Sunday, May 29, 2022

ईडी निदेशक के कार्यकाल को सुप्रीम कोर्ट ने दिखायी लाल झंडी तो मोदी ने अध्यादेश के जरिये कर दिया सेवा विस्तार

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उच्चतम न्यायालय अपने कई निर्णयों में व्यवस्था दे चुका है कि जो कार्य प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जा सकता उसे अप्रत्यक्ष रूप से करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। लेकिन मोदी सरकार इसे नहीं मानती क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने ईडी के निदेशक के रूप में संजय कुमार मिश्रा की 2018 की नियुक्ति के आदेश में पूर्वव्यापी बदलाव को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि चल रही जांच को पूरा करने की सुविधा के लिए विस्तार की एक उचित अवधि दी जा सकती है। उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया था कि ईडी निदेशक के रूप में मिश्रा को आगे कोई विस्तार नहीं दिया जा सकता है।लेकिन अध्यादेश की आड़ में आज ईडी के निदेशक संजय कुमार मिश्रा, जो कल सेवानिवृत्त होने वाले थे, को एक साल का सेवा विस्तार मोदी सरकार ने दे दिया।

दरअसल सीबीआई और ईडी के निदेशक के चयन में चीफ जस्टिस और नेता विपक्ष शामिल होते हैं लेकिन सीबीआई के मुखिया के चयन में चीफ जस्टिस एनवी रमना की आपत्ति के कारण मोदी सरकार राकेश अस्थाना को निदेशक नहीं बनवा सकी थी, इसलिए इस बार ईडी के मामले में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। नतीजतन सीबीआई और ईडी के निदेशकों का कार्यकाल बढ़ाने के लिए अध्यादेश लेकर आई।   

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशकों का कार्यकाल बढ़ाने के अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। उन्होंने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के निदेशकों के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने की अनुमति देने वाले केंद्र के अध्यादेशों को चुनौती दी है। उन्होंने दावा किया है कि यह अध्यादेश उच्चतम न्यायालय के फैसलों के खिलाफ हैं। महुआ मोइत्रा ने इस मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय के निदेशकों के कार्यकाल को बढ़ाने के केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। उनका तर्क है कि यह एजेंसियों की जांच की निष्पक्षता पर हमला है।महुआ ने ट्वीट कर कहा कि “मेरी याचिका अभी सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है, जिसमें सीबीआई और ईडी निदेशकों के कार्यकाल को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत बढ़ाने के केंद्रीय अध्यादेशों को चुनौती दी गई है।” अध्यादेश को चुनौती देने वाली यह दूसरी याचिका है।

इससे पहले अधिवक्ता एमएल शर्मा ने मंगलवार को इसी तरह की एक याचिका दायर कर आरोप लगाया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) अध्यादेश और दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (संशोधन) अध्यादेश असंवैधानिक, मनमाना और संविधान के विपरीत है और उन्हें रद्द करने का आग्रह किया।

महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र के अध्यादेश सीबीआई और ईडी की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर हमला करते हैं और केंद्र को उन निदेशकों को चुनने का अधिकार देते हैं जो कार्यकाल के विस्तार के प्रयोजनों के लिए सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हैं।याचिका में कहा गया है कि अध्यादेश केंद्र सरकार को जनहित में इन निदेशकों के कार्यकाल को बढ़ाने की शक्ति का उपयोग करके मौजूदा ईडी निदेशक या सीबीआई निदेशक को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने की अनुमति देता है।

याचिका में कहा गया है कि अध्यादेश निष्पक्ष जांच और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं, जैसा कि संविधान में समानता के अधिकार और जीवन के अधिकार के तहत निहित है।

अध्यादेशों के अनुसार, सीबीआई और ईडी के निदेशकों का कार्यकाल अब दो साल के अनिवार्य कार्यकाल के बाद तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है। दोनों ही मामलों में, अध्यादेशों के अनुसार, निदेशकों को उनकी नियुक्तियों के लिए गठित समितियों द्वारा मंजूरी के बाद तीन साल के लिए एक-एक साल का विस्तार दिया जा सकता है।

उच्चतम न्यायालय ने आठ सितंबर को ईडी के निदेशक के रूप में संजय कुमार मिश्रा की 2018 की नियुक्ति के आदेश में पूर्वव्यापी बदलाव को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि चल रही जांच को पूरा करने की सुविधा के लिए विस्तार की एक उचित अवधि दी जा सकती है। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया था कि सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त करने वाले अधिकारियों के कार्यकाल का विस्तार दुर्लभ और असाधारण मामलों में किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि ईडी निदेशक के रूप में मिश्रा को आगे कोई विस्तार नहीं दिया जा सकता है।लेकिन अध्यादेश की आड़ में आज ईडी के निदेशक संजय कुमार मिश्रा, जो कल सेवानिवृत्त होने वाले थे, को एक साल का सेवा विस्तार मोदी सरकार ने दे दिया।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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