Sunday, October 24, 2021

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‘राउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ के बावजूद हर दूसरे अमेरिकी भारतीय को होना पड़ता है नस्लीय भेदभाव का शिकार

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‘राउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रम्प’ जैसे बहुप्रचारित और बहुखर्चित कार्यक्रमों और और पूर्व राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा से नरेंद्र मोदी की तू-तड़ाक वाली यारी से मोदी की अपनी ब्रांडिंग और पैकेजिंग में भले ही फायदा हुआ लेकिन अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के नागरिकों को पिछले एक साल में भेदभाव का शिकार होना पड़ा है।

‘भारतीय-अमेरिकियों की सामाजिक वास्तविकता’ नामक शीर्षक से 09 जून बुधवार को रिलीज हुए एक ऑनलाइन सर्वे के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय मूल के हर दूसरे नागरिक को नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

गौरतलब है कि ट्रंप शासन में यूएसए में नस्ली भेदभाव की कई घटनाओं के सामने आने पर ये सर्वे किया गया था। सर्वे के अनुसार भारतीय मूल के अप्रवासी भारतीयों के बीच आपस में सामाजिक ध्रुवीकरण भी बहुत ज्यादा हावी है।

बता दें कि अमेरिका में भारतीय मूल के नागरिकों की संख्या कुल आबादी के एक प्रतिशत से अधिक है और सभी पंजीकृत मतदाताओं की संख्या के एक प्रतिशत से कम है। साल 2018 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में भारतीय मूल के 42 लाख लोग रह रहे हैं। यूएसए में भारतीय-अमेरिकी दूसरा सबसे बड़ा प्रवासी समूह है।

रिपोर्ट के मुताबिक – “अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के नागरिकों को नस्ल व रंग-रूप के आधार पर सबसे ज्यादा भेदभाव किया जाता है और पिछले एक साल के अंदर हर दो में से एक भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक को इसका सामना करना पड़ा है।”

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें वो भारतीय मूल के लोग भी शामिल हैं जिनका जन्म अमेरिका में ही हुआ है। भारतीय मूल के ऐसे नागरिक जिनका जन्म अमेरिका में ही हुआ है को इस तरह की भेदभाव की घटना का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ता है।”

अमेरिका में हुये ऑनलाइन सर्वे में ये भी पाया गया कि भारतीय मूल के नागरिकों की जिंदगी में धर्म एक अहम भूमिका निभाता है। करीब 40 फीसदी लोग दिन में कम से कम एक बार प्रार्थना करते हैं और 27 फीसदी हफ्ते में एक बार धार्मिक सेवाओं में भाग लेते हैं।

इस रिपोर्ट में साथ ही कहा गया है कि भारतीय-अमेरिकियों के बीच ध्रुवीकरण अमेरिका के समाज में चल रहे ट्रेंड को दिखाता है। रिपोर्ट बताता है कि, व्यक्तिगत स्तर पर धार्मिक ध्रुवीकरण कम है जबकि भारत और अमेरिका दोनों देशों में राजनीतिक आधार पर पक्षपातपूर्ण ध्रुवीकरण के मामलें बेहद ज्यादा हैं। हालांकि ये एक जैसा नहीं है डेमोक्रेट पार्टी का समर्थन करने वाले रिपब्लिकंस पार्टी का समर्थन करने वाले भारतीय मूल के नागरिकों को करीबी दोस्त बनाने से हिचकते हैं। जबकि रिपब्लिकंस पार्टी का समर्थन करने वाले भारतीय मूल के नागरिक ऐसा नहीं सोचते।”

रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर अप्रवासी भारतीय अपने ही समुदाय में शादी करना पसंद करते हैं। 10 लोगों में से 8 लोगों का जीवनसाथी भारतीय मूल का है। वहीं अमेरिका में जन्मे प्रवासी भारतीय नागरिक की भारतीय मूल के जीवनसाथी से शादी की संभावना चार गुणा अधिक होती है। हालांकि सर्वे के अनुसार ये भारतीय मूल के अमेरिका में जन्मे व्यक्ति से शादी करना ही पसंद करते हैं।

‘भारतीय-अमेरिकियों की सामाजिक वास्तविकता’ नामक शीर्षक से प्रकाशित ये ऑनलाइन सर्वे Carnegie Endowment for International Peace, Johns Hopkins-SAIS और University of Pennsylvania ने मिलकर किया है और इस सर्वे में भारतीय मूल के 1,200 अमेरिकी नागरिकों को शामिल किया गया था। जिसे साल 2020 में 1 सितंबर से 20 सितंबर के बीच रिसर्च एंड एनलिटिक्स फर्म YouGov के साथ मिलकर तैयार किया गया है।

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