देश के विभिन्न राज्यों में किसानों के नेतृत्व में भाजपा नेताओं का विरोध जारी

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पंजाब के किसान संगठनों के कई नेताओं ने आज चंडीगढ़ में पंजाब राज्य सरकार के सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। यह 20 अगस्त को जालंधर में शुरू किए गए गन्ना किसानों के विरोध का समाधान खोजने के लिए था। हालांकि बैठक का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। पंजाब सरकार के प्रतिनिधिमंडल द्वारा किसान नेताओं को आश्वासन दिया गया कि वे पंजाब में गन्ना उत्पादन से संबंधित उत्पादन की लागत के विवरण पर कल किसान नेताओं और विशेषज्ञों के बीच परामर्श करेंगे और इस परामर्श से प्राप्त जानकारी के आधार पर परसों मुख्यमंत्री इस पर निर्णय लेंगे। इस पृष्ठभूमि में आंदोलनकारी किसानों ने गन्ना एमएसपी (MSP) बढ़ोतरी और किसानों के बकाया भुगतान के लिए अपने अनिश्चितकालीन संघर्ष को जारी रखने का फैसला किया है। प्रदर्शनकारी किसान हाईवे और रेलवे लाइन पर धरना जारी रखेंगे।

एसकेएम अपनी प्रेस विज्ञप्तियों में प्रधानमंत्री के झूठ और उनके झूठे दावों को बार-बार उजागर किया है, चाहे वह एमएसपी (MSP) से संबंधित हों या किसानों की आय दोगुनी करने या प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)) या एआईएफ (AIF) से संबंधित हों। एसकेएम पीएम मोदी को 10 फरवरी 2021 को उनके संसद में दिये गये भाषण की भी याद दिलाना चाहेगा इसलिए ताकि उनके भ्रामक तर्कों को राष्ट्र के सामने रखा जा सके तथा उनको संसद में अपने बयानों के लिए जवाबदेह बनाया जा सके। उन्होंने झूठा बयान दिया था कि नए कानून किसानों के लिए स्वैच्छिक हैं। उन्होंने विरोध कर रहे किसानों का जवाब देने की भी कोशिश की, जो कहते रहे हैं कि उन्होंने इन कानूनों की कभी मांग नहीं की, उन्होंने कई प्रगतिशील कानूनों का उदाहरण दिया, जिन्हें भारतीय संसद ने अधिनियमित किया था, यह कहने के लिए कि सरकारें इन्हें जिम्मेदारी की भावना के रूप में लाती हैं।

मोदी शायद यह नहीं जानते हैं या स्वीकार नहीं करना चाहते हैं कि महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए प्रगतिशील कानून भारत में एक मजबूत, जीवंत और प्रगतिशील महिला अधिकार आंदोलन के कारण आए, जो इस तरह के कानूनी संरक्षण के लिए संघर्ष कर रहा था, चाहे वह दहेज विरोधी कानून हों, या बाल विवाह विरोधी कानून हों, या सती-विरोधी कानून, या समान संपत्ति के अधिकारों के लिए कानून। मोदी द्वारा सामाजिक सुधारों का “आर्थिक सुधारों” के साथ जोड़ना भी अति दोषपूर्ण है, दोनों के बीच अंतर को वह अच्छी तरह से जानते हैं। महत्वपूर्ण रूप से, हम उन्हें उस दिन संसद में उनके अपने बयानों की याद दिलाना चाहेंगे – जैसे “यह लोकतंत्र नहीं हो सकता है अगर लोगों को (उनके अधिकारों) की मांग करना पड़े”; “सरकारों को संवेदनशील होना होगा”; “सरकारों को आगे बढ़ना होगा और नागरिकों की भलाई के लिए जिम्मेदार होना होगा, वह भी लोकतांत्रिक तरीकों से”; “सरकारों को नागरिकों को अधिकार और हक प्रदान करके आगे बढ़ना है”। मोदी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि “देश के युवा बहुत लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकते”। यह बिल्कुल सच है। एसकेएम पीएम मोदी को इन सभी बयानों की याद दिलाना चाहता है और मौजूदा जारी गतिरोध के संबंध में वे कितने उपयुक्त हैं, यह बतलाना चाहता है। सरकार विरोध कर रहे किसानों के साथ जो खेल रही है, अब समय आ गया है कि वह खेल बन्द करे और साबित करे कि उनकी सरकार वास्तव में संवेदनशील और लोकतांत्रिक है और किसान आंदोलन की मांगों को पूरा करे।

रक्षा बंधन एक परंपरागत त्योहार है, जो देश के कई हिस्सों में मनाया जाता है। परंपरा के हिस्से के रूप में, यह ज्ञात है कि सीमा पर हमारे सैनिकों को इस दिन राखी भेजी जाती है, भले ही सैनिकों की बहनें खुद सीमा तक नहीं पहुंच सकतीं। इसी तरह की परंपरा का पालन करते हुए, पंजाब और हरियाणा की कई ग्रामीण महिलाओं ने आज दिल्ली मोर्चा पर किसानों को राखी भेजकर किसानों के संघर्ष को समर्थन और प्रोत्साहन दिया।

भाजपा नेताओं को कई अलग-अलग राज्यों और स्थानों पर स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ रहा है। दक्षिण दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी के वाहन को कल किसानों ने शाहजहांपुर में राजस्थान-हरियाणा सीमा पर देखा और तुरंत काले झंडे दिखाकर विरोध शुरू कर दिया। शांतिपूर्ण विरोध से बचने के लिए पुलिस को वाहन को दूसरे मार्ग पर ले जाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। उत्तराखंड के रुड़की में भाजपा की एक बैठक को स्थानीय किसानों के काले झंडे के विरोध का सामना करना पड़ा। हरियाणा के हिसार में किसान संगठनों ने भाजपा विधायक जोगी राम सिहाग को एक प्रदर्शनकारी के खिलाफ दुर्व्यवहार के लिए अल्टीमेटम जारी किया है और विधायक से माफी मांगने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर भाजपा नेता ने माफी नहीं मांगी तो उनका विरोध तेज किया जाएगा। उधर चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिला प्रदर्शनकारी के साथ बदसलूकी करने वाले भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

उत्तर प्रदेश,हरियाणा और उत्तराखंड में विभिन्न खाप मुजफ्फरनगर में 5 सितंबर की महापंचायत को अपना समर्थन देने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। उस दिन मुजफ्फरनगर में किसानों को  एकजुट करने के लिए एसकेएम से जुड़े किसान नेता भी अलग-अलग जिलों में बैठकें कर रहे हैं। इस आयोजन के बाद मिशन यूपी और उत्तराखंड के हिस्से के रूप में एसकेएम की टीमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सभी हिस्सों में वापस जाएंगी, ताकि जनता को भाजपा और मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों और दृष्टिकोणों के बारे में बताया जा सके।

सिंघु बॉर्डर और उसके आसपास प्रदर्शनकारी किसानों और स्थानीय नागरिकों के लिए नि:शुल्क चिकित्सा शिविर चलाए जा रहे हैं। आज इन शिविरों में निःस्वार्थ भाव से सेवा देने वाले चिकित्सकों का सिंघु सीमा किसान आंदोलन कार्यालय में अभिनंदन किया गया।

(संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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