Saturday, February 24, 2024

ग्राउंड रिपोर्ट: कैसे बुझेगी प्यास जब बेदम पड़े हैं हैंडपंप, सूखकर लावारिस हो गए हैं कुएं और तालाब?

मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश। कभी अपने मीठे अमृत जैसे जल के लिए मशहूर रहा मिर्ज़ापुर जिला आज खुद पानी की समस्या से जूझ रहा है। ज़िले के पठारी गांवों में इन दिनों पीने के पानी को लेकर हाय-तौबा मचनी शुरू हो गयी है। लोगों की प्यास बुझाने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा तो बहा रही है, लेकिन प्यास है जो बुझने का नाम नहीं ले रही है। पेयजल परियोजनाओं के समयबद्ध तरीके से पूरा होने में, होने वाली लेटलतीफी, कमीशनखोरी सरकार की साख पर सवाल खड़े कर रही है।

अप्रैल का महीना समाप्त हो गया है, “जेठ” यानी जून-जुलाई का महीना अभी बाकी है, बावजूद इसके गर्मी का असर कहा जाए या खिसकते भू-जल स्तर का असर, पानी को लेकर लोगों को परेशान होते देखा जा सकता है। जिले के पठारी क्षेत्र में लोगों को पानी को लेकर अभी से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लालगंज विकास खंड क्षेत्र में 3427 इंडिया मार्का हैंडपंप लगे होने के बाद भी पानी का संकट बना हुआ है।

प्रशासनिक आंकड़ों में दो दर्जन से अधिक हैंडपंप खराब बताए जा रहे हैं। जिनकी मरम्मत न होने से ग्रामीणों को परेशान होना पड़ रहा है। धरातल पर नजर दौड़ाई जाए तो अप्रैल माह में भू-जलस्तर खिसकने से भारी संख्या में हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। वो पानी देना छोड़कर पानी की जगह हवा उगल रहे हैं। हालांकि समस्या ग्रस्त गांवों को चिन्हित कर प्रशासन की ओर से आवश्यकता अनुसार टैंकर से पानी की आपूर्ति शुरू कराने की बात तो कही जा रही है। लेकिन टैंकर के जरिए लोगों की प्यास बुझ नहीं रही है।

खराब पड़ा हैंडपंप

प्रदूषित पानी पी रहे ग्रामीण

लालगंज विकासखंड क्षेत्र के मानिकपुर, साहिरा, मिश्रपुर, लालगंज, नेवढ़िया, बरअक्स पहाड़ी, रानीबारी, बरडीहा, राजापुर, खजूरी, जयकर, बनवारी, बस्तरा, लालापुर, तेंदुआ खुर्द, पजरा सहित डेढ़ दर्जन ग्राम पंचायतों में पानी का संकट बना हुआ है। पिछले वर्ष इन गांवों की जांच में पानी प्रदूषित मिला था। जिसकी जांच प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालगंज के डॉक्टरों ने किया था। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के हैंडपंपों का पानी दूषित होने से पिछले वर्ष लोग बीमार हो गए थे।

लालगंज विकास खंड में तैनात सहायक विकास अधिकारी पंचायत अजय शंकर ने बताया कि विकास खंड में कुल 53 ग्राम पंचायतों में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए 3427 इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए गए है। गर्मी को देखते हुए ब्लॉक मुख्यालय पर कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां पर दिन रात कर्मचारी रहते हैं। अभी तक लगभग 30 खराब हैंडपंप की मरम्मत कराई जा चुकी है। अब आसानी से समझा जा सकता है कि हैंडपंपों की मरम्मत की गति क्या है।

टैंकर से हो रही पेयजल की आपूर्ति

मिर्ज़ापुर ज़िले के आखिरी छोर पर स्थित मध्य प्रदेश राज्य की सीमा से लगने वाले हलिया विकास खंड के पठारी क्षेत्रों में मार्च-अप्रैल महीने से ही हैंडपंप, तालाबों और कूपों के सूख जाने से पेयजल संकट गहराने लगा है। पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए ग्राम पंचायतों में टैंकर के जरिये पेयजल की आपूर्ति कराई जा रही है। जो ग्रामीणों की जरूरतों के मुकाबले अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। पानी की किल्लत का असर यह है कि गांव में टैंकर के पहुंचने से पहले ही ग्रामीण डब्बा-बाल्टी लेकर कतार लगानी शुरू कर देते हैं।

टैंकर के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति।

हलिया विकास खंड के न्याय पंचायत मतवार, उमरिया में पेयजल की सबसे ज्यादा किल्लत बनी हुई है। यहां ग्राम पंचायतों की ओर से टैंकर से पेयजल की आपूर्ति कराई जा रही है। ग्राम पंचायत मतवार के कई मजरों में पेयजल संकट से निजात के लिये प्लास्टिक की पानी टंकी को रखवा कर उसमें टैंकर से पानी भरवाया जा रहा हैं। तो वहीं दिन भर एक टैंकर से तीन बार पानी की आपूर्ति की जा रही है। हलिया के ही न्याय पंचायत मतवार के बेलाही, मतवार, हर्रा, कुशियरा, मटिहरा और न्याय पंचायत उमरिया के गौरवा, बरयां, बरौंधा के दिघुली, भिटहां, सोनगढा, गलरा, पहाड़ों पर बसे भैसोड़ वलाय पहाड़, देवहट के लहुरियादह में दो टैंकर से पेयजल की आपूर्ति कराई जा रही है।

अधूरा है ओवरहेड टैंक निर्माण, कैसे बुझेगी प्यास?

मिर्ज़ापुर ज़िले के नक्सल प्रभावित मड़िहान तहसील क्षेत्र के तालर, खोराडीह, धुरकर, रामपुर, रैकरी, रैकरा, भवानीपुर, गुरुदेव नगर, राजगढ़, गोरथरा, खुटारी, अमदहा, कलवारी, कलवारी खुर्द, सेमरा, बेदौली, देवदहा, संतनगर, पचोखरा इत्यादि गांवों में पेयजल संकट गहराने लगा है। मड़िहान तहसील क्षेत्र के विकास खंड पटेहरा के ग्राम सभा कलवारी खुर्द मझारी में अमृत पेयजल योजना के तहत 600 लाख लीटर के ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया तो जा रहा है, लेकिन ओवरहेड टैंक निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ है।

सितंबर 2022 में ही इस ओवरहेड टैंक का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने की समयावधि निर्धारित की गई थी। लेकिन संबंधित कार्यदाई संस्था की तरफ से कार्यों में लेट-लतीफी के चलते निर्माण अधर में लटका पड़ा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कार्यदाई संस्था के ठेकेदार की ओर से ओवरहेड टैंक के निर्माण में लेटलतीफी के साथ घोर लापरवाही बरती जा रही है जिससे निर्माण प्रक्रिया अभी आधार में ही लटकी हुई है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में लापरवाही न बरती गई होती तो ग्रामीणों को बिना किसी रूकावट के शुद्ध पेयजल मुहैया हो गया होता।

ओवरहेड़ टैंक से पानी की आपूर्ति।

ज़िले के पहाड़ी क्षेत्र में पेयजल संकट जनवरी माह से ही गहराने लगा है, लेकिन जल संकट से निपटने की कवायद पेयजल संकट गहराने पर यानी मार्च-अप्रैल बीतने पर शुरू की जाती है। पहाड़ी क्षेत्र में पेयजल डीप बोरिंग के द्वारा ही मिलता है। बरसात कम होने से तेज़ी के साथ जलस्तर नीचे की ओर चले जाने से पेयजल की समस्या पैदा हुई है।

दीपनगर निवासी सरोजा देवी का कहना है कि “80 प्रतिशत क्षेत्र के डीप बोरिंग पानी देना बंद कर दिये हैं। ग्रामीण पानी की जुगत में सुबह से ही इधर-उधर लग जाते हैं। क्षेत्र में टैंकर से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन टैंकर से भला प्यास कैसे बुझेगी अभी तो गर्मी को चरम पर पहुंचना बाकी ही है।”

अमृत पेयजल योजना कब होगी पूरी?

मिर्ज़ापुर ज़िले के मड़िहान, लालगंज तहसील सहित कई पठारी क्षेत्रों में पेयजल संकट एक प्रमुख समस्या है। जो कब तक दूर हो पायेगी, कह पाना कठिन है। सरकार की महत्वपूर्ण अमृत पेयजल योजना के धरातल पर आने से ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल पाने की उम्मीद जगी है, लेकिन यह परियोजना कब तक पूरी होगी बता पाना मुश्किल है।

गढ्ढे का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण।

अमृत पेयजल योजना से लोग कब तक लाभान्वित होंगे यह पता नहीं, लेकिन इसके नाम पर खोदे गए गड्ढे जरूर लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। इलाके के पत्रकार महेंद्र सिंह बताते हैं कि “क्षेत्र में अमृत पेयजल परियोजना का काम अभी अधर में है। यदि हर घर को नल से पानी देने की योजना शुरू हो जाए तो क्षेत्रवासियों को भीषण गर्मी के दिनों में पेयजल के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।”

शो-पीस बने इंडिया मार्का हैंडपंप

जिले का शायद ही ऐसा कोई भी गांव होगा, जहां लोगों को पानी के लिए जूझना न पड़ता हो। वजह बताई जा रही है कि गांवों में अधिकांश हैंडपंप खराब हो गए हैं। किसी का हैंडिल गायब है, तो किसी का चबूतरा क्षतिग्रस्त है, तो कुछ हैंडपंप रिबोर होने की बाट जोह रहे हैं। कुछ हैंडपंप तो ऐसे हैं, जहां काफी हैंडिल मारने के बाद एक-एक बूंद पानी टपकना शुरू होता है तो कही पर पानी की जगह हैंडपंपों में से हवा निकल रही है।

हैंडपंपों की मरम्मत के लिए स्थानीय स्तर ग्रामीण प्रधान के घर का दरवाजा खटखटाते हैं, बावजूद इसके समाधान न होने से ग्रामीणों में व्यवस्था को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। अधिकांश पहाड़ी गांवों में हैंडपंपों के दगा देने से पानी के लिए त्राहि त्राहि मची हुई है। हैंडपंपों पर पहले पानी भरने के लिए लोग आपस में तकरार पर तू-तू, मैं-मैं कर रहे हैं।

पानी को लेकर ग्रामीणों में तकरार।

हैंडपंपों की बदहाली पर ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक स्तर के अधिकारी चुप्पी साधे हैं, अधिकारियों में इच्छा शक्ति के अभाव के कारण इसे ठीक नहीं कराया जा सका है। सिर्फ कागजी आंकड़ों की बाजीगरी कर अपने कत्तर्व्यो की इति श्री कर ली जा रही है।

वर्षों से गढ्ढा खोदकर पानी पी रहे ग्रामीण

इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहा जायेगा कि एक तरफ सरकार जहां सबको शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए कवायद कर रही है, वहीं मिर्ज़ापुर ज़िले में हलिया ब्लॉक के नौगवां ग्राम पंचायत के गुरूआन पहड़ी बस्ती में कोल, आदिवासी गढ्ढे का दूषित पानी पीकर जीवन गुजार रहे हैं। कई सालों से गढ्ढे का दूषित पानी पीकर जीवन व्यतीत करते आ रहे इस मेरे के लोगों पर अभी तक हुक्मरानों की नजर नहीं पड़ी है।

नौगवां गांव के कोल बस्ती में शासन की तरफ से पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं किए जाने से ग्रामीण दो जगहों पर तकरीबन 15 फीट गहरा गड्ढा खोदकर पिछले सात सालों से गढ्ढे का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। बस्ती के लोगों ने पेयजल के लिए हैंडपंप लगाने के लिए ग्राम प्रधान सहित ब्लॉक अधिकारियों से गुहार लगाई थी, लेकिन जिम्मेदारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। जिसके चलते ग्रामीण खेत में गढ्ढा खोदकर पानी पीने के लिए मजबूर हैं।

गढ्ढे का दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण।

बस्ती में अभी तक हर घर नल योजना के तहत जल जीवन मिशन की ओर से पाइप लाइन भी नहीं बिछाई जा सकी है। बस्ती में एक भी हैंडपंप और कुंआ नहीं होने से ग्रामीण गढ्ढा खोदकर पेयजल की व्यवस्था कर लिए हैं। बस्ती निवासी सरस्वती, रूपा, तेरसू कोल ने बताया कि “बस्ती में हैंडपंप और कुंआ न होने से पिछले सात सालों से दो जगहों पर खेत में गढ्ढा खोदकर वह लोग पानी पीने के लिए मजबूर हैं। सभी जानते हैं कि इससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है, पर मजबूरी ऐसी कि जीना है तो दूषित पानी पीना है।”

उपेक्षित पड़े कुआं बने कूड़ेदान

कभी लोगों के लिए कुएं का निर्मल जल जीवन जीने का सबसे बड़ा साधन हुआ करता था, लेकिन आज वही कुएं उपेक्षा की मार सहते हुए कूड़ेदान बने हुए हैं। लावारिस हालात में पड़े कुओं का संरक्षण न होने से यह अपनी उपयोगिता खो चुके हैं। एक समय था जब फसलों की सिंचाई और जीवन के लिए कुआं का जल ही एकमात्र साधन हुआ करता था। कालांतर में यही कुएं अब लोगों के जीवन से दूर होते जा रहे हैं।

सदर तहसील के कोन विकास खंड क्षेत्र में कुल 541 कुओं का निर्माण व्यक्तिगत और दानी लोगों के सहयोग से कराया गया है। जिसमें कुछ तो सूखे पड़े हैं तो कुछ में पर्याप्त जल भी नहीं है, जबकि अधिकांश कुओं में गैस बनी हुई है, जिसमें आसपास के लोग कूड़ा-करकट फेंका करते हैं।

लावारिस हालात में पड़ा कुआं।

सर्वविदित है कि पहले गांवों में पानी का एकमात्र साधन कुआं हुआ करता था, लेकिन आज जगह जगह-जगह हैंडपंप लग गए हैं। जिससे कुएं से जल निकालना बंद हो गया है जिसके कारण कुओं का जल ही प्रदूषित हो गया है। कुओं के रखरखाव और शासन के उपेक्षात्मक रवैये के कारण लाखों रुपयो के बने कुएं लावारिस हालत में दिखाई देते हैं। लावारिस पड़े कुओं के जीर्णोद्धार की दिशा में जनप्रतिनिधियों और सरकारी मुलाजिमों के ध्यान न देने से कुएं विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।

टैंकर से नहीं बुझ रही प्यास

जिले के कुछ भागों में बिजली की अंधाधुंध कटौती से इलाके में पेयजल संकट गहरा गया है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पेयजल तभी मिलेगा जब बिजली रहेगी। पठारी क्षेत्र में बिजली की कटौती अंधाधुंध की जा रही है, जिससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है।

राजगढ़ विकास खंड के पांच हजार की आबादी वाले ग्राम सभा कलवारी, गुरदेवनगर ग्राम सभा में दो टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जाती है। बिजली रहने पर ही पानी की सप्लाई टैंकर से की जाती है नहीं तो कम पानी की सप्लाई की जाती है। ऐसे में टैंकर के पानी से ग्रामीण तो गला तर कर लेते हैं, लेकिन पशुओं को पीने की पानी की समस्या होती है। क्षेत्र में बने अमृत सरोवर सूखे पड़े हैं। तालाब अवैध मिट्टी खनन माफियाओं के भेंट चढ़ गए हैं। जिससे क्षेत्र में जल संचयन नहीं हो पाता है, यदि जल संचयन कराया जाय तो काफी हद तक क्षेत्र में पेयजल की समस्या से निजात मिलेगी।

(मिर्जापुर से संतोष देव गिरि की ग्राउंड रिपोर्ट।)

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