Sunday, October 24, 2021

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केरल में भाजपा पर चुनाव से पहले लाखों की डील के आरोप! ऑडियो टेप जारी, साढ़े तीन करोड़ की लूट

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केरल में कुछ ही महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को लेफ्ट गठबंधन यानी एलडीएफ के हाथों मिली करारी शिकस्त का दंश अभी केरल की राज्य भाजपा इकाई झेल ही रही थी कि इस बीच केरल में भाजपा के लिए नया संकट आ खड़ा हुआ है, भाजपा पर चुनाव से पहले लाखों की डील करने के आरोप लग रहे हैं और एक ऑडियो टेप भी सामने आया है। यही नहीं 3.5 करोड़ की हाइवे पर लूट का मामला भी भाजपा के गले की हड्डी बन गया है, क्योंकि इसमें भाजपा और संघ के लोगों के नाम आ रहे हैं और इसे विधानसभा चुनाव में भाजपा के बेहिसाब चुनावी फंड को हजम करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।  

केरल में पार्टी का खाता भी नहीं खुला और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के. सुरेंद्रन तथा मेट्रोमैन ई श्रीधरन जैसे कद्दावर उम्मीदवार भी जीत नहीं दर्ज कर सके। इस बीच भाजपा पर चुनाव में पैसों की ताकत के इस्तेमाल के आरोप लग रहे हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल रही एक नेता ने दावा किया है कि उनकी पार्टी की प्रमुख और लोकप्रिय आदिवासी चेहरा सीके जानू ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के. सुरेंद्रन से एनडीए में लौटने के लिए 10 करोड़ रुपए की मांग की थी और बाद में उन्हें 10 लाख रुपए पहुंचाए गए थे।

यह आरोप जनाथिपथ्य राष्ट्रीय सभा (जेआरएस) पार्टी की कोषाध्यक्ष प्रसीथा अझीकोड ने लगाए हैं। उन्होंने इससे जुड़ा एक ऑडियो टेप भी जारी किया है। आरोप है कि यह के सुरेंद्रन और जेआरएफ चीफ सीके जानू के बीच 10 लाख रुपए के लेन-देन की बातचीत से जुड़ा कॉल था। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के सुरेंद्रन ने टेलीफोन की बात स्वीकार की है पर पैसे देने से इनकार किया है। जनथिपथ्य राष्ट्रीय सभा (जेआरएस) की कोषाध्यक्ष प्रसीथा अझिकोड द्वारा लगाए गए आरोपों को सुरेंद्रन झूठ बताया है।

प्रसीथा अझिकोड ने इससे जुड़ा जो ऑडियो वायरल किया है, उसमें भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के. सुरेंद्रन की आवाज होने का दावा किया गया है। टेप में एक शख्स (जिनके सुरेंद्रन होने का दावा है) कहता है- “उन्हें 6 मार्च को आने दो। मैं उन्हें निजी तौर पर यह दे दूंगा। तुम भी आना…चुनाव के दौरान यह पैसों का लेन-देन…यह मुमकिन नहीं कि इसे इधर-उधर ले जाया जाए।” अझिकोड का कहना है कि जब जानू 6 मार्च को पैसे लेने के लिए तिरुवनंतपुरम गईं, तो वे उनके साथ ही थीं। हालांकि, गेस्ट हाउस में जब लेन-देन हुआ, तब वे साथ नहीं रहीं थीं।

उधर के सुरेंद्रन से पैसे लेने के आरोपों पर घिरीं सीके जानू ने ऑडियो टेप को नकार दिया और प्रसीथा अझिकोड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि प्रसीथा और बाकी पार्टी नेताओं के मुकाबले उनके भाजपा से ज्यादा अच्छे संबंध हैं। ऐसे में पैसे लेने में उन्हें किसी तीसरे आदमी (अझिकोड) की मदद की जरूरत क्यों पड़ेगी?

सीके जानू ने 2016 में जेआरएस बनाया था और 2018 में गठबंधन छोड़ने से पहले एनडीए के सहयोगी के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा था। वह सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ में शामिल होना चाहती थी, लेकिन यह कदम अमल में नहीं आया।

ताजा आरोप ने बीजेपी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। और इसलिए क्योंकि ये आरोप ऐसे समय में लग रहा है जब केरल पुलिस त्रिस्सूर में साढ़े तीन करोड़ रुपये की लूट से जुड़े मामले में बीजेपी के कई नेताओं की जांच कर रही है। पुलिस को शक है कि यह पैसा “बेहिसाब चुनावी फंड” का हिस्सा था। दरअसल, विधानसभा चुनाव से पहले केरल के त्रिस्सूर-एर्नाकुलम राजमार्ग पर कोडकारा में 3 अप्रैल 2021 को साढ़े तीन करोड़ रुपए की डकैती का मामला सामने आया था। 7 अप्रैल को मतदान के एक दिन बाद जिस गाड़ी से पैसे लूटे गए थे उसके कार चालक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

शमजीर शमसुदीन नाम का एक व्यक्ति एक गाड़ी में पैसे ले जा रहा था जो माना जाता है कि त्रिस्सूर से कोच्चि जा रहा था। जैसे ही वे त्रिस्सूर के कोडकारा फ्लाईओवर पर पहुंचा, दो वाहनों में सवार लगभग नौ लोगों ने शमजीर की कार को रोक दिया, कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की और वाहन में रखी पूरी राशि लूट ली। चार दिन बाद शमजीर ने घटनास्थल से 500 मीटर दूर कोडकारा थाने में डकैती की शिकायत दर्ज कराई। शमजीर ने अपनी शिकायत में कहा कि उसकी गाड़ी से 25 लाख रुपये की लूट की गई, जो कथित तौर पर जमीन के सौदे के लिए था। पुलिस ने 7 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज की थी। यहीं से ट्विस्ट की शुरुआत हुई। पुलिस ने पाया कि यह मामला 25 लाख रुपये का नहीं था, बल्कि इससे कहीं अधिक राशि लेकर जाया जा रहा था।

गाड़ी चलाने वाला शमजीर डकैती के चार दिन बाद अकेले थाने में शिकायत दर्ज कराने नहीं आया, वह जिसके यहां काम करता था उसे लेकर आया। शमजीर के साथ वाले शख्स का नाम था एके धर्मराजन, जिसे आरएसएस का सदस्य बताया जा रहा है। धर्मराजन ने ही वो पैसे शमजीर को दिए थे। शिकायत में दोनों ने दावा किया कि कार त्रिस्सूर से कोच्चि जा रही थी। धर्मराजन ने दावा किया था कि पैसे कई लोगों से उधार लिए गए थे। पुलिस ने पहले दीपक नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया और फिर 19 और लोगों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर डकैती में शामिल थे। जब उन्होंने चोरी किए गए पैसे को बरामद करना शुरू किया, तो उन्होंने पाया कि यह राशि 25 लाख रुपये से कहीं ज्यादा थी।

पुलिस की जांच में धर्मराजन ने बताया कि सुनील नाइक नाम के एक युवा मोर्चा के नेता ने उसे पैसे दिए थे। कोडकारा पुलिस ने जब सुनील नाइक से संपर्क किया तो उसने कहा कि उसने तीन स्रोतों से पैसे उधार लेकर धर्मराजन को दिए थे, जो उसका कारोबारी सहयोगी था। तब जाकर, पुलिस को पता चला कि 25 लाख नहीं बल्कि यहां 3.5 करोड़ रुपये की लूट हुई थी। पुलिस अब तक करीब एक करोड़ रुपये बरामद कर चुकी है।

सत्ताधारी लेफ्ट फ्रंट के नेताओं का आरोप है कि यह डकैती स्थानीय बीजेपी नेताओं का गढ़ा गया ड्रामा था, जिसके जरिए चुनावों में उपयोग ना किए जा सकने वाले फंड को हड़पने की मंशा थी।

जेआरएस की कोषाध्यक्ष प्रसीथा अझिकोड ने सीके जानू को अपने वित्तीय लेनदेन की जांच का सामना करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा, सीके जानू को लेकर पार्टी में अशांति है। उनके अनुसार सुरेंद्रन जानू को एनडीए में वापस लाने चाहते थे क्योंकि वह एक प्रमुख आदिवासी नेता हैं। प्रसीथा ने आरोप लगाते हुए कहा कि तब जानू ने 10 करोड़ रुपये, केंद्र सरकार में कैबिनेट रैंक और विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए एक सीट की मांग की थी। मैं जानू के साथ तब मौजूद थी जब उसने मार्च की शुरुआत में कोट्टायम में सुरेंद्रन के साथ सीधे तौर पर मांगें उठाईं।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)  

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