Friday, April 19, 2024

झारखंड: विकास की रोशनी से महरूम गढ़वा का सरुअत गांव, जहां दबंगई सिर चढ़कर बोलती है

झारखंड के गढ़वा जिला अंतर्गत बरगढ़ प्रखण्ड से 50 किमी की दूरी पर स्थित है सरूअत पाट गांव। यह टेंहडी पंचायत में आता है। लगभग 65 परिवारों वाला राजस्व गांव सरूअत में आठ टोले हैं। तिलैयाटांड, कूपाटोली, राजखेता, जोड़ीसरना, केराटोली, बुर्जूपानी, हर्राटोला और सेरेंगडांड।

इन आठ टोलों में आदिम जन-जाति कोरवा और नगेसिया समुदाय के लोग प्रमुख रूप से निवास करते हैं। इसमें दो परिवार यादव लोगों का है जो आर्थिक व समाजिक रूप से काफी प्रभाव रखते हैं।

सरुअत पाट की ऊंचाई समुद्रतल से 3,819 है, जबकि विश्व प्रसिद्ध नेतरहाट की ऊंचाई 3,213 फीट है। सरुअत पाट में स्कूलों की संख्या पांच है, जिसमें शिक्षक के तौर पर प्राथमिक विद्यालय विर्जूपानी में सूरजनाथ सिंह (सरकारी शिक्षक), ‘लेटा टोली’ प्राथमिक विद्यालय में गणेश प्रसाद यादव (पारा शिक्षक), प्राथमिक विद्यालय सेरेंग डांड में नरेश प्रसाद यादव (सरकारी शिक्षक), प्राथमिक विद्यालय दुबियाठी हेसातू में सुशील केरकेट्टा, और सरुअत प्राथमिक विद्यालय में नवल किशोर मेहता (सरकारी शिक्षक) की नियुक्ति हैं।

गांव का स्कूल

वैसे तो यहां एक आंगन बाड़ी केंद्र है। लेकिन यहां कोई उप स्वास्थ्य केंद्र, कोई प्रज्ञा केंद्र या डाक घर की सुविधा नहीं है। यहां बिजली की सुविधा भी नदारद है। अलबत्ता बिजली के खंभे और तार यहां अपनी उपस्थिति जरूर बनाए हुए हैं।

कृषि की बात करें तो यहां के आदिम जन-जाति समुदाय के लोग कृषि के लिए पूरी तरह मानसून पर निर्भर हैं। वे धान, मकई, टमाटर, आलू, गोंदली वगैरह की खेती करते हैं। इससे उनका चार महीने का भोजन उपलब्ध हो पाता है। शेष आठ महीने व सरकारी राशन का चावल और जंगल पर निर्भर हैं। यहां के लोग करम, सरहूल, सोहराई, फगुआ जैसे पर्व त्योहार मनाते हैं उनका पूरा जीवन मदईत सिस्टम (आपसी तालमेल यानी नि:शुल्क श्रम) पर आधारित है।  

लोगों की माने तो यह पठारी इलाका माओवाद से प्रभावित इलाका है। पिछले कई दशकों से कुछ मौकापरस्त और दबंग लोग खुद को माओवादियों से संबंध बताकर ठेका पट्टा करते रहे हैं और क्षेत्र के विकास को भी बाधित किया है।

गांव के आदिवासी बच्चे

ग्रामीणों द्वारा पूर्व में मिली एक सूचना के आलोक में सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की एक टीम ने क्षेत्र का दौरा करने के बाद पाया कि यहां मिट्टी, मोरम, रोड निर्माण, मनरेगा योजना के तहत कई रोड जैसे-तैसे बनवाया जा रहा है। कई प्राथिमिक विद्यालय महीनों से बंद पड़े हैं। आंगनबाड़ी केंद्र तीन महीने से बंद पड़ा है। आइए जानते हैं सरूअत में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति क्या है।

उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय विर्जूपानी की स्थिति

इस उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय में 29 छात्र-छात्राओं का दाखिला है। इस स्कूल में एकल शिक्षक सूरजनाथ सिंह हैं। वे स्कूल से 50 किमी की दूरी पर बरगढ़ में रहते हैं। जहां से रोजाना स्कूल जाना और आना मुमकिन नहीं है। सप्ताह के दो-तीन दिन तो मध्याह्न भोजन और स्कूल संबंधी गैर-शैक्षणिक कार्यों में लग जाते हैं।

जाहिर है एकल शिक्षक होने के कारण उनकी अनुपस्थिति में शैक्षणिक कार्य बंद रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों को मिड-डे-मील (मध्याह्न भोजन) भी नहीं मिलता है। जब इस संबंध में स्कूल के शिक्षक सूरजनाथ सिंह से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि रसोइया घोमड़ी देवी कुछ दिनों से बीमार चल रही हैं। इस कारण से बच्चों को मिड-डे-मील नहीं मिल रहा है।

प्राथमिक विद्यालय लेटा की स्थिति

इस प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक गणेश यादव पारा शिक्षक हैं। जब जांच दल प्राथमिक विद्यालय लेटा पहुंचा तो स्कूल को बंद पाया। जांच दल ने वहां के ग्रामीणों से बात की तो उन्होंने बताया कि यह स्कूल अक्सर बंद ही रहता है। शिक्षक विद्यालय के काम से बाहर निकल जाते हैं। इस स्कूल में 36 बच्चे हैं। एकल शिक्षक होने के कारण बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। शिक्षक गणेश यादव ने खुद स्वीकार किया कि स्कूल में दोपहर का भोजन नहीं बन पाता है।

प्राथमिक विद्यालय सेरेंगडांड की स्थिति

इस विद्यालय के पारा शिक्षक नरेश यादव हैं, जो पिछले 20 वर्षों से अध्यापन का काम कर रहे हैं। हमारी टीम ने दौरे के दौरान स्कूल को बंद पाया। जब जांच टीम के सदस्यों ने नरेश यादव से फोन पर बात की, तो उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के उद्देश्य से वे स्कूल नहीं आ पाये हैं।

उन्होंने हमारे एक सवाल के जवाब में कहा कि उनके स्कूल में तीन छत्तीसगढ़ राज्य और तीन झारखण्ड राज्य के कुल छः बच्चे ही हैं। यह स्कूल झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर है। टीम ने जब यह आरोप लगाया कि “आपका स्कूल तीन महीने से बंद पड़ा है और इस दरम्यान न तो मिड-डे-मील दी गयी और न ही छात्रवृति ही दिलायी गयी।”

आदिवासी गांव

इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि वे नवंबर माह से अस्पताल में एडमिट थे। मिड-डे-मील के सवाल पर उन्होंने कहा कि साल भर पहले ही संयोजिका की मृत्यु हो चुकी है और उसके स्थान पर नयी संयोजिका का चुनाव नहीं किया गया है। इस वजह से पूरे साल मीड-डे-मील की राशि की निकासी नहीं की जा सकी।

प्राथमिक विद्यालय सरूअत की स्थिति

इस विद्यालय के शिक्षक नवल किशोर (सरकारी) हैं। वे पचास किमी दूर बरगढ़ से स्कूल आते-जाते हैं। इस स्कूल में जब जांच दल ने दौरा किया तब स्कूल को बंद पाया। स्कूल का एक कमरा खुला हुआ था। जब दल के लोगों ने उस कमरे में प्रवेश किया तो देखा कि बच्चों की पुस्तकें फटेहाल हालत में फर्श पर बिखरी पड़ी थीं। जब दल के सदस्यों के स्कूल के शिक्षक नवल किशोर से फोन पर बात कर यह जानना चाहा कि स्कूल संचालन में क्या-क्या परेशानियां हैं? तो उन्होंने कहा कि स्कूल के प्रांगण में एक चापाकल होना चाहिए ताकि बच्चे पानी पी सकें।

मनरेगा योजना के तहत सड़क निर्माण में मिट्टी, मोरम रोड का निरीक्षण

इसकी जांच हेतु टीम ने 3 मार्च 2023 को सरूअत पाट का दौरा किया और जांच के उपरांत जो तथ्य पाये गये, उसके अनुसार सरूअत पाट में बरगद पेड़ से डुमर पाट तक मिट्टी-मोरम पथ निर्माण की यह योजना वित्तीय वर्ष 2021-22 की है। जिसका बजट चार लाख पंचानबे हजार चार सौ बयालीस (4.95.442) है।

इस पथ के निर्माण में किसी मनरेगा मजदूर कार्ड धारी ने मिट्टी का ‘चौका’ काट कर मिट्टी नहीं डाला।  रोड का सारा काम जेसीबी मशीन और टैक्टर के द्वारा किया गया है। काम के विरूद्ध में एक लाख एक हजार सात सौ नब्बे (1,1,790) रुपए की निकासी 13 फर्जी कार्ड धारियों के खाते के माध्यम से निकाली गयी है। और यह काम अभी भी जारी है।

यह मनरेगा अधिनियम का खुला उल्लंघन है। इस रोड का ठेकेदार भजन लाल यादव हैं, जिसने खुद स्वीकार किया कि यह कार्य उसी ने करवाया है। इस तरह यह ठेकेदारी प्रथा भी मनरेगा अधिनियम का घोर उल्लंघन है।

मटेरियल यानी मोरम के पैसे से मिट्टी के काम किये जाते हैं। लेकिन यहां सामग्री की राशि 1,80,147.78 (एक लाख अस्सी हजार एक सौ सैंतालिस रुपए अठहतर पैसे) की निकासी कर ली गयी है।

सरुअत में डुम्बर पाट से प्यारी कोरवा तक मिट्टी-मोरम पथ निर्माण योजना पर एक नजर

इस रोड में एक सौ मीटर की दूरी तक जेसीबी से मिट्टी काट कर रोड पर डाली गयी है। उससे आगे किसी तरह का काम नहीं किया गया है। ठेकेदार भजन लाल यादव से पूछने पर उन्होंने बताया कि वह इस साल के अप्रैल माह तक रोड का निर्माण पूरा कर लेगा।

मनरेगा के आधिकारिक साईट से पता चला कि इस मिट्टी-मोरम का बजट चार लाख पंचानबे हजार चार सौ बयालीस (4,95,442) रूपया है।

आदिवासियों के बच्चे

जिसमें मजदूरी मद में कुल राशि चौरानबे हजार पांच सौ रुपए (94,500) मजदूरी के एवज में तथा एक लाख अस्सी हजार एक सौ सैंतालिस रुपए अठहत्तर पैसा (1,80,147.78) सामग्री के एवज में निकाली गयी है। काम की तुलना में यह राशि बहुत अधिक है।

सरुअत में प्राथमिक विद्यालय से वन सीमा तक मिट्टी-मोरम पथ निर्माण योजना के हालात

इस रोड के निर्माण में भी जेसीबी मशीन से मिट्टी काट कर फैलायी गयी है। कहीं-कहीं पर सफेद मोरम का छिड़काव किया गया है। इस थोड़े से काम के लिए दो लाख तेइस हजार नौ सौ दो रुपए (2,23,902) की राशि की निकासी कर ली गयी है। जो एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इंगित करता है। इस पथ का कुल बजट चार लाख इकहतर हजार पांच सौ तैंतालिस रुपयए (4,71,543) है।

इतने बड़े बजट के बावजूद इस रोड के ठेकेदार मुनीलाल यादव ने रोड के निर्माण हेतु आदिम जनजाति के कोरवा और नगेसिया लोगों से प्रति परिवार जिनका पक्का मकान या दो पहिया वाहन हो, उनसे एक हजार  और अन्य परिवारों से पांच सौ रुपए लिया गया। यह कोरवा और नगेसिया लोगों को मूर्ख बना कर पैसा लूटने का अद्वितीय उदाहरण है। जिसमें कुल राशि दो लाख तेइस हजार नौ सौ दो रुपए (2,23,902) की निकासी की गयी है। इस योजना के ठेकेदार मुनीलाल यादव हैं।

सरुअत में रामलाल किसान के घर से राम अवध के घर तक मिट्टी-मोरम पथ निर्माण की दशा

उक्त मिट्टी-मोरम पथ निर्माण का कुल बजट चार लाख एकहत्तर हजार पांच सौ तैंतालिस (4,71,543) रुपए है। इस रोड में जेसीबी मशीन का इस्तेमाल कर रोड में मिट्टी और मोरम डालकर कुछ दूरी तक पतली परत बिछायी गयी है। इसमें मानव दिवस का सृजन कर दो लाख पैंतीस हजार आठ (2,35,008) रुपए की फर्जी निकासी कर ली गयी है। इस रोड का निर्माण राम अवध यादव ठेकेदार के द्वारा किया जा रहा है।

सरुअत में सरना टांड़ से मदु किसान के घर तक मिट्टी-मोरम पथ निर्माण

इस योजना की कुल राशि चार लाख इकहत्तर हजार पांच सौ तैंतालिस (4,71,543) रुपए है। यह मिट्टी- मोरम पथ को मशीन के द्वारा बनाये जाने के बावजूद काम अधूरा है। इस पथ में मजदूरी भुगतान के एवज में दो लाख तिरपन हजार आठ सौ (2,53,800) रुपए की फर्जी निकासी कर ली गयी है। इस रोड का ठेकेदार संजय यादव है।

ठेकेदार मुन्नीलाल यादव की दबंगई

वित्तीय वर्ष 2021-22 में मुनीलाल यादव ने मनरेगा द्वारा बनाये जा रहे एक मिट्टी-मोरम रोड की ठेकेदारी कर रहा है, जबकि उसका भतीजा दो पथ निर्माण योजना में ठेकेदारी का कार्य कर रहा है। मनरेगा के सारे काम अकुशल मजदूरों के द्वारा किया जाना है, ताकि ग्रामीणों को अपने गांव में ही रोजगार की गारंटी हो सके।

लेकिन इन दोनों चाचा-भतीजा ने कानून को ताक पर रख कर जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर से रोड का काम कराया है। जब जांच दल के सदस्य वापस लौटे तो फोन कर धमकी दी कि मेरे द्वारा कराये गये कामों का निरीक्षण क्यों किया गया। अगर आप लोगों ने मामले को आगे बढ़ाया तो वह दस जगहों पर यह कह कर केस करेंगे कि जांच दल के लोग उनका मर्डर करने, रात में उठवा लेने के लिए आये थे। वह इतना दबंग व्यक्ति है कि सार्वजनिक स्थान (सरूअत प्राथमिक विद्यालय) में लगने वाले जल-मीनार को अपने घर के नजदीक लगवा लिया है।

सरुअत के पूर्व प्रधान चैतू किसान ने बताया कि उनके भांजों के द्वारा बनाये गये खेत जिससे साल में दो फसल लिए जाते थे, उस खेत को मुनीलाल यादव ने जबरन हड़पकर जमीन का कागजात बनवा लिया है।

जब दल के सदस्यों ने चैतू किसान और तेजू किसान से यह कहा कि आप लोग खेत की जुताई कर उस पर धान की बुआई क्यों नहीं करते हैं? इसपर उन्होंने कहा कि किसकी मजाल है कि मुनीलाल यादव की इच्छा के बगैर खेत जोते। वह तो हर साल अपने खेतों में बेगारी (जबरन काम करवाना) कराता है। जो लोग उसके खेतों में रोपाई करने नहीं जाते हैं उनकी पिटाई करता है।

उन दोनों ने यह भी बताया कि उनके खेतों में लगे फसलों पर मवेशियों को खुला छोड़ देता है। सहिया और वार्ड सदस्य पोकली देवी ने बताया कि जो मिट्टी मोरम रोड का निर्माण मनरेगा योजना से हो रहा है उसके लिए भी मुनीलाल यादव ने प्रत्येक घर से पांच हजार रुपए वसूले हैं।

नाम नहीं बताने की शर्त पर शिक्षकों ने कहा कि मुनीलाल यादव स्कूल को नियमित रूप से नहीं चलने देने के लिए हर संभव कोशिश करता है।

जांच टीम ने उक्त अनियमितता पर अपनी निम्न मांगे रखी हैं।

1. सरुअत में बन रहे पांचों मिट्टी-मोरम पथ निर्माण योजना के कार्यों का लोकायुक्त से जांच करायी जाय।

2. मिट्टी के कार्यों के लिए जो अधिक राशि की निकासी की गयी है उसकी रिकवरी कर राशि को सरकारी खजाने में डाला जाय।

3. सभी ठेकेदारों के ऊपर भ्रष्टाचार का केस किया जाय। इन लोगों ने मशीन से कार्य कर मनरेगा अधिनियम का खुला उल्लंघन किया है।

4. चैतू किसान के भांजों की जमीन वापस करायी जाय और स्कूल नियमित रूप से खुले।

5. स्कूली बच्चों को मीनू के आधार पर मध्याह्न भोजन मिलने की गारंटी की जाय।

6. सरुअत में एक जनजातीय अवासीय विद्यालय की स्थापना की जाय।

7. सरुअत में आदिम जन-जाति राशनकार्ड धारियों को डाकिया योजना के द्वारा राशन का वितरण सुनिश्चित हो।

जांच दल में बीस सूत्री कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं एनएस बरगढ़ के संयोजक अर्जुन मिंज, फिलिप कुजूर, दया किशोर मिंज, तागरेन केरकेट्टा ज्योति, पोकली देवी वार्ड मेंमर समेत सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ता, साहित्यकार, और पत्रकार आदि कई लोग शामिल थे।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और झारखंड में रहते हैं।)

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