Sunday, March 3, 2024

बोकारो: बीपीएससीएल प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही से विस्थापितों की जान पड़ी सांसत में

बोकारो। पिछली 7 मई को सुबह-सुबह आठ बजे झारखंड के बोकारो जिला अंतर्गत विस्थापित क्षेत्र के दो गांव चैताटांड़ व राउतडीह के निवासियों पर मानो पहाड़ सा टूट पड़ा। हुआ यह कि बोकारो स्टील प्लांट से स्टील उत्पादन के क्रम में जो ऐश यानी राख निकलती है, उसे पानी के बहाव से प्लांट के बाहर स्थित ऐश पोंड में प्रवाहित किया जाता है, जिसका मेढ़ अचानक टूट गया और वह राख मिश्रित पानी पौंड से सटे गांव राउतडीह के विस्थापित के घरों में घुस गया। इस आकस्मिक घटना से बेखबर ग्रामीण जिन्हें जीवन में कभी भी बाढ़ जैसी विभीषिका से पाला नहीं पड़ा था, ऐसी स्थिति को देख इतने घबड़ा गये कि अपने छोटे-छोटे बच्चों और कुछ जरूरी सामान लेकर इधर-उधर सुरक्षित जगह की तलाश में भागने लगे। कहा जा सकता है कि पूरा अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

ऐसी घटना के बाद इस गांव का आस-पास के 5 गांवों से संपर्क टूट गया और दिन भर अफरा-तफरी के माहौल के बीच गांव के लोगों को बाहर में किसी ऊंची जगह पर रात बीतानी पड़ी।

दूसरे दिन 8 मई को भी कमोबेश यही स्थिति रही। बता दें कि इस घटना के लिए जिम्मेवार ऐश पौंड की सफाई करने वाली कंपनी बीपीएससीएल की तरफ से पीड़ित ग्रामीणों को सहयोग के नाम से पानी और कुछ भोजन की व्यवस्था की गयी लेकिन रात में रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं की गई।

ग्रामीण बताते हैं कि ऐश पौंड के टूटने का कारण पूरी तरह बीपीएससीएल (बोकारो पावर सप्लाई कंपनी प्राइवेट लिमिटेड) की लापरवाही है। क्योंकि समय-समय पर पौंड का रख रखाव नहीं होने से ही इस तरह की घटना घटी है, अगर यह घटना रात में घटती तो शायद हम लोग आज का दिन भी नहीं देख पाते।

ग्रामीणों की जिला प्रशासन से मांग है कि हमें बगल की खाली पड़ी जमीन में पुनर्वासित करते हुए घर बना के दिया जाए ताकि इस नारकीय जिंदगी से आजादी मिल सके।

ग्रामीण कहते हैं कि विडम्बना यह है कि हमारे गांव को पंचायत में भी शामिल नहीं किया गया है, जबकि हमें लोकसभा और विधान सभा में अपने मताधिकार का उपयोग करने दिया जाता है और मुखिया चुनने का अधिकार नहीं दिया गया है। जब हम राज्य सरकार और केंद्र सरकार के लिए प्रतिनिधि चुन सकते हैं तो गांव की सरकार के लिए प्रतिनिधि क्यों नहीं चुन सकते।

ऐसी घटना से जहां राउतडीह गांव के लोग बेघर हो गए हैं वहीं चैताटांड की उपजाऊ जमीन के ऊपर छाई की मोटी परत जमकर उस पर की गई फसल बुरी तरह बर्बाद हो गई है।

उल्लेखनीय है कि आजादी के बाद 26 जनवरी, 1964 को सार्वजनिक क्षेत्र में एक लिमिटेड कंपनी के तौर पर बोकारो इस्पात कारखाना को निगमित किया गया, बोकारो इस्पात लिमिटेड, जिसे संक्षेप में बीएसएल कहा गया। बाद में सेल के साथ इसका विलय किया गया और यह बोकारो इस्पात संयंत्र हो गया, मगर आज भी इसे बीएसएल के नाम से ही जाना जाता है। उद्देश्य था, झारखंड (तत्कालीन बिहार) का आर्थिक रूप से विकास एवं रोजगार विकसित करने के साथ—साथ देश को इस्पात उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना। तब यह क्षेत्र माराफारी के नाम से जाना जाता था। माराफारी पंचायत थी जिससे सटा एक गांव था विशनपुर, जहां के जमींदार हुआ करते थे ठाकुर गंगा प्रसाद सिंह, जिनके बेटे थे ठाकुर सरजू प्रसाद सिंह। उनके काल में ही बोकारो इस्पात कारखाने का निर्माण हुआ। कारखाना निर्माण के वक्त में ही विशनपुर बोकारो इस्पात कारखाने के पेट में समा गया।

उस वक्त बोकारो इस्पात कारखाने के लिए हजारीबाग जिला के पांच पंचायत माराफारी, गोड़ाबाली, डुमरो, जरीडीह तथा कुंडोरी और धनबाद जिला के चार पंचायत राउतडीह, धनडबरा, पिंडरगड़िया और हरला के 64 गांवों को अधिग्रहीत किया गया। 70 के दशक में जब हजारीबाग जिले के कुछ भाग को काटकर 4 दिसंबर 1972 को गिरिडीह जिला बनाया गया, तब माराफारी गिरिडीह जिले के अंतर्गत आ गया। 1 अप्रैल 1991 में बोकारो जिला बना, जिसमें गिरिडीह और धनबाद जिले के कई क्षेत्रों को शामिल किया गया।

बोकारो इस्पात कारखाने की स्थापना के समय उसके प्रथम प्रबंध निदेशक के.एम.जॉर्ज ने स्थानीय विस्थापितों के नाम पर एक हैंडबिल जारी कर वादा किया था कि प्लांट निर्माण में अपनी जमीन दान कीजिए, चतुर्थ श्रेणी की नौकरी आपके लिए सुरक्षित व आरक्षित रहेगी। स्थानीय लोगों ने अपना घर-बारी, खेत-खलिहान, जो उनके तथा उनके पूर्वजों के जीवन यापन का एकमात्र साधन था, उसे बोकारो इस्पात कारखाने के निर्माण हेतु न्योछावर कर दिया, यह सोचकर कि उनके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होगा। उन्होंने जीविकोपार्जन का एकमात्र साधन जमीन को बोकारो इस्पात कारखाने के निर्माण हेतु दे दिया। डीपीएलआर (डायरेक्टर, प्रोजेक्ट लैंड एण्ड रिहैबीलीटेशन) निदेशक, परियोजना भूमि एवं पुनर्वास के माध्यम से मात्र कुछ विस्थापितों को सीधे नियोजन देने के बाद बीएसएल प्रबंधन ने इस प्रावधान को खत्म कर दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वo इन्दिरा गांधी के बोकारो आगमन के दौरान संज्ञान में मामला आने पर विस्थापितों का नियोजन पुनः शुरू हुआ था। लेकिन यह मामला अभी भी चल रहा है। विस्थापित लोगों को न तो नौकरी मिली और न ही उनके आय का कोई दूसार साधन विकसित हो सका। जिसके चलते वो आज भी आंदोलनरत हैं।

अब फिर लौटते हैं मौजूदा घटना पर घटना के दिन गांव वाले बिना पानी और खाने के गांव के बाहर मदद की आस में बैठे थे। भूख से बच्चे रो रहे थे, महिलाएं परेशान और दुखी थीं। किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। घर के अंदर पानी घुसने से सारा सामान डूब गया था। गांव में 13 कुएं हैं जिनका पानी अब पीने लायक नहीं रहा। फ्लाई ऐश युक्त पानी इन कुओं में घुस कर उसको बर्बाद कर चुका है। रात गुजारने और खाने की चिंता गांव में सबको सता रही थी।

सूचना मिलने पर डीसी बोकारो कुलदीप कुमार ने तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों को गांव वालों की मदद के लिए भेजा। राउतडीह गांव में करीब 25 परिवार रहते हैं। जिसमें 30-35 के करीब बच्चे हैं। ये लोग बेहद गरीब हैं। प्लांट और शहर में मजदूरी कर अपना पेट पालते हैं। गांव में जो थोड़ी बहुत खेती है उसी के जरिये अपना गुजारा करते हैं।

ग्रामीण मेघनाद रजवार ने बताया कि घटना सुबह 8.30 बजे की है। वह लोग सभी अपने घरों में थे, तभी एक जोरदार आवाज़ के साथ फ्लाई ऐश युक्त पानी गांव में घुसने लगा। हम लोग कुछ समझ पाते तब तक सबके घरों में फ्लाई ऐश युक्त काला पानी भर गया। हम लोगों ने बिना समय गवाए जो जरूरी चीजें थीं लेकर गांव के बाहर भागे।

मंजू देवी बताती हैं कि स्थिति बड़ी भयावह थी, अचानक सबेरे बाहर हल्ला होने लगा। जब तक वह कुछ जान पातीं तब तक पूरा काला पानी उनके घर के अंदर घुसने लगा। बिना कुछ सोचे-समझे उन्होंने अपने 7 महीने के बच्चे को उठाया और जिस दिशा में लोग भाग रहे थे वह भी भागने लगीं। अधिकतर गांव में रहने वालों के साथ ऐसा ही हुआ। जो जैसा था वह वैसा ही सब छोड़ कर भागा।

चंपा देवी ने बताया कि घटना की सुबह से किसी के घर में चूल्हा नहीं जला। बच्चे तक भूखे और प्यासे रहे। किसी तरह गांव के कुछ युवक 2 किलोमीटर दूर प्लांट गेट से पानी लाये तो उनकी प्यास बुझी। गांव के ही भोला रजवार ने कहा कि पानी उतरने में करीब तीन दिन लगेगा। पूरी खेती भी बर्बाद हो गई। हम लोगों ने किसी तरह जानवरों को बचाया।

बता दें कि बीपीएससीएल प्लांट से निकलने वाली छाई (फ्लाई ऐश) को ऐश पोंड में डंप करती है। ऐश पोंड में छह कम्पार्टमेंट बने हुए हैं। जिनमें बारी-बारी से फ्लाई ऐश पाइपलाइन के जरिये गिरता है। एक-एक कर हरेक कम्पार्टमेंट से फ्लाई ऐश निकल कर ट्रांसपोर्टिंग कर बगल के माउंट में डाल दिया जाता है। देश के अन्य पावर प्लांटों की तरह फ्लाई ऐश का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। बताया जा रहा है कि इसी दौरान ऐश पोंड का कोई एक कम्पार्टमेंट भर गया और छाई युक्त पानी भर-भरा कर बाहर निकलने लगा जिससे यह हादसा हुआ।

कुछ दिनों पहले ही झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) के अध्यक्ष एके रस्तोगी ने शनिवार को सदस्य सचिव को बोकारो पावर सप्लाई कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (बीपीएससीएल) से बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) के आस-पास प्रदूषण पैदा करने वाली फ्लाई ऐश के बारे में पूछताछ करने का निर्देश दिया था। चेयरमैन ने सदस्य सचिव को इसका मूल्यांकन कर रिपोर्ट देने के लिए कहा था। जिसके बाद जेएसपीसीबी के एक कंसलटेंट इंजीनियर ने स्थिति का आकलन करने के लिए बीएसएल और बीपीएससीएल का दौरा किया था।

घटना के दूसरे दिन 8 मई को विधायक सरयू राय ने राउतडीह गांव का दौरा किया। सरयू राय ने गांव में जाकर स्थिति का जायजा लिया, लोगों से मिले और उनकी बातें सुनी।

दूसरे दिन छाई युक्त पानी का लेबल कुछ कम हो गया था। पर जगह-जगह छाई से सनी हुई मिट्टी, कचरा फैला हुआ था, जिसे गांव वाले साफ़ करने में लगे हुए थे। गांव की स्थिति बेहद ख़राब थी। बाढ़ से हुए नुकसान की तकलीफ लोगों में साफ देखी जा सकती थी। पीने के पानी की क्राइसिस की परेशानी साफ दिखाई दे रही थी। सभी कुओं में छाई युक्त पानी घुस गया था। पीने के पानी का सबसे बड़ा संकट था।

सरयू राय से ग्रामीणों ने शिकायत की, “सर, ऐश पोंड में पानी भरता देख हम लोग, कुछ दिन पहले ही गेट पर जाकर दो-तीन बार बोले थे कि पोंड को खाली करो, लेकिन इन लोगों ने सुना ही नहीं। आज देखिये हम लोग तबाह हो गए।”

देखा गया कि दूसरा कटाव मंदिर के पास हुआ जहां से पानी दूसरी तरफ खेतों में उतरकर तालाब में मिल गया। पूरी खेत में लगी फसल बर्बाद हो गई थी। जिसे देख राय ने कहा कि अगर मंदिर वाला कटाव नहीं हुआ होता तो पूरा गांव डूब जाता और कई लोगों की जान चली जाती। यह पूरी घटना बोकारो पावर सप्लाई कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (बीपीएससीएल) प्रबंधन की घोर लापरवाही से हुई है।

बीपीएससीएल सेल और डीवीसी का जॉइंट वेंचर है। सरयू राय ने पूरा ऐश पोंड का पैदल ही दौरा किया। साथ में एसडीओ चास दिलीप सिंह शेखावत, डीएसपी सिटी कुलदीप कुमार, बीपीएससीएल के अधिकारी और बीजेपी के कुछ नेता भी थे।

सरयू राय ने उड़ती हुई छाई और ऐश पोंड डंपिंग प्रोसेस को स्पॉट पर खड़े होकर देखा और कई बिन्दुओं पर नाराजगी जाहिर की। राय ने पाया की ऐश डंप के लिए बने छह कंपार्टमेन्ट में एक दूसरे से जोड़ने के लिए कोई एडवांस या पक्का सिस्टम नहीं है। इधर से उधर पानी भेजने के लिए हर बार मेढ़ काटनी पड़ती है।

अनुमंडल पदाधिकारी चास ने बताया कि घटना के कारणों की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जो मामले की विस्तृत जांच कर कारणों का पता लगाएगी। प्रशासन द्वारा क्षतिग्रस्त दीवार की तुरंत मरम्मत और भविष्य में इस तरह की कोई दूसरी घटना घटित न हो। इसके लिए बीएसएल प्रबंधन को ठोस कदम सुनिश्चित करने को कहा गया है।

(बोकारो से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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