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सीबीआई के चार अफसरों के घर रेड, भ्रष्टाचार के मामले दर्ज

पूरे देश में भ्रष्टाचार ने संस्थागत रूप ले लिया है, बस इसमें जो पकड़ जाये वो भ्रष्ट जो न पकड़ा जाये वो खानदानी ईमानदार। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि सरकारी सेवकों के भ्रष्टाचार की जांच करने वाली देश की प्रमुख जाँच एजेंसी सीबीआई भी इससे अछूती नहीं है। भ्रष्टाचार की जाँच करनी हो तो केवल राजधानी दिल्ली में तैनात पुलिस, सीबीआई, इनकम टैक्स, कस्टम सहित सभी केन्द्रीय विभागों के केवल इंस्पेक्टर रैंक के कर्मियों की जाँच करा दी जाय तो अरबों खरबों की सम्पत्तियां बरामद होंगी।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक संक्षिप्त प्रेस नोट में कहा है कि सीबीआई के चार अधिकारियों, जिसमें डीएसपी, इंस्पेक्टर, स्टेनो और निजी व्यक्तियों / अधिवक्ताओं सहित अन्य शामिल हैं के खिलाफ आईपीसी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन लोगों ने कतिपय विवादास्पद मामलों की जाँच में घालमेल किया है।

दरअसल सीबीआई ने बैंक के साथ धोखाधड़ी करने की आरोपी कंपनियों की मदद करने के संबंध अपने कई अधिकारियों के खिलाफ आधिकारिक पद के कथित दुरुपयोग एवं भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए। सीबीआई ने गुरुवार सुबह एक तलाश अभियान चलाया।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) उसे शर्मिंदा करने वाले इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है, जिसमें उसके अपने ही अधिकारी बैंकों से धोखाधड़ी करने की आरोपी उन कंपनियों से कथित रूप से रिश्वत लेने को लेकर जांच के दायरे में हैं। जिनके खिलाफ एजेंसी जांच कर रही है। 14 स्थानों पर कल आरोपियों के ठिकानों पर, जिसमें दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, गुड़गांव, मेरठ और कानपुर शामिल हैं, छापे डाले गये और तलाशियां ली गईं। जांच अभी जारी है। आरोप है कि इनमें से कुछ अधिकारी आरोपी कंपनियों से कथित रूप से नियमित भुगतान ले रहे थे।

गाजियाबाद स्थित सीबीआई अकेडमी में तैनात एक कर्मचारी पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। जांच में अधिकारी का नाम आर के ऋषि बताया जा रहा है। वह सीबीआई अकादमी गाजियाबाद में डीएसपी के पद पर तैनात है। इसके खिलाफ कई दिनों से भ्रष्टाचार की शिकायतें मिल रही थीं। भ्रष्टाचार के कुछ मामलों में गाजियाबाद के शिवालिक अपार्टमेंट्स में दो से तीन अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी अभियान चलाया गया। अधिकारियों की पहचान का खुलासा नहीं हुआ है। इसके अलावा भ्रष्टाचार के आरोप में दिल्ली और नोएडा में भी सीबीआई के दूसरे अफसरों के घर पर छापे मारे गए।

गौरतलब है कि सीबीआई में कितना और किस स्तर पर भ्रष्टाचार है इसके लिए एक ही उदाहरण काफी है। लगभग 5 साल पहले देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई भ्रष्टाचार के मामले को लेकर बुरी तरह घिर गई थी। इस मामले में तत्कालीन सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया था और आलोक वर्मा का कार्यालय सील कर दिया गया था ।

आलोक वर्मा केंद्र शासित काडर के 1979 बैच के आईपीएस अफसर थे । वह 1 फरवरी 2017 से सीबीआई प्रमुख थे। विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने दावा किया था कि सना ने वर्मा को 2 करोड़ रुपये दिए थे जिससे वह मोइन कुरैशी केस में बच जाए।

राकेश अस्थाना गुजरात काडर के 1984 बैच के आईपीएस अफसर और सीबीआई के तत्कालीन विशेष निदेशक थे। स्टर्लिंग बायोटेक में अस्थाना की कथित भूमिका के लिए एक याचिका भी दाखिल की गई थी। सीबीआई प्रमुख वर्मा ने आरोप लगाए गए थे कि उन्हें 3.8 करोड़ रुपये घूस के तौर पर मिले थे।

मोईन कुरैशी देश के सबसे बड़े मांस निर्यातकों में से एक थे । आरोप है कि वह पूर्व सीबीआई प्रमुखों एपी सिंह और रंजीत सिन्हा के काफी करीबी थे। एजेंसियां उनके खिलाफ कथित कर चोरी, लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार की जांच कर रही थीं। सतीश बाबू सना हैदराबाद के उद्योगपति हैं। 2015 में मांस निर्यातक मोइन कुरैशी के खिलाफ एक ईडी केस में सबसे पहले उनका नाम सामने आया। अस्थाना की टीम ने केस की जांच की थी। मनोज दुबई से काम करने वाला बिचौलिया है, जिसे सीबीआई ने पकड़ा था । सना ने दावा किया था कि मनोज ने उसका नाम हटवाने के लिए 5 करोड़ रुपये मांगे थे, जो अस्थाना को दिया जाना था।

तत्कालीन सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच तकरार अक्तूबर 2017 में शुरू हुई। उस समय वर्मा ने सीवीसी के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय पैनल की बैठक में अस्थाना को विदेश निदेशक बनाए जाने पर आपत्ति जताई। वर्मा का मानना था कि अधिकारियों के इंडक्शन को लेकर उनके द्वारा की गई सिफारिश को अस्थाना ने बिगाड़ दिया। वर्मा ने यह भी आरोप लगाया था कि स्टर्लिंग बायोटेक घोटाले में अस्थाना की भूमिका के कारण सीबीआई भी घेरे में आ गई। हालांकि पैनल ने आपत्ति को खारिज करते हुए अस्थाना को पदोन्नत कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी अस्थाना को क्लीन चिट दे दी। 

जवाबी कीर्तन में 24 अगस्त को अस्थाना ने सीवीसी और कैबिनेट सचिव को लिखा, जिसमें वर्मा, उनके करीबी अतिरिक्त निदेशक एके शर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार की जानकारी दी। अस्थाना ने यह भी बताया कि कैसे कई आरोपियों को बचाने की कोशिश हुई। अस्थाना ने दावा किया कि सना ने वर्मा को 2 करोड़ रुपये दिए थे जिससे वह कुरैशी केस में बच जाए। अस्थाना ने फिर से सीवीसी और कैबिनेट सचिव को लिखा था और और कहा था कि वे सना को गिरफ्तार करना चाहते थे लेकिन वर्मा ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। अस्थाना ने यह भी दावा किया कि फरवरी में जब उनकी टीम ने सना से पूछताछ की कोशिश की थी, तो वर्मा ने फोन कर रोक दिया।

इसके बाद अस्थाना से पहले आलोक वर्मा के खिलाफ कार्रवाई हुई। सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर रहे राकेश अस्थाना के साथ वर्मा का विवाद जगजाहिर होने के बाद उनको 23 अक्तूबर की बीच रात एजेंसी के प्रमुख पद से हटा दिया गया लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनको फिर से बहाल कर दिया। कोर्ट ने यह दलील दी कि सरकार सेलेक्ट कमेटी से राय किए बगैर सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति में बदलाव नहीं कर सकती है।

अन्तत उच्चतम न्यायालय से सीबीआई डायरेक्टर के रूप में बहाल आलोक वर्मा को चयन समिति की बैठक के बाद निदेशक पद से हटाया दिया गया और फायर सेफ्टी विभाग में भेज दिया था। वर्मा ने बाद में अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया। सरकार ने इसके बाद सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को उनके पद से हटाकर सिविल एविएशन सिक्योरिटी ब्यूरो भेज दिया। उनके साथ ही ज्वॉइंट डायरेक्टर ए. के. शर्मा, डीआईजी एम. के. सिन्हा और जयंत नायकनवारे का कार्यकाल भी घटा दिया गया। हालाँकि अस्थाना दो केन्द्रीय विभागों का दायित्व संभाल रहे हैं जिसमें से एक एनसीबी है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)  

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This post was last modified on January 15, 2021 11:56 am

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