मजलूमों के नेता अख्तर हुसैन को शिद्दत से किया गया याद

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पटना। पटना के गांधी संग्रहालय में गुरुवार (19 जनवरी) को जेपी आंदोलन के प्रसिद्ध नेता अख़्तर हुसैन की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में पूर्व सांसद व राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि अख्तर हुसैन मेरे अजीज थे। पर सिर्फ मेरे ही नहीं, जयप्रकाश नारायण सहित तमाम समाजवादियों के वे काफी करीब थे। बाबा नागार्जुन अख्तर हुसैन को जो तमगा देकर चले गए तो उस तमगे से किसी को रश्क हो सकता है। जब जेपी आंदोलन के इतिहास का पन्ना उल्टा जाएगा, तो अख्तर हुसैन को याद करना सबकी मजबूरी होगी। 

शिवानंद तिवारी ने कहा कि उन्होंने अख्तर हुसैन के मौत की खबर लालू प्रसाद जी और नीतीश कुमार दोनों के यहां दी, पर दोनों के यहां से श्रद्धांजलि संदेश भी नहीं आया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी लोहिया विचार मंच में अख्तर हुसैन से काफी करीबी थे। सत्ता में बैठे लोगों को आज अख्तर हुसैन याद नहीं आए, यह दुःखद है। तिवारी ने कहा कि वो एक बार अख्तर के घर गये तो देखा था कि उनके परिवार की कोई महिला सदस्य बीड़ी बना रही थीं। अख्तर कर्पूरी जी के पुत्र रामनाथ ठाकुर की संगत में राजनीति में आए थे। 

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा-अख्तर भाई उम्र में तो मुझसे बड़े थे ही, राजनीति में भी मुझसे बड़े थे। इस तरह गुमनामी में अख्तर भाई का अंत होगा, यह अनुमान नहीं था। हम लोग अख्तर भाई को छोटा पूरनचंद कहते थे। राजनीति में कितने भी दांव-पेंच हों, हम लोग इंसानियत की हिफाजत में सच बोलते रहें, यही अख्तर भाई को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

भाजपा नेता और पूर्व विधान पार्षद हरेंद्र प्रताप ने 90 के दशक का एक संस्मरण साझा किया कि दशमी के अवसर पर किस तरह अख्तर साहब के एक सुझाव पर प्रशासन ने अमल लिया और दंगे कि संभावना को काबू में कर लिया गया। पूर्व मंत्री एवं राजद के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने बताया कि किस तरह फ़क़ीरबाड़ा के पास उजड़ रहे फुटपाथ दुकानदारों की हिफाजत में अख्तर साहब खड़े हुए तो उनके साथ मैं खड़ा हुआ और गरीबों को उजड़ने से बचा लिया गया। वे समाजवादी राजनीति में सबसे छूटे हुए समाज के प्रतिनिधि और प्रवक्ता थे। बिहार सरकार में 15 सूत्री कार्यक्रम का उन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया था। वे मुख्यधारा की सत्ता की राजनीति में लागातार कायम रह सकते थे पर उन्हें समझौता करना और झुकना पसंद नहीं था।

समाजसेवी अरसद अजमल ने कहा कि एक इंसान एक कमिंटमेंट के साथ पूरी जिंदगी जी ले और उसे कुछ भी हासिल नहीं हो, यही उसकी हकीकत है, जिसे अख्तर जी के नाम के साथ याद रखा जाएगा। एसयूसीआई के राज्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने अख्तर हुसैन को जुल्म व अन्याय के खिलाफ ‘प्रतिरोध की आवाज’ कहा। 

माले नेता के.डी यादव ने कहा कि जब हमारी पार्टी ने भूमिगत राजनीति से निकलकर चुनावी राजनीति में आने का फैसला किया था, तो पार्टी की ओर से पटना में जो पहली खुली सभा आयोजित की गई थी, उसमें हमने अख्तर हुसैन को  कॉमरेड विनोद मिश्र के साथ मंच पर बोलने के लिए आमंत्रित किया था। हमारी पार्टी ने अख्तर साहब को पार्टी की ओर से श्रद्धांजलि दी है।

श्रद्धांजलि सभा के संयोजक और समता ग्राम सेवा संस्थान के अध्यक्ष जेपी सेनानी रघुपति ने अख्तर हुसैन के साथ अपने पांच दशक के संबंधों का जिक्र करते हुए बताया कि अख्तर हुसैन पटना कॉलेजियट हाई स्कूल के आदेशपाल अब्दुल हफीज के पुत्र थे। जेपी सेनानी पेंशन पर वे आश्रित थे। मृत्यु के समय वे अपनी पत्नी और बेटियों के लिए कोई मकान,जमीन, जायदाद छोड़कर नहीं गए। इस बार जब वे आईसीयू में थे तो मैंने फोन कर मुख्यमंत्री के यहां सूचना दी थी पर मुख्यमंत्री ने कोई पहल नहीं की। रघुपति जी ने दिल्ली में  छात्र संघर्ष वाहिनी की एक सभा  का जिक्र करते हुए कहा कि अरुण जेटली ने विजय प्रताप पर हाथ उठा दिया था तो अख्तर हुसैन ने बाज की तरह लपककर जेटली का हाथ पकड़ लिया और जोर से चिल्लाया। आप हाथ चलाएंगे तो जुल्म हो जाएगा। 

गांधी स्मारक निधि के सचिव विनोद रंजन ने लालू प्रसाद जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू जी की स्वागत सभा में अख्तर हुसैन के साथ लालू जी के वाकये को साझा किया।

आयोजन का संचालन करते हुए पुष्पराज ने कहा कि गांधी संग्रहालय जब पटना के बौद्धिक प्रतिपक्ष  का सबसे बड़ा केंद्र था। लक्ष्मी साहू और प्रो. ईश्वरी प्रसाद के साथ अख्तर हुसैन उस बैठकी के स्थाई सदस्य थे। उस बैठकी में अख्तर साहब बताते थे कि पुलिस का “थर्ड डिग्री टॉर्चर” क्या होता है, यह मुझसे जानो। थर्ड डिग्री टॉर्चर की हकीकत नहीं समझोगे तो किस तरह की पत्रकारिता करोगे। ज्ञात हो कि अख्तर हुसैन जेपी आंदोलन के उन चंद अग्रणी नेताओं में थे, जिन्हें पुलिस ने “थर्ड डिग्री टॉर्चर” की यातना दी थी।

श्रद्धांजलि सभा में राष्ट्रसेवा दल के इंदिरा रमण उपाध्याय,महेंद्र प्रताप , रामबिहारी,बी.एन विश्वकर्मा, राजेन्द्र मल्लिक ने भी अपने विचार प्रकट किए। सभा में अरुण शाद्वल,गालिब, अनीश अंकुर,सुनील सिन्हा,रूपेश,पी. के. दयाल,कॉमरेड सतीश,शफी अहमद मौजूद थे।

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