथा जमीन का सीमांकन नहीं हो जाता विवादित जांताल पूजा स्थल जमीन पर कोई भी बाहरी अथवा प्रतिवादी व्यक्ति द्वारा किये जाने वाले सभी प्रकार के कार्यों का विरोध किया जाएगा, ग्राम सभा के अलावा कोई भी इस पर कार्य नहीं करेगा तथा कार्य स्थगित रहेगा।

●ग्राम सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि सीमांकन के दौरान गलत/अवैध अथवा कोई आदिम जनजाति या अदिवासी की भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो SC ST Act/Atrocities Act 1989 के तहत उचित करवाई की जाएगी।

सभा की बैठक में चांडिल प्रखंड के विभिन्न ग्राम सभा के ग्राम प्रधान और ग्राम सदस्य उपस्थित थे।

मामले पर पारंपरिक ग्राम प्रधान सुकलाल पहाड़िया ने कहा है कि ”मेसर्स एफएक्स कॉरपोरेशन इंडियन प्रा. लि. और भू-माफिया के द्वारा हमारे पूर्वजों की सार्वजनिक जाँताल पूजा स्थल, आदिम जनजाति की रैयत भूमि, आदिम जनजाति की बंदोबस्ती भूमि एवं अनबाद झारखंड सरकार की भूमि को बलपूर्वक कब्जा किया जा रहा है। इसके विरोध में आसनबनी ग्राम सभा हमेशा खड़ी है और ग्राम सभा उपायुक्त को इस विषय में एक ज्ञापन सौंपेगी और प्रशासन से ‘एट्रोसिटी एक्ट’ के तहत कार्रवाई की मांग भी करेगी। 

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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