डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतें: प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन गयी है भारत सरकार

क्या भारत सरकार का का मतलब प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी है? जिसका मुख्य लक्ष्य केवल अधिक से अधिक मुनाफा कमाना भर है? प्रश्न महत्वपूर्ण है। क्योंकि वैश्विक कोरोना त्रासदी के बीच भी जिस तरह से सरकार की नीतियां आम जनता के जेब से अधिक से अधिक रकम लूटना है वो हैरान करने वाला है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के अंदर जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था का ताना-बाना बुना गया और इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के हितों को साधने के लिए भारत सरकार के रूप में जिस राजनैतिक व्यवस्था का निर्माण किया गया वो अगर खुद को एक निजी व्यापारिक संस्था समझ रही है और अपने आर्थिक हितों को पूरा करने के लिए अगर जनता को एक ग्राहक समझ कर वह लूट के हथकंडे अपनाने लगे तो ऐसे में विशाल लोकतांत्रिक देश की इस सरकारी व्यवस्था के क्या कहेंगे?

सरकार की अनियोजित आर्थिक नीतियों के कारण देश आर्थिक बदहाली के महागर्त में हिचकोले खा रहा है लेकिन पेट्रोल-डीजल का मूल्य बुलेट ट्रेन की स्पीड से सरपट भागता ही जा रहा है। पिछले 18 दिनों के अंदर डीजल की कीमतों में 10.48 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है जबकि पेट्रोल 8.50 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया हैं। देश मे पहली बार डीजल पेट्रोल से महंगा हो गया है।

कितनी हैरत की बात है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत औंधे मुंह पड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का मूल्य खाड़ी युद्ध के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इतना ही नहीं पिछले 18 दिनों से अधिक समय से भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत में काफी नरमी रही है लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के मूल्य लगातार बढ़ता ही जा रहा है। 

वर्तमान समय में भारत सरकार की आर्थिक नीतियां किस प्रकार एक कॉरपोरेट की तर्ज पर देश को लूटने वाली मुनाफा खोरी स्कीम पर चल रही हैं इसे समझने के लिए इन आंकड़ों को समझना बेहद जरूरी है।

वर्तमान समय मे इंडियन बास्केट कच्चे तेल की कीमत लगभग 42 डॉलर प्रति बैरल है। भारतीय करेंसी के हिसाब से एक डॉलर का मूल्य आज 75.80 रुपये है और एक बैरल में कुल 159 लीटर कच्चा तेल आता है।

गणितीय गणना करें तो –

42 डॉलर = 42 × 75.80 रुपए

                = 3183.60 रुपए

चूंकि159 लीटर क्रूड ऑयल का मूल्य=3183.60 रुपए

अतः 1 लीटर क्रूड ऑयल का मूल्य 

3183.60 रुपए ÷ 159 = 20.02 रुपए

यानि 1 लीटर कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार से भारत सरकार द्वारा खरीदा गया 20.02 रुपए में और इसके बाद इसके रिफाइनरी (परिष्करण) एवं ओएमसी मार्जिन पर लगता है तकरीबन 5.32 रुपए प्रति लीटर तथा पेट्रोल पंप को कमीशन मिलते हैं लगभग 3.56 रुपए प्रति लीटर। अगर इन सारी चीजों को जोड़ दिया जाए तो कुल रकम होती है: 20.02 + 5.32 + 3.56 = 28.9 रुपए। तकरीबन 29 रुपए प्रति लीटर वाले पेट्रोल के लिए जनता को चुकाने होते 80 रुपए। सीधा-सीधा 51 रुपए का भारी टैक्स।

सरकार का काम तो इस तरह की व्यवस्था का निर्माण करना है जिससे आम जनता को सुविधाजनक जीवन जीने का साधन मुहैया कराए जा सके। लेकिन सरकार की नीतियां केवल आम जनता को लूटने पर उतारू हैं।

अब कुछ और अहम आँकड़ों को जानना बेहद आवश्यक है ताकि सरकार की व्यवस्था के पीछे छुपी लूट की स्कीम का खुलासा किया जा सके। 

सरकार ने सबसे महंगे दर पर कच्चे तेल की खरीद की थी 1 जनवरी 2020 को जब एक बैरल कच्चे तेल का मूल्य था 67 डॉलर। और उस समय डॉलर का मूल्य था लगभग 71.32 रुपये। यानि उस समय भी एक लीटर कच्चे तेल को खरीदने में सरकार को 30 रुपये के आसपास ही खर्च करने पड़े। 

भारत सरकार ने कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सबसे न्यूनतम मूल्य पर खरीदा 6 मई 2020 को जब क्रूड ऑयल का मूल्य था मात्र 27 डॉलर प्रति बैरल। इस समय डॉलर का मूल्य था 76.17 रुपये। यानि इस समय एक लीटर कच्चे तेल को खरीदने में सरकार को खर्च करने पड़े मात्र 12.93 रुपये।

याद कीजिए वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के पूर्व के समय को , किस प्रकार विपक्ष पेट्रोल-डीजल के बढ़ते मूल्य को लेकर सरकार को घेरता रहता था। बीजेपी और मोदी जी के बड़े समर्थक व प्रचारक व्यापारी बाबा रामदेव बीजेपी सरकार बनने पर 35 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल देने का ऐलान टीवी चैनलों पर बड़े शान से करते थे। 

वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार का गठन हुआ। नवम्बर 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 3.46 रुपये प्रति लीटर थी जो पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा निर्धारित था। इस समय सरकार ने पहली बार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का संकेत दिया था। 

वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री मोदी जी 15 अगस्त को ऐतिहासिक लाल किले के प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे और इधर पेट्रोल-डीजल की एक्साइज ड्यूटी ने ऐसा जम्प लगाया जिसका अंदाजा शायद ही किसी को रहा होगा। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.20 रूपये प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 21.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 3.46 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 17.33 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया। सरकार का यह कदम उस दिशा में उठाया गया पहला कदम था जिसने यह सुनिश्चित कर दिया कि आने वाले दिनों में डीजल का मूल्य पेट्रोल से भी आगे निकल जाएगा। आज दिल्ली में डीजल का मूल्य पेट्रोल से भी ज्यादा है।

5 मई 2020 को सरकार ने पेट्रोल की एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर 32.98 रुपये प्रति लीटर और डीजल की एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर 31.83 रुपये प्रति लीटर कर दिया।

अब जरा सोचिए कि आख़िर देश किस आर्थिक व्यवस्था की तरफ जा रहा है? जनता पर अधिक से अधिक टैक्स लाद देना या सरकार के द्वारा मुनाफाखोरी के ऐसे हथकंडे अपनाने वाली लोकतांत्रिक व्यवस्था को कहाँ तक जायज ठहराया जा सकता है ? वो भी उस स्थिति में जब आम जनता के सामने रोजी-रोटी का भयावह संकट खड़ा है। क्या वाकई सरकार का मतलब एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी या कॉरपोरेट हो चुका है जिसका एक मात्र लक्ष्य मुनाफाखोरी रह गया है भले ही इससे देश की आम जनता की जेब लुट जाए?

(दया नन्द शिक्षाविद होने के साथ स्वतंत्र लेखन का काम करते हैं।)


This post was last modified on June 24, 2020 6:35 pm

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