Subscribe for notification

दौलत बेग ओल्डी के पास चीन ने खोला नया फ्रंट, देप्सांग में की घुसपैठ

नई दिल्ली। अभी जबकि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थित गलवान घाटी, हॉटस्प्रिंग्स और पैंगांग त्सो में बढ़ते तनाव को लेकर बातचीत जारी है चीन ने इस बीच एक और सामरिक इलाके में घुसपैठ बना ली है। बताया जा रहा है कि उत्तरी इलाके में स्थित देप्सांग के मैदानी क्षेत्र में उसके सैनिक एलएसी को पार कर भारतीय सीमा में घुस आए हैं। आपको बता दें कि देप्सांग वही स्थान है जिसको लेकर यूपीए के शासन के दौरान अप्रैल, 2013 में खासा बवाल हुआ था। और महीने भर से ज्यादा दोनों के बीच खींचा-तानी चली थी। लगता है चीन की यह घुसपैठ विवादित सीमा क्षेत्र में एलएसी को और पश्चिम शिफ्ट करने की उसकी कोशिश का हिस्सा है।

दौलत बेग ओल्डी सेक्टर की हवाई पट्टी से तकरीबन 30 किमी दूर दक्षिण-पूर्व में स्थित इस जगह पर जिसे देप्सांग का वाई जंक्शन या फिर बॉटिलनेक कहा जाता है, चीनी सैनकों का बड़ा जमावड़ा हो गया है। इंडियन एक्सप्रेस के सूत्रों का कहना है कि चीन के इस सैन्य जमावड़े में सैनिक, भारी गाड़ियां और विशेष सैन्य साजो-सामान शामिल हैं।

बॉलिटनेक नाम उस चट्टानी पहाड़ी से लिया गया है जो देप्सांग के समतल मैदानों में गाड़ियों की आवाजाही को रोक देता है। यह वही स्थान है जहां अप्रैल, 2013 में चीनियों ने अपना टेंट लगा दिया था। दोनों सेनाओं के बीच वह गतिरोध तीन हफ्ते तक जारी रहा था। और फिर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के बाद यथास्थिति बहाल हो पायी थी।

बॉटिलनेक भारतीय एलएसी से तकरीबन 18 किमी दूर है हालांकि चीनियों का दावा है कि लाइन उसके भी पांच किमी पश्चिम में स्थित है। यह लोकेशन बर्ट्स के उत्तर-पूर्व में सात किमी दूर स्थित है। बर्ट्स 255 किमी लंबे डरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड पर पड़ने वाला एक लद्दाखी कस्बा है। यहां भारतीय सेना की एक पोस्ट भी स्थित है।

संपर्क किए जाने पर सेना की मीडिया विंग ने इस पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। हालांकि एक भारतीय अफसर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि ‘रिपोर्ट की न तो पुष्टि की जा सकती है और न ही उससे इंकार किया जा सकता है’।

बॉटिलनेक वाई जंक्शन इसलिए जाना जाता है क्योंकि बर्ट्स से आने वाली रोड दो ट्रैकों में बंट जाती है। इसमें से एक उत्तर दिशा में राकी नाला होते हुए पेट्रोलिंग प्वाइंट-10 (पीपी 10) तक जाता है दूसरा दक्षिण-पूर्व की दिशा में पीपी-13 तक जाता है। इन दोनों ट्रैक को फालो करते हुए भारतीय पेट्रोल्स पैदल पीपी-10, पीपी-11, पीपी- 11A, पीपी-12 और पीपी-13 तक जाते हैं।

जो लोग वहां की परिस्थितियों से वाकिफ हैं या फिर मामले को डील कर रहे हैं उनका कहना है कि अगर चीन पीपी-10 से पीपी-13 तक बॉटिलनेक के जरिये जुड़ जाता है तो यह आसानी से एलएसी को और आगे खिसकाने में सफल हो जाएगा। और फिर यह भारत को डीबीओ एयरफील्ड के पास स्थित एलएसी से जुड़े अहम हिस्से तक भारत की पहुंच को रोक देगा। और इस तरह से चीन को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण डीएसडीबीओ रोड के बेहद करीब ला देगा।

इस इलाके में पीपी-10, पीपी-11, पीपी- 11A, पीपी-12 और पीपी-13 समेत सभी पेट्रोलिंग प्वाइंट पेट्रोल की सीमा (एलओपी) पर ही आते हैं। जिन्हें भारतीय नक्शे में कुछ किमी पर एलएसी के पश्चिम में चिन्हित किया गया है। यह 20 किमी लंबा सीमा पर अकेला क्षेत्र है जहां पेट्रोलिंग की सीमा एलएसी को छोटा कर देती है। ऐसा ऐतिहासिक कारणों से किया गया है और एलओपी को चीनी स्टडी ग्रुप ने पास किया है।

2013 के गतिरोध के हल होने के बाद भारत ने बॉटिलनेक पर एक नया पेट्रोल आधार बना लिया था। यह सेना की तैनाती के लिहाज से स्थाई किस्म का था। ऐसा इसलिए किया गया था जिससे न केवल चीनी पेट्रोल पर निगरानी रखी जा सके बल्कि उन्हें उससे आगे बढ़ने से भी रोका जा सके। बावजूद इसके सितंबर, 2015 में एक चीनी पेट्रोल बर्ट्स के पास डेढ़ किमी के दायरे में पहुंच गया था।

भारतीय पक्ष के मुताबिक चीनी पेट्रोल्स द्वारा 2019 में बड़े स्तर पर घुसपैठ की घटनाओं को अंजाम दिया गया। यह संख्या 157 बतायी जा रही है। 2018 में यह 83 थी जबकि 2017 इसकी तादाद महज 57 थी।    

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on June 25, 2020 8:55 am

Share