सिस्टम की ख़राबी के चलते बस्तर में नहीं बिका 300 परिवारों का धान, लॉकडाउन में अब पाई-पाई को मोहताज

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बस्तर। सरकार के सिस्टम की खराबी के चलते सवंतीन अपना धान नहीं बेच पाईं। उनके पास लगभग 2 लाख रूपये का धान है। बावजूद इसके यह आदिवासी परिवार अब एक-एक पैसे के लिए मोहताज है। और अब जीवनयापन के लिए व्यापारियों से लेकर नाते रिश्तेदारों तक से उधार लेने की नौबत आ गयी है। ऐसा नहीं कि उन्होंने सरकारी खरीदी में धान बेचने की कोशिश नहीं की। उन्हें 5 बार टोकन दिया गया लेकिन सिस्टम की खराबी के चलते वह पाँचों बार धान बेचने में नाकाम रहीं। 

आज स्थिति यह है कि उनके पास धान तो रखा है लेकिन लॉकडाउन के चलते न तो वह उसे बेच पा रही हैं और न ही बैंक का कर्ज उतार पा रही हैं। और अब हालात इतने नाज़ुक हो गए हैं कि उनके लिए अपने घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। ऊपर से खरीफ की फसल के लिए उन्हें खाद, बीज आदि के लिए ऋण भी बैंक से नहीं मिल पाएगा जिससे उनकी चिंता दोहरी हो गई है।

बड़ेराजपुर ब्लॉक के कोसमी गांव के किसान सवन्तीन ने कहा कि धान बेचने के लिए उपार्जन केंद्र विश्रामपुरी में 16 दिसंबर, 7 जनवरी, फिर 4 फरवरी को टोकन दिया गया था और दो बार अगली तारीख के लिए नवीनीकरण किया गया था फिर भी उनका धान नहीं खरीदा गया। उन्होंने बताया कि यह कहानी केवल अकेली सवन्तीन की नहीं बल्कि ऐसे 300 किसानों की है जो पात्र होते हुए भी विभागीय लापरवाही के चलते धान नहीं बेच पाए। घसिया, मानसिंह, लच्छन और रतन मंडावी ने बताया कि कई बार टोकन मिलने के बाद भी उनका धान नहीं लिया गया। कभी बारदाना नहीं है कहकर टोकन निरस्त कर दिया गया तो कभी बारिश के कारण टोकन रद्द हुआ। अंत में कोंडागांव जिले में वंचित किसानों के धान की अलग से खरीदी की गई। उसमें भी क्षेत्र के किसानों को वंचित कर दिया गया। लॉकडाउन के चलते किसान व्यापारी के पास भी धान नहीं बेच पा रहे हैं।

घसिया, देशा, मानसिंह, लच्छन और रतन मंडावी ने बताया कि कई  बार टोकन मिलने के बाद भी उनका धान नहीं लिया गया। इस समय लॉकडाउन की स्थिति में व्यापारी के पास भी धान नहीं बेच पा रहे हैं। साथ ही व्यापारियों के यहां सरकारी रेट से आधे दाम पर खरीदी हो रही है। सरकारी दर 2500 रुपये प्रति क्विंटल था जबकि व्यापारी 13 सौ से 14 सौ में खरीदी कर रहे हैं।

किसानों ने बताया कि लाक डाउन के चलते उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। वे पाई-पाई के लिए मोहताज हो गए हैं। किसानों ने यह भी बताया कि धान नहीं बेच पाने से उनका पिछला कृषि ऋण भी जमा नहीं हो पाया है तथा इस समय खरीफ की फसल के लिए उन्हें खाद बीज एवं नगदी ऋण लेना था लिहाजा वह भी उन्हें अब नहीं मिल पाएगा। इसको लेकर उनकी चिंता और बढ़ गई है । इस संबंध में पूछे जाने पर सरकारी अधिकारियों ने वही रटा रटाया जवाब देकर अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। लेम्पस प्रबंधक एवं विश्रामपुरी खरीदी प्रभारी मधु बघेल ने बताया कि किसानों का पंजीयन हुआ था तथा उन्हें टोकन भी मिल गया था लेकिन सिस्टम में गड़बड़ी के चलते किसान धान बेचने से वंचित हो गए।

(बस्तर से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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