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एटा में वकील की निर्मम पिटाई का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, आज सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एटा में वकील पर पुलिस हमले का स्वत: संज्ञान लिया। इस संबंध में दर्ज मामला मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। हाईकोर्ट से स्वत:संज्ञान लेने का आग्रह बार काउंसिल ऑफ इंडिया, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, यूपी बार काउंसिल ने किया था। उन्हीं के अनुरोध पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा एटा के एक वकील पर हमले का संज्ञान लिया है। इस संबंध में दर्ज किया गया मामला आज सुबह 11 बजे मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

हाईकोर्ट ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस एसए बोबडे और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति गोविंद माथुर को पत्र लिखकर वकील से मारपीट करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया था। बीसीआई ने अपने पत्र में बताया था कि इस घटना का एक वीडियो वायरल हो गया था और इस संबंध में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने चिंता जताई थी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस एसए बोबडे और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति गोविंद माथुर को पत्र लिखकर वकील से मारपीट करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया था।

इसके अलावा  एटा जिले में घटी घटना को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद ने रविवार (27 दिसंबर) को एक पत्र लिख कर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मामले में “स्वतः संज्ञान” लेने का अनुरोध किया था। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद के महासचिव प्रभा शंकर मिश्रा की ओर से जारी किये गए पत्र में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित करते हुए यह कहा गया था कि जिस प्रकार से प्रशासन एवं पुलिस द्वारा अधिवक्ता एवं उसके परिवार को निर्दयता पूर्वक बर्बरता से मारा पीटा गया इससे अधिवक्ता समुदाय की भावनाओं को एवं पेशे के प्रति लोगों में दुखद अनुभूति का अनुभव हो रहा है। उल्‍लेखनीय है कि पुलिस ने एटा में एक घर का दरवाजा तोड़कर एक वकील को घसीटा, घर के बाहर खींच लिया और उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। इस घटना का वीडियो हाल ही में वायरल हुआ था।

दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने एडवोकेट महमूद प्राचा के दफ्तर में दिल्ली पुलिस की छापेमारी की निंदा की है, साथ ही उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक वकील पर पुलिस हमले पर भी रोष जताया है। एससीबीए ने एक बयान जारी कर एडवोकेट प्राचा के दफ्तर से गोपनीय जानकारियां जब्त करने की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण कहा है। बयान में कहा गया है कि ऐसा कृत्य एक वकील को बिना भय या पक्षपात के पेशे के अभ्यास से रोकता है। उल्लेखनीय है कि प्राचा दिल्ली दंगों की साजिश के मामलों में कई आरोपियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

एससीबीए ने बयान में कहा है कि पुलिस द्वारा एक वकील के दफ्तर की तलाशी और जब्ती दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई है, यह एक वकील के, बिना भय या पक्षपात के पेशे का अभ्यास करने के अधिकार को विफल करती है। यह आक्रामक कार्रवाई है और पुलिस की धमकियों के आगे एक वकील को झुकने के लिए मजबूर कर, कानून की नियत प्रक्रिया का दुरुपयोग करती है। ऐसे तरीके कानून में कभी नहीं सुने गए। इस तरह की तलाशी/ जब्ती कानून के विशिष्ट प्रावधानों के खिलाफ है, जो वकील और मुव‌क्क‌िल के रिश्ते और पत्राचारों की सुरक्षा करते हैं।

पुलिस द्वारा एक वकील के अधिकारों का अतिक्रमण अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत अभियुक्तों के निष्‍पक्ष मुकदमे के अधिकारों का उल्लंघन है। उन पुलिस अध‌िकार‌ियों द्वारा ली गई तलाशी में, गोपनीय जानकारी की जब्ती, जिन्होंने वकीलों के मुवक्किलों पर अभियोग लगाया है, जबकि उक्त जानकारियों वकील-मुवक्किल विशेषाधिकार के जर‌िए संरक्षित हैं, मुवक्किल के अधिकारों को प्रभावित करता है। यह गैरकानूनी है और एक मुवक्किल और उसके वकीलों के अध‌िकारों का उल्लंघन करता है।

उल्लेखनीय है कि 24 दिसंबर को दिल्ली पुलिस ने एडवोकेट प्राचा के दफ्तर पर छापा मारा था, जिसमें उनकी लॉ फर्म के आधिकारिक ईमेल पते के दस्तावेजों और आउटबॉक्स की मेटाडेटा की जांच की गई थी। एडवोकेट प्राचा ने लैपटॉप की जब्ती पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इसमें उन्हें वकीलों द्वारा सौंपी गई गोपनीय जानकारियां हैं और इससे अटॉर्नी-क्लाइंट विशेषाधिकार का हनन होगा। बाद में उन्होंने जब्ती के खिलाफ दिल्ली की एक कोर्ट में आवेदन दायर किया, जिसकी सुनवाई में कोर्ट ने जांच अधिकारी और तलाशी के पूरे वीडियो फुटेज को पेश करने का निर्देश दिया था। रविवार को पटियाला हाउस कोर्ट के एक मजिस्ट्रेट ने निर्देश दिया कि दिल्ली पुलिस द्वारा एडवोकेट महमूद प्राचा के दफ्तर में ली गई तलाशी की पूरी वीडियो फुटेज अदालत की मुहर के साथ सुरक्षित रखी जाए।

एससीबीए ने अपने बयान में कहा कि अधिवक्ताओं को उनके मुवक्किल गोपनीय विशेषाधिकार प्राप्त जानकार‌ियां सौंपते हैं और इस तरह के विशेषाधिकार कानून के तहत संरक्षित हैं और निष्पक्ष मुकदमे के अधिकार का आधार हैं। एसोसिएशन ने वकील के कार्यालय की तलाशी के आदेश का सर्च वारंट “नियमित यांत्रिक” तरीके जारी करने पर, मजिस्ट्रेट के फैसले पर भी चिंता व्यक्त की है। एससीबीए ने कहा कि वह दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा करती है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 29, 2020 10:05 am

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