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Saturday, September 25, 2021

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economy

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने बढ़ा दिया बैंकों के एनपीए का संकट

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) की शुरुआत छोटे कारोबारियों के कारोबार हेतु कर्ज उपलब्ध कराने से हुई है। इसके अंतर्गत शिशु लोन, पचास हजार तक, किशोर लोन 5 लाख तक और तरुण लोन 10 लाख तक विभिन्न ब्याज दरों पर...

निजीकरण: मिथ और हकीकत

निजीकरण का राजनैतिक अर्थशास्स्त्र समझने के लिए किसी राजनैतिक अर्थशास्त्र में विद्वता की जरूरत नहीं है। सहजबोध (कॉमनसेंस) की बात है कि कोई भी व्यापारी कभी घाटे का सौदा नहीं करता, न ही उसका काम जनकल्याण या देश की...

पूर्वांचल में बढ़ता आत्महत्याओं का ग्राफ

भूख, गरीबी, कर्ज और अपराध की गिरफ्त में पूर्वांचल का समाज, अवसाद की अंधेरी कोठरी में समाने लगा है। स्थिति नियंत्रण से बाहर दिख रही है और जागरुक लोग चिंतित हैं कि आखिर इसका समाधान क्या है? किसान और...

‘जुर्माना’ कहानी की समीक्षा के बहाने: पसमांदा समाज के महान कथाकार थे मुंशी प्रेमचंद

कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘ज़ुर्माना’ अशराफ बनाम पसमांदा के बीच अंर्तद्वन्द्व को समझने के लिए बेहतरीन कहानी है। इस कहानी को सस्ता साहित्य मंडल ने ‘प्रेमचंद की संपूर्ण दलित कहानियां’ में जगह दी है। यह कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण...

प्रधानमंत्री का स्वतन्त्रता दिवस उद्बोधन: वे बोले तो बहुत किंतु कहा कुछ नहीं

यह पहली बार हुआ है कि देश के प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस उद्बोधन को किसी गंभीर चर्चा के योग्य नहीं समझा गया। यहाँ तक कि आदरणीय मोदी जी के प्रशस्तिगान हेतु लालायित सरकार समर्थक मीडिया ने भी स्वयं को...

गिरते लोकतंत्र के बैरोमीटर पर ऊंचा होता भ्रष्टाचार का पैमाना

भारतीय अर्थव्यवस्था से संबंधित तीन  महत्वपूर्ण  आकलन इस वर्ष जारी हुए हैं: प्रथम, वर्तमान में  भारत में भ्रष्टाचार में अत्यधिक वृद्धि हुई है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर  भारत के भ्रष्टाचार इंडेक्स में पिछले वर्षों में वृद्धि, लोकतंत्र में गिरावट आना...

देश के लोकतांत्रिक वजूद के लिए खतरा हैं आरएसएस और बीजेपी: अखिलेंद्र

देश अपने राजनीतिक व सांस्कृतिक जीवन के सबसे बुरे दौर में है। मोदी सरकार के केन्द्रीय सत्ता पर काबिज होने के साथ देश में गुणात्मक परिवर्तन शुरू हुए। आज वैश्विक पूँजी और बड़ी भारतीय पूंजी ने राज्य पर अपनी...

कोरोना के बाद वैश्विक स्तर पर कृत्रिम अर्थव्यवस्था की पैदाइश

कोरोना-त्रासदी से उत्पन्न नई वैश्विक अर्थव्यवस्था द्वारा एक नई कृत्रिम वैश्विक अर्थव्यवस्था का जन्म हुआ है, जिसमें आवश्यकता, निवेश,  उत्पादन और उपभोग के  स्वरूप को बदल दिया गया है। इसके पूर्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में परिवर्तन के द्वारा विकासशील देशों...

आर्थिक बदहाली ने तोड़ दी है जनता की कमर

विश्व और देश की भीषण त्रासदी के दौर से गुजरता हुआ देश का आम नागरिक त्रस्त एवं  प्रताड़ित है। संक्रमण के कारण स्वास्थ्य और जीवन पर संकट की जो स्थिति मार्च 2020 में प्रारंभ हुई थी, वह निरंतर जारी रही और मार्च 2021 में भीषणतम हो...

समाजवादियों के पास है सुचारू व्यवस्था

अर्थव्यवस्था के सभी अनुमान ढलान की ओर हैं। वर्तमान सत्ता-पार्टी अफवाहों की विशेषज्ञ है। व्यवस्था संभालना इनको नहीं आता। पशुपालन, खेती, उद्योग, चिकित्सा तथा भूख की समस्या से अनभिज्ञ है। यही कारण है कि जीडीपी गिर रही है। जिस जीएसटी को ये...
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लगातार भूलों के बाद भी नेहरू-गांधी परिवार पर टिकी कांग्रेस की उम्मीद

कांग्रेस शासित प्रदेशों में से मध्यप्रदेश में पहले ही कांग्रेस ने अपनी अंतर्कलह के कारण बहुत कठिनाई से अर्जित...
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