यूपी में अंतरधार्मिक शादियों पर होगा सरकार का पहरा

जेपी सिंह November 25, 2020

उत्तर प्रदेश में सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले, कि शादी के लिए सभी को मनपसंद साथी चुनने का हक है, भले ही वो किसी भी धर्म का क्यों न हो, की सुर्खियां अभी सूखी भी नहीं थीं कि मंगलवार को यूपी सरकार ने शादी के लिए धर्म परिवर्तन के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध ‘धर्म समपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020′ को मंजूरी दे दी। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब कथित ‘लव जिहाद’ अपराध होगा। कानून के तहत 10 साल तक की सजा दी जा सकती है।

उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने कथित लव जिहाद के खिलाफ अध्यादेश को मंजूरी दी है। 20 नवंबर को राज्य की होम मिनिस्ट्री ने न्याय और विधि विभाग को इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा था। प्रस्ताव के मुताबिक, ऐसे मामलों में गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज होगा। यूपी के अलावा मध्य प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी इस मसले पर कानून बनाने की तैयारी चल रही है।

उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म समपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 का उद्देश्य है कि जबरन, दबाव डालकर, लालच देकर या किसी तरह के छल-कपट से होने वाले धर्म परिवर्तनों को रोका जा सके। इसके साथ ही इस अध्यादेश के माध्यम से दूसरे धर्म में शादी करके किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को भी रोका जा सकेगा। नाबालिग महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों का धर्म परिवर्तन कराने पर भी इसके तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी।

अध्यादेश में प्रावधान है कि गुमराह करके, झूठ बोल कर, लालच देकर, जबरदस्ती या शादी के जरिए धर्म बदलवाने का दोष साबित होने पर कम से कम एक साल और अधिकतम पांच साल की सजा होगी। दोषी पर 15 हजार रुपये जुर्माना भी लगेगा। महिला एससी/एसटी कैटेगरी में आती है तो उसका जबरन या झूठ बोल कर धर्म परिवर्तन कराना कानून का उल्लंघन माना जाएगा। इसमें कम से कम तीन साल और अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है। ऐसे मामले में जुर्माना 25 हजार रुपये होगा। सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में कम से कम तीन साल और अधिकतम दस साल तक की सजा हो सकती है। जुर्माने की राशि 50 हजार तक होगी।

अध्यादेश में प्रावधान है कि अगर कोई धर्म बदलना चाहता है तो उसे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को दो महीने पहले सूचना देनी होगी। ऐसा न करने पर छह महीने से तीन साल तक की सजा हो सकती है। जुर्माने की रकम 10 हजार रहेगी। ड्राफ्ट के मुताबिक, धर्मांतरण के मामले में अगर माता-पिता, भाई-बहन या अन्य सगे-संबंधी शिकायत करते हैं, तो कार्रवाई की शुरुआत की जा सकती है। धर्म बदलने के लिए दोषी पाए जाने पर एक साल से लेकर 10 साल तक की सजा हो सकती है।

अध्यादेश के मुताबिक कथित लव जिहाद जैसे मामलों में मदद करने वालों को भी मुख्य आरोपी बनाया जाएगा। दोषी पाए जाने पर उन्हें सजा होगी। शादी कराने वाले पंडित या मोलवी को उस धर्म का पूरा ज्ञान होना जरूरी है।

इसके पहले सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धर्म बदलकर शादी करने के एक मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि किसी को भी अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार है, चाहे वह किसी भी धर्म को मानने वाला हो। यह उसकी निजी आजादी का मूल तत्व है। दो लोग अगर राजी-खुशी से एक साथ रह रहे हैं तो इस पर किसी को आपत्ति जताने का हक नहीं है। जस्टिस पंकज नकवी और जस्टिस विवेक अग्रवाल की पीठ ने कुशीनगर के सलामत अंसारी और प्रियंका खरवार उर्फ आलिया की याचिका पर यह आदेश दिया है।

गैरकानूनी धर्म परिवर्तन अध्यादेश को लेकर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश कैबिनेट ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म समपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020’ लेकर आई है, जो उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था सामान्य रखने के लिए और महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बीते दिनों में 100 से ज्यादा घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें जबरन धर्म परिवर्तित किया जा रहा है। इसके अंदर छल-कपट, बल से धर्म परिवर्तित किया जा रहा है। इस पर कानून को लेकर एक आवश्यक नीति बनी, जिस पर कोर्ट के आदेश आए हैं और आज योगी जी की कैबिनेट अध्यादेश लेकर आई है। उन्होंने बताया कि इसे गैर जमानती संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखने और उससे संबंधित मुकदमे को प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की न्यायालय में विचारणीय बनाए जाने का प्रावधान किया जा रहा है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

This post was last modified on November 25, 2020 11:29 am

जेपी सिंह November 25, 2020
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