आँकड़ों को कम करके पेश करने के लिहाज़ से गुजरात सरकार ने की टेस्टिंग की रफ़्तार धीमी!

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अहमदाबाद। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में गुजरात फेल होता दिख रहा है। महाराष्ट्र के बाद गुजरात दूसरे नंबर पर है। जहाँ कोरोना से सबसे अधिक मौतें हुईं हैं। कोरोना के संक्रमित मरीज़ भी महाराष्ट्र के बाद गुजरात में हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा निर्देश के अनुसार अधिक से अधिक टेस्टिंग के ज़रिये ही संक्रमण के बढ़ने के ख़तरे को रोका जा सकता है। लेकिन गुजरात सरकार ने इसके उलट टेस्टिंग को कम कर दिया। ताकि कोरोना संक्रमितों की संख्या कम करके पेश किया जा सके। 

सरकार को यह भी डर है कि कहीं गुजरात कोरोना के मामले में महाराष्ट्र को भी न पछाड़ दे। गुजरात covid-19 का टेस्ट एक दिन में चार हजार से अधिक करने लगा था। टेस्ट के साथ पॉज़िटिव मरीज़ों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही थी। राज्य में 18-19-20 अप्रैल को क्रमशः 2664-3002-4212 टेस्ट हुए जिसके परिणाम स्वरूप 277-167-196 पॉज़िटिव केस मिले। राज्य में कोरोना पॉज़िटिव केस बढ़ जाने के बाद राज्य की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था को छिपाने की कोशिश हो रही है। 

पिछले दो दिनों में यानी 21अप्रैल को 1513 और 22 अप्रैल को 2516 टेस्ट किए गए हैं। इन दोनों दिनों की जाँचों में 448 मामले पॉज़िटिव मिले। नये मामलों में तुलनातमक रूप से कमी आई है। लेकिन इसके साथ ही टेस्ट भी कम कर दिया गया है। जयंति रवि का कहना है “हम हॉटस्पॉट को अधिक ध्यान दे रहे हैं। वहाँ अधिक टेस्ट की आवश्यकता है। दूसरी तरफ सरकार ने राज्य के निजी अस्पतालों को भी कोरोना टेस्ट और पॉज़िटिव केस का इलाज करने को कहा है”। लेकिन निजी अस्पताल इलाज से पहले लाखों रुपए जमा करने को कह रहे हैं। स्टर्लिंग हॉस्पिटल साढ़े आठ लाख रुपये जमा कराने के बाद ही इलाज कर रहा है। 

बुधवार को 13 मौतों के आंकड़े के साथ राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या 103 हो गई। अहमदाबाद का मृतकों का आंकडा 62 पर पहुँच गया। राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या अब तक 2407 है। अहमदाबाद में 1501 जबकि सूरत में 415 कोरोना मरीज़ मिले हैं। अब तक 179 लोगों को इलाज के बाद अस्पतालों से छुट्टी दी गई है राज्य में 32317 लोग क्वारंटाइन हैं। वहीं केरल में 395 में से 245 को छुट्टी मिली है। देश में कोरोना से लड़ाई में केरल सबसे सफल राज्य रहा है। सफल ईलाज का राष्ट्रीय अनुपात 13% का है। जबकि गुजरात का रिकवरी रेट 7.4 का है जो राष्ट्रीय औसत से भी कम है।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीक़ी की रिपोर्ट।) 

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