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किसानों की भूख हड़ताल के बीच अमित शाह से मिलने पहुंचे कृषि मंत्री, यूपी में आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी

किसान आंदोलन के 18वें दिन आज तमाम किसान संगठन और लाखों किसान दिल्ली से सटे बॉर्डर और अन्य जगहों पर अनशन पर हैं। वहीं दूसरी तरफ दोपहर बारह बजे केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। वहीं हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के आवास पर पहुंचे हैं।

भारतीय किसान यूनियन दोआबा के अध्यक्ष मनजीत सिंह ने कहा, “हम सरकार को ये संदेश (भूख हड़ताल से) देना चाहते हैं कि जो अन्नदाता देश का पेट भरता है उसको आज आपकी गलत नीतियों की वजह से भूखा बैठना पड़ रहा है।”

किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब के दयाल सिंह ने कहा, “काले कानूनों की वजह से अन्नदाता भूख हड़ताल कर रहे हैं।”

उत्तर प्रदेश में कृषि कानूनों के​ विरोध में किसान नेता दलित प्रेरणा स्थल पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, “सरकार किसानों को आंदोलन में कुछ नया करने के लिए मजबूर न करे और जल्दी हमारी मांगें मान ले।”

बता दें कि आज भी कृषि कानूनों के खिलाफ जयसिंहपुर खेड़ा (राजस्थान-हरियाणा) बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं। किसानों के विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए बॉर्डर पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

कृषि कानूनों के खिलाफ जंतर-मंतर पर पंजाब के कांग्रेस सांसदों का विरोध प्रदर्शन जारी है। सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा, “किसान जो भी आंदोलन करेंगे हम उसमें भाग लेंगे। जितनी देर किसान भूख हड़ताल पर हैं उतनी देर मैं और MLA कुलबीर जीरा भी भूख हड़ताल पर हैं।”

किसान आंदोलन के समर्थन में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, दिल्ली सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन, गोपाल राय और आम आदमी पार्टी के अन्य नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

नहीं बदल रहे सरकार के सुर
कृषि कानूनों पर किसान आंदोलन से सरकार हैरान और परेशान है, लेकिन सरकार के सुर नहीं बदल रहे हैं। सरकार की ओर से लगातार को न कोई मंत्री कृषि कानून के किसान हितैषी और किसान आंदोलन को साजिश बताने में लगे हुए हैं। इसी कड़ी में आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिक्की के वार्षिक सम्मेलन में कहा, “हमारे कृषि क्षेत्र के खिलाफ प्रतिकूल कदम उठाने का कोई सवाल ही नहीं है। हाल के सुधारों को भारत के किसानों के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने दो विरोधाभासी बातें एक साथ कहते हुए सरकार के पीछे न हटने और किसानों से बातचीत की पेशकश करते हुए कहा है, “मैं किसानों से अपील करता हूं कि कृषि बिल से संबंधित मुद्दों को सरकार के साथ बैठकर हल करें। यदि किसान इन बिलों में कुछ जोड़ना चाहते हैं, तो यह बहुत संभव है, लेकिन पूरी तरह से केवल ‘हां या नहीं’ नहीं हो सकता है। एक साथ बैठने से समाधान होता है।”

भाकपा माले राज्य सचिव सुधाकर यादव सोनभद्र से गिरफ्तार
आज 14 दिसंबर को कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में तयशुदा कार्यक्रम के दौरान भाकपा माले सचिव सुधाकर यादव समेत अन्य माले और एपवा नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें सोनभद्र कोतवाली ले जाया गया है। पुलिस द्वारा उन्हें  धमकी दी गई और उनसे गाली-गलौच और अपमान किया गया है।

भाकपा माले राज्य सचिव कॉ. सुधाकर यादव, सोनभद्र के जिला सचिव शंकर कोल और एपवा जिला उपाध्यक्ष हीरामती की गिरफ्तारी की एपवा ने कड़ी निंदा करते हुए योगी सरकार को चेतावनी दी है कि नेताओं की गिरफ्तारी से किसान आंदोलन कमजोर नहीं होगा बल्कि और भी मजबूती से किसानों के पक्ष में एपवा 22 दिसंबर को पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी। इलाहाबाद में युवा मंच के अध्यक्ष अनिल सिंह और अमरेंद्र सिंह बाहुबली को बालसन चौराहे से पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह सभी किसान आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे। युवा मंच के राजेश सचान ने गिरफ्तारी की निंदा की है।

किसान आंदोलन के समर्थन में बदायूं के अंबेडकर पार्क में उपवास पर बैठने जा रहे लोकमोर्चा संयोजक अजीत सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के विरोध में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में अंबेडकर पार्क में उपवास पर बैठने जा रहे थे। लोकमोर्चा संयोजक ने अपनी गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।

जिओ फोन और सिम कार्ड तोड़ने और दहन का कार्यक्रम
आज जबकि दिल्ली की सीमा पर लाखों किसान भूख हड़ताल पर बैठे हैं। किसान संगठनों के राष्ट्रीय आह्वान पर पूरे देश में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में आज भाकपा (माले) द्वारा मोदी सरकार के अंबानी-अडानी राज के खिलाफ उत्तराखंड हल्द्वानी के कार रोड चौराहे पर विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। विरोध कार्यक्रम के दौरान अंबानी-अडानी के उत्पादों का बहिष्कार और जिओ फोन औक सिम कार्ड तोड़ने और दहन कार्यक्रम किया गया।

इस अवसर पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए माले राज्य सचिव राजा बहुगुणा ने कहा, “मोदी सरकार किसानों के हित में नहीं अडानी-अंबानी जैसे कॉरपोरेट घरानों के लिए काम कर रही है। मोदी राज अंबानी-अडानी राज में तब्दील हो चुका है। तीनों कृषि कानून किसानों के खिलाफ कॉरपोरेट के फायदे के लिए ही हैं, इसलिए किसान आंदोलन का अंबानी-अडानी के उत्पादों के बहिष्कार का फैसला सही समय पर लिया गया सही फैसला है। हम किसानों के इस आह्वान का समर्थन करते हैं।”

इस अवसर पर आज तय किया गया कि किसानों के सवाल पर मोदी सरकार के हठ और कंपनी राज के खिलाफ 27 दिसंबर को बुद्ध पार्क हल्द्वानी में किसानों का महाधरना आयोजित किया जाएगा।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 14, 2020 4:03 pm

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