Subscribe for notification

विकास दुबे मुठभेड़ की आड़ में हाईकोर्ट जजों की कार्यप्रणाली की जांच पर वकीलों में रोष

एक ओर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 7 जनवरी, 21 को कहा है कि वह उच्च न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ शिकायतों के बारे में इन-हाउस पूछताछ के बारे में जानकारी जारी नहीं करता क्योंकि वे पूरी तरह से गोपनीय प्रकृति के होते हैं। इन-हाउस प्रक्रिया के तहत पूछताछ की प्रकृति पूरी तरह से और पूरी तरह से गोपनीय होती है। दूसरी और उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस वीएस चौहान हैं जो विकास दुबे एनकाउंटर मामले में गठित न्यायिक आयोग के अध्यक्ष हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की कार्यप्रणाली की जांच के लिए 10 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट आ रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील इसे लेकर उद्वेलित हैं और उन्होंने इसका प्रबल विरोध करने की घोषणा कर दी है।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी ने सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित करके कहा है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा विकास दुबे के एनकाउंटर की वास्तविकता को जांचने हेतु सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बीएस चौहान के नेतृत्व में गठित न्यायिक आयोग को यह जांच करना है कि विकास दुबे का एनकाउंटर फर्जी और पूर्व नियोजित है या सही एनकाउंटर है। लेकिन संदर्भित विषय की जांच की आड़ में जस्टिस चौहान इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय जजों की कार्यप्रणाली की जांच के लिए 10 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट आ रहे हैं। जबकि उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस चौहान अच्छी तरह से मालूम है कि इस तरीके की गैर संवैधानिक जांच नहीं की जा सकती है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि हमारे देश के संविधान में किसी माननीय न्यायमूर्ति की ऐसे किसी जांच समिति द्वारा जांच करने का कोई प्रावधान नहीं है। जस्टिस चौहान का यह कृत्य उत्तर प्रदेश की न्यायपालिका को अपमानित करने का कुत्सित प्रयास है। ऐसे संकट की घड़ी में उत्तर प्रदेश के सभी वकीलों की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह आगे बढ़कर न्यायपालिका को बचाने का कार्य करें अन्यथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर आघात पहुंचेगा। इसका हाईकोर्ट बार एसोसिएशन इलाहाबाद प्रबल विरोध और भर्त्सना करता है।

प्रस्ताव में याद दिलाया गया है कि जस्टिस चौहान इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज रह चुके हैं और हाईकोर्ट के अधिवक्ता स्वर्गीय श्रीकांत अवस्थी को अनावश्यक एवं महत्वपूर्ण महत्वहीन विषय में अवमानना के आदेश के अंतर्गत पुलिस अभिरक्षा में केंद्रीय कारागार भिजवा चुके हैं, जहां श्री अवस्थी के साथ बर्बरता पूर्वक मारपीट हुई और उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें गंभीर रूप से घायल अवस्था में स्वरूप रानी अस्पताल में पुलिस की मौजूदगी में लोहे की चैन से पलंग पर बांधकर रखा गया था। इस संबंध में तत्समय उपलब्ध लोगों की सूचना के अनुसार यह संज्ञान में आया था कि जस्टिस चौहान के उकसावे और निर्देश पर वकील अवस्थी के साथ नैनी जेल में अमानवीय अत्याचार किया गया था जिसके परिणाम स्वरूप उनकी मृत्यु हुई और अवस्थी को साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से स्वरूप रानी अस्पताल में भर्ती दिखाया गया। इस संदर्भ में की गई जांच संदिग्ध है और आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जिस को सार्वजनिक करने एवं जस्टिस चौहान के षड्यंत्र को उद्घाटित करने का निर्णय लिया गया।

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 11 जनवरी को जस्टिस चौहान की जांच का इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन प्रबल विरोध करेगा। कार्यकारिणी ने चेतावनी दी है यदि जरूरत पड़ी तो पूरे उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं को जोड़कर पूरे प्रदेश में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

प्रस्ताव में कहा गया है कि जस्टिस चौहान का रुख सदैव वकील विरोधी रहा है और वर्तमान समय में न्यायपालिका विरोधी हो गया है। जस्टिस चौहान ने विधि आयोग का चेयरमैन रहते हुए वकीलों के विरुद्ध दमनात्मक विधान की संस्तुति करने का कुत्सित प्रयास किया जिसे तत्कालीन केंद्र सरकार ने निरस्त कर दिया।

न्यायिक आयोग शुरू से ही विवादास्पद रहा है और इसे उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती दी जा चुकी है। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने न्यायिक आयोग को भंग करने की अर्जी खारिज कर दी थी। याचिकाकर्ता घनश्याम दुबे ने अर्जी में कहा कि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बीएस चौहान के भाई और समधी बीजेपी के नेता हैं, जबकि पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता कानपुर के आईजी के रिश्तेदार हैं, जहां विकास दुबे का कथित एनकाउंटर हुआ था। ऐसे में यह आयोग निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएगा।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने वकील घनश्याम उपाध्याय पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जस्टिस बीएस चौहान सुप्रीम कोर्ट के एक सम्मानित न्यायाधीश रहे हैं। वह हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं। उनके रिश्तेदारों से कभी कोई समस्या नहीं थी। अब आपको कोई समस्या क्यों है?

वकील ने न्यायमूर्ति बीएस चौहान के पारिवारिक कनेक्शन पर मीडिया में आर्टिकल को दिखाया। चीफ जस्टिस ने कहा कि हम एक समाचार पत्र के साक्षात्कार के आधार पर इस न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पर आशंकाएं नहीं रखेंगे। क्या कोई रिश्तेदार घटना या जांच से जुड़ा है? वह निष्पक्ष क्यों नहीं हो सकते? ऐसे न्यायाधीश हैं जिनके पिता/भाई सांसद हैं। क्या आप कह रहे हैं कि वे सभी पक्षपाती न्यायाधीश हैं? क्या किसी राजनीतिक दल का संबंध किसी गैरकानूनी कार्य से है?

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on January 8, 2021 10:02 pm

Share
%%footer%%