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गुजरात उपचुनावः अबडासा सीट पर मुस्लिम फैक्टर हावी, कांग्रेस में उहापोह की स्थिति

अहमदाबाद। 2017 गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रधुम्न सिंह महिपत् सिंह जाडेजा ने भाजपा के कोछबील भाई पटेल को 9746 वोटों के अंतर से हरा कर विधान सभा में प्रवेश किया था। 2020 राज्य सभा चुनाव में प्रधुम्न सिंह जडेजा ने कांग्रेस पक्ष और विधायकी से इस्तीफा दे दिया। कथित तौर पर जडेजा को भाजपा ने खरीद लिया। जडेजा दरबार समुदाय से हैं, लेकिन इनकी विजय में सबसे बड़ी भूमिका मुस्लिम मतदाताओं की थी, क्योंकि अबडासा सीट पर 65-70000 मुस्लिम, 30-32 हजार दलित, 28-30 हजार पटेल और दरबार हैं। इनके अलावा 13% कोली समाज भी है।

जन संख्या के आधार पर मुस्लिमों का दबदबा है। क्षेत्रफल में अबडासा एक बड़ी विधानसभा है, जिसमें 444 गांव आते हैं। 9 जिला पंचायत डेलिगेट हैं। 5 जिला पंचायत डेलिगेट भाजपा के हैं और 4 कांग्रेस के हैं। 370 बूथ हैं, जबकि गुजरात की अन्य विधासभा में औसत 200-225 बूथ आते हैं।

2017 विधान सभा में कांग्रेस को 77, भारतीय ट्राईबल पार्टी को 2, NCP को एक तथा निर्दलीय को एक सीट मिली थी, जबकि भाजपा को 99 सीटें मिली थी। कांग्रेस पार्टी के अब तक 12 विधायक भाजपा में शामिल गए हैं, या उपचुनाव के समय शामिल होने वाले हैं। 2020 राज्यसभा चुनाव पहले जिन विधायकों ने इस्तीफा दिया है। उनका भाजपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ना लगभग तय है।

इस्तीफे से रिक्त हुई आठ सीटों पर उपचुनाव है। अबडासा सीट पर जडेजा अब भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं। कांग्रेस किसी नए उम्मीदवार की तलाश में है। गुजरात कांग्रेस के पास चर्चित नेता हार्दिक पटेल हैं। जो पाटीदार समुदाय से हैं। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले हार्दिक ने कांग्रेस की सदस्यता लेकर प्रचार किया। परंतु कांग्रेस 26 सीटों में से एक भी सीट हासिल करने सफल नहीं हुई। हार्दिक और जिग्नेश गुजरात की राजनीति में चर्चित चेहरे हैं। राजनीति में इनका समाज इनके साथ कितना है, जो इनके कहने पर कांग्रेस को वोट दे दे। इसकी परीक्षा अबडासा उपचुनाव से हो सकती है।

अबडासा जैसी मुस्लिम बहुल सीट से कांग्रेस मुस्लिम को उम्मीदवार बनाकर दलित और पटेल के वोट इन दोनों चर्चित नेताओं से पार्टी पक्ष में खींचे, क्योंकि अबडासा विधान सभा ऐसी ही सीट है, जहां पर मुस्लिमों के बाद सबसे अधिक संख्या दलित और पाटीदार हैं।

इस संबंध में निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने जनचौक को बताया, “अब समय आ गया है कि मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर कांग्रेस को गंभीर होना चाहिए। यह गंभीरता आज ही दिखानी पड़ेगी। अबडासा उपचुनाव कांग्रेस के लिए मौका है, जहां अल्पसंख्यकों को बता सकती है कि कांग्रेस मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर है।”

मेवाणी ने आगे कहा, “व्यक्तिगत तौर पर मैं भी चाहता हूं कि कांग्रेस किसी अल्पसंख्यक को उम्मीदवार बनाए यदि कांग्रेस किसी मुस्लिम को उम्मीदवार बनाती है तो मैं उस उम्मीदवार के लिए ऐसे प्रचार करूंगा जैसे मैं या मेरी टीम का कोई बंदा चुनाव लड़ रहा है, क्योंकि अबडासा सीट पर मुस्लिमों के बाद सबसे बड़ी संख्या दलित समुदाय की है।”

मेवाणी अबडासा सीट पर हार्दिक पटेल की भी बड़ी भूमिका मानते हैं, क्योंकि पाटीदार समुदाय की भी संख्या तीस हज़ार के आस पास है। मेवाणी का कहना है, “यदि कांग्रेस पार्टी के अलावा हार्दिक इस सीट पर गंभीर हो जाएं तो 100% गुजरात विधान सभा में चौथा मुस्लिम विधायक पहुंच जाएगा।”

जिग्नेश मेवाणी के अलावा गुलाब खान राउमा भी चाहते हैं कि अबडासा सीट से मुस्लिम को उम्मीदवार बनाया जाए। राउमा गुजरात प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष हैं। गुलाब खान राउमा ने जनचौक को बताया, “हमने लिखित तौर पर पार्टी से मांग की है कि पार्टी अबडासा सीट से किसी लोकल मुस्लिम को उम्मीदवार बनाए।”

गुजरात की राजनीति में चर्चा है कि हार्दिक पटेल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से नाराज़ वरिष्ठ नेताओं को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार कच्छ की अबडासा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन मोढवाडिया को अबडासा से और करजन सीट से सिद्धार्थ पटेल को। मोढवाडिया ने जनचौक से बातचीत में अबडासा से टिकट मांगने की खबर का खंडन करते हुए बताया, “मैंने उपचुनाव में कहीं से भी टिकट नहीं मांगा है। अबडासा से लोकल नेताओं ने पार्टी से टिकट मांगा है। मैं भी चाहता हूं कि अबडासा से लोकल व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया जाए।”

गुजरात प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने बताया, “पार्टी ने पब्लिक सर्वे कराया है। कार्यकर्ताओं की राय भी ली है। सर्वे और कार्यकर्ताओं की राय से पार्टी उम्मीदवार तय करेगी। जो भी उम्मीदवार होगा जाति धर्म से हटकर होगा। उपचुनाव में उम्मीदवार से अधिक भूमिका पार्टी की होती है। अबडासा सीट पर कांग्रेस मजबूत है।”

मुस्लिम समुदाय से भी मुस्लिम प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की मांग उठ रही है। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के प्रदेश अध्यक्ष कौसर अली सैय्यद कहते हैं, “यह देश अभी भी जातपात से बाहर नहीं निकल पाया है। उच्च जाति के लोग (सभी पार्टी के) नहीं चाहते हैं कि उनका प्रतिनिधित्व कोई दलित करे, इसीलिए सीमांकन के समय कुंठित मानसिकता के लोग मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को सुरक्षित करा देते हैं। मुस्लिम राजनीतिक तौर पर कम जागरूक हैं। वह केवल वोट के समय अपनी सक्रियता दिखाते हैं। मुस्लिम बहुल विधान सभा और लोकसभा सुरक्षित होने के कारण भी मुस्लिम प्रतिनिधित्व घट रहा है। इस बात का ज़िक्र सच्चर रिपोर्ट में भी है। मुस्लिमों को अबडासा जैसी सीट से उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए। यदि अबडासा से मुस्लिम को कांग्रेस उम्मीदवार नहीं बनाती है तो क्या मुस्लिम नारनपुरा और घाटलोडिया से चुनाव लड़ेगा।”

वरिष्ठ वकील ओवैस मलिक कहते हैं, “जिस विधानसभा में जिस समाज के वोट अधिक होते हैं, उसी समाज से राजनीतिक दल आम तौर से उम्मीदवार उतारते हैं। कांग्रेस भी सामाजिक समीकरण से ही उम्मीदवार तय करती है। अबडासा सीट से उपचुनाव में भी उम्मीदवारी इसी फॉर्मूले से तय होना चाहिए। इस समय बाबरी मस्जिद पर कांग्रेस नेताओं के बयान से मुस्लिमों में नाराज़गी है। कांग्रेस एक सेकुलर पार्टी है। अबडासा सीट से जिस समुदाय की संख्या अधिक है उसे टिकट देना चाहिए। इससे कांग्रेस के प्रति मुस्लिमों की नाराज़गी कम भी होगी।”

राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के तीन विधायकों ने मार्च में और पांच ने मई महीने में विधायकी से इस्तीफा दे दिया था। इन सीटों पर संभवतः सितंबर में उपचुनाव हो सकते हैं। खाली विधान सभा में से अबडासा एक सीट है। अबडासा अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से सटा इलाका है। मुस्लिम बहुल वाली इस सीट पर चुनाव होना है। इस सीट पर रोचक मुकाबले के साथ-साथ जिग्नेश मेवाणी और हार्दिक पटेल जैसे नेताओं की परीक्षा भी है। इन उभरते नेताओं की उपयोगिता का अनुमान तब लगेगा जब यह अपने समुदाय से वोट करा सकें।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

This post was last modified on August 17, 2020 5:41 pm

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