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कर्फ्यू और लॉकडाउन के बीच पंजाब में रोष-प्रदर्शनों का सिलसिला जारी

पंजाब में कोरोना वायरस के जबरदस्त कहर, लॉकडाउन और कर्फ्यू के बीच किसान-मजदूर सड़कों पर आकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ रोष-प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी ने 28 अप्रैल से 3 दिन के मुतवातर आंदोलन की घोषणा की थी। जिसके तहत वीरवार, 30 अप्रैल यानी तीसरे दिन राज्य के विभिन्न जिलों के 277 गांवों में रोष प्रदर्शन हुए। किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी केंद्र सरकार द्वारा गेहूं पर लगाए जा रहे वैल्यू कट का फैसला रद्द करने, गेहूं पर 200 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने और किसानों व खेत मजदूरों के तमाम कर्ज माफ करने की मांगों के साथ आंदोलनरत है। 277 गांव में हुए रोष प्रदर्शनों में किसानों ने परिवार सहित शिरकत की। हालांकि कई जगह से सामाजिक दूरी के अनिवार्य नियमों की अनदेखी की भी खबरें हैं।

कमेटी के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू बताते हैं, “मौजूदा हालात में किसानों और खेत मजदूरों की हालत और ज्यादा बदतर हो गई है। केंद्र और राज्य सरकार को उनकी कोई परवाह नहीं। बेमौसमी बरसात और ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। केंद्र सरकार बड़े उद्योगपतियों अथवा पूंजीपतियों के कर्ज सरेआम तथा चोर रास्तों से माफ कर रही है लेकिन यहां किसान कर्ज से आजिज होकर खुदकुशी करने को मजबूर हैं। अन्नदाता का सारे कर्जे माफ करना सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिए।” गौरतलब है कि किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने अनाज मंडियों में किसानों की फजीहत, बारदाने की कमी, रकम का भुगतान न करने, लिफ्टिंग में देरी और मंडियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ भी मोर्चाबंदी की घोषणा की है।                                             

उधर, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और मंडी गोबिंदगढ़ में भी मजदूरों ने रोष प्रदर्शन किए। ये मजदूर प्रवासी हैं। इन शहरों में बीते एक पखवाड़े से प्रतिदिन मजदूर कर्फ्यू और लॉकडाउन को तोड़कर सड़कों पर आकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि इनके साथ कोई बैनर नहीं है और सब जगह ये असंगठित हैं। लुधियाना में वीरवार को आठ अलग-अलग जगह प्रवासी मजदूरों ने राशन की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। लुधियाना के प्रदर्शनकारी एक मजदूर ललित महतो ने बताया कि उनका करीब 100 मजदूरों का ग्रुप है और उन्हें कई दिन से भूखे रहना पड़ रहा है। सरकारी-गैरसरकारी तौर पर कोई मदद नहीं मिल रही। ऐसे आलम में हम पैदल ही अपने मूल राज्य बिहार लौट जाना चाहते हैं लेकिन सरकार यह भी नहीं करने दे रही।

ताजपुर रोड पर रहने वाले एक कोरोना वायरस के फैलाव के बाद अचानक बेरोजगार कर दिए गए मजदूर सोनू ने बताया कि उसने अपने 35 बेकाम मजदूर साथियों के लिए सरकारी अमले के कर्मचारियों से राशन की गुहार की तो सुनने को मिला कि बिहारियों को राशन नहीं दिया जाएगा। हालांकि स्थानीय विधायक संजय तलवार बातचीत में इसे गलतबयानी करार देते हैं। बेशक कई अन्य मजदूरों ने भी यह आरोप दोहराए हैं। अमृतसर, जालंधर और गोबिंदगढ़ में प्रदर्शन करने वाले प्रवासी मजदूरों की भी मुख्य मांग राशन को लेकर है। इनमें से ज्यादातर को राशन नहीं मिल रहा और इनके पैसे भी खत्म हो गए हैं। काम पहले से ही छिन गया है। घोषणा के बावजूद बंद इंडस्ट्री अथवा औद्योगिक इकाइयां खुल नहीं रहीं और न इसके आसार हैं। भूख, बेरोजगारी और अनिश्चितता भरे बदहाल हालात प्रवासी मजदूरों को लगातार बेजार कर रहे हैं।                                       

बरनाला में कश्मीरियों का प्रदर्शन।

इस बीच पंजाब में फंसे कश्मीरी लोग भी अब विरोध स्वरूप सड़कों पर उतर रहे हैं। बुधवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में कश्मीरियों ने सपरिवार घर वापसी की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किए। नवांशहर में लगभग 30 तो बरनाला में 57 कश्मीरी परिवार बीते एक महीने से वापसी की इजाजत देने की गुहार पंजाब सरकार से लगा रहे हैं। बरनाला में फंसे श्रीनगर के रियाज मोहम्मद के अनुसार कर्फ्यू और लॉकडाउन के चलते उन्हें जीवनयापन में जबरदस्त मुश्किलें आ रही हैं और सरकार तथा प्रशासन की ओर से कोई सहयोग नहीं मिल रहा। ऐसे में सरकार हमारा कश्मीर लौटना सुनिश्चित करे। एक अन्य कश्मीरी गुलाम मोहम्मद कहते हैं कि न कश्मीर प्रशासन उनकी सुध ले रहा है और न पंजाब सरकार। केंद्र से तो वैसे भी किसी किस्म की मदद की कोई उम्मीद ही नहीं।

(अमरीक सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल जालंधर में रहते हैं।)

This post was last modified on April 30, 2020 9:56 pm

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