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सुप्रीम कोर्ट से कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी को अंतरिम जमानत

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी के मामले में अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य और अन्य मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित निहित प्रक्रिया का गिरफ्तार करने से पहले पालन नहीं किए जाने के आधार पर मुनव्वर फारूकी को अंतरिम जमानत दे दी है। इसके अलावा इलाहाबाद हाई कोर्ट से जारी प्रोडक्शन वारंट पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है। पीठ ने फारूकी के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ कृपाल की याचिका को देखने के बाद फारूकी को अंतरिम जमानत दे दी कि गिरफ्तारी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 ए के उल्लंघन में की गई थी।

जस्टिस रोहिंटन नरीमन और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने दोनों याचिकाओं में नोटिस जारी किया और उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के लिए शर्तों पर अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाता है। पीठ ने कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर भी नोटिस जारी किया है, जिसमें मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्हें धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले में जमानत देने से इनकार किया गया था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नरीमन ने वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ कृपाल (फारूकी के लिए) से पूछा कि क्या अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य के मामले में तय सिद्धांतों का पालन किया गया था। जस्टिस नरीमन ने कहा कि क्या यह सही है कि अरनेश कुमार के फैसले का पालन नहीं किया गया? यदि इसका पालन नहीं किया गया है, तो यह काफी अच्छा है।

गौरतलब है कि अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य, (2014) 8 एससीसी 273 में, यह स्पष्ट रूप से निर्देश पारित किया गया था कि उन सभी मामलों में जहां किसी व्यक्ति की धारा 41 (1), सीआरपीसी के तहत पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है, आरोपी को एक निर्दिष्ट स्थान और समय पर उसके सामने उपस्थित होने का निर्देश देने के लिए नोटिस दिया जाएगा। कानून ऐसे अभियुक्त को पुलिस अधिकारी के सामने पेश करने के लिए बाध्य करता है और यह आगे कहता है कि यदि ऐसा कोई आरोपी नोटिस की शर्तों का अनुपालन करता है, तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक कि कारणों को दर्ज नहीं किया जाता है, अगर पुलिस अफसर की राय है कि गिरफ्तारी ज़रूरी है।

पीठ 28 जनवरी को उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर विचार कर रही थी। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एसएलपी के अलावा, मुनव्वर फारूकी ने एमपी पुलिस की एफआईआर के खिलाफ भी एक याचिका दायर की है।

पिछली पहली जनवरी को इंदौर के 56 दुकान इलाके में एक कैफे में आयोजित एक शो के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के मामले में चार अन्य लोगों के साथ गुजरात निवासी फारूकी को 2 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ स्थानीय भाजपा विधायक मालिनी लक्ष्मण सिंह गौर के बेटे एकलव्य सिंह गौर (36) ने शिकायत दर्ज कराई थी। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों की पहचान एडविन एंथोनी, प्रखर व्यास और प्रियम व्यास के रूप में की गई है।

पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 299-ए (जानबूझकर और निंदनीय कृत्य, किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को उनके धर्म या धार्मिक आस्थाओं का अपमान करने से रोकने के लिए) और धारा 269 (गैरकानूनी या लापरवाही से किसी भी बीमारी का संक्रमण फैलने की संभावना, जिससे जीवन को खतरा हो) के तहत मामला दर्ज किया था। 28 जनवरी को, मप्र उच्च न्यायालय (इंदौर पीठ) के न्यायमूर्ति रोहित आर्य की एकल पीठ ने फारूकी और शो के आयोजक नलिन यादव द्वारा दायर की गई जमानत की अर्जी को खारिज कर दिया और कहा कि जमानत देने के लिए कोई मामला नहीं बनाया गया है।

पीठ ने कहा कि अब तक की गई जांच में यह सुझाव दिया गया है कि आवेदकों द्वारा जानबूझकर एक इरादे के साथ भारत के नागरिकों के वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली उक्तियों को बनाया गया था। फारूकी ने कहा कि उन्होंने शो के दौरान कभी भी कथित रूप से बयान नहीं दिए। 25 जनवरी की सुनवाई में जस्टिस रोहित आर्य ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान कथित रूप से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए फारूकी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में दर्ज मामले में जारी पेशी वारंट पर भी रोक लगा दी है। फारूकी और चार अन्य को भाजपा विधायक के बेटे की शिकायत पर पहली जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।

मुनव्वर फारूकी के खिलाफ दाखिल दूसरे राज्यों में मुकदमों को खारिज किए जाने की मांग वाली याचिका पर पीठ ने नोटिस जारी किया है। उच्चतम न्यायालय में मुनव्वर फारूकी ने कुल दो याचिकाएं दायर की हैं। एक में उन्होंने खुद को जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई है और दूसरे में अपने खिलाफ दर्ज अलग-अलग राज्यों में मुकदमों को एक जगह ट्रांसफर करने की मांग की गई है।

इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट से जारी प्रोडक्शन वारंट पर पीठ ने रोक लगा दी है। एक याचिका तो प्रयागराज में भी दर्ज है। प्रयागराज में दर्ज केस में पिछले महीने प्रोडक्शन वारंट जारी किया गया। प्रयागराज पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट इंदौर सीजेएम कोर्ट और जेल में पेश किया, इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट से जारी प्रोडक्शन वारंट पर पीठ ने रोक लगा दी है।

फारूकी की जमानत याचिका को पहले एक सत्र न्यायालय और उसके बाद 28 जनवरी को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के अलावा, फारूकी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के लिए एक आपराधिक रिट याचिका भी दायर की है।

फारूकी नए साल पर इंदौर में 56 दुकान स्थित मुनरो कैफे के कार्यक्रम में प्रस्तुति देने आए थे। हिंदू संगठनों को खबर लगी तो वे भी टिकट लेकर इस कार्यक्रम में पहुंचे। वहां फारूकी से पहले कॉमेडियन प्रियम प्रतीक व्यास ने ही कथित रूप से हिंदू देवी-देवताओं पर अशोभनीय टिप्पणी शुरू कर दी। इस पर हिंदू संगठन के नेताओं ने उनकी पिटाई कर दी और थाने ले गए। फारूकी गुजरात के रहने वाले हैं। उन पर पहले भी हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने का आरोप लगता रहा है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on February 6, 2021 11:59 am

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