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Thursday, September 16, 2021

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अदार पूनावाला के भागने के बाद कोविशील्ड के दो खुराकों के बीच 28 दिन का समयांतराल बढ़ाकर 12-16 सप्ताह किया गया

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सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला के देश छोड़कर भागने के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने कोविशील्ड वैक्सीन की 2 डोज लगवाने के बीच के समय को 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह करने का फैसला लिया है। 3 महीने में ये दूसरी बार है जब कोविशील्ड वैक्सीन की डोज के बीच के समयांतराल को बढ़ाया गया है। इससे पहले 22 मार्च को, सरकार एडवाइजरी में बदलाव करते हुए कहा था कि डोज के अंतर को 6-8 सप्ताह तक बढ़ाया जाना चाहिए। जबकि कोविशील्ड को जनवरी, 2021 की शुरुआत में जब आपातकालीन इस्तेमाल के तहत मंजूरी दी गयी थी तब कोविशील्ड की दो डोज के बीच 28 दिनों के अंतराल के साथ इसे मंजूर किया गया था।

गौरतलब है कि 13 मई को स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉ वी.के. पॉल की अध्यक्षता में वैक्सीन प्रभावकारिता को लेकर ‘यूके के साक्ष्य’ के आधार पर नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन (NEGVAC) की सिफारिश को स्वीकार कर लिया। बता दें कि डॉ. एनके वोहरा की अध्यक्षता में कोविड वर्किंग ग्रुप द्वारा सिफारिश की गई थी। अन्य सदस्यों में डॉ गगनदीप कांग, डॉ जेपी मुलियल और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के डॉ वी.जी. सोमानी शामिल हैं।

क्या कोविशील्ड की अनुपलब्धता के चलते बढ़ायी गयी दो डोज के बीच समयान्तराल

कोविड-19 की दूसरी लहर के चलते अचानक से वैक्सीन की मांग बहुत ज़्यादा बढ़ गयी है। जबकि मार्च महीने तक वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में खौफ़ था। विशेषकर वैक्सीन लगवाने के कुछ दिनों के अंदर ही होने वाली कई मौतों विशेषकर दो मेडिकल छात्रों की मौत ने वैक्सीन के प्रति लोगों को भयभीत कर दिया था। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में बढ़ते शवों के अंबार, और अस्पतालों में बेड व बाज़ार में दवाइयों और ऑक्सीजन की कमी के चलते लोगों में वैक्सीन के प्रति रुझान बढ़ा है। सरकार द्वारा 18-45 आयु वर्ग के लोगों के लिये वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरु करने के बाद तो मांग बेतहाशा बढ़ गयी।

ऊपर से मोदी सरकार द्वारा ‘वैक्सीन गुरु’  की सेल्फ ब्रांडिंग और ढिंढोरा वाले कारनामे के बीच ये कहकर कि “सब भार मेरे कंधे पर आ पड़ा है, यह काम मेरे अकेले के वश की बात नहीं” – भारत में कोविशील्ड वैक्सीन का निर्माण करने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मालिक अदार पूनावाला देश छोड़कर भाग खड़े हुये। इंग्लैड में बैठकर उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में प्रभावशाली लोग उन्हें वैक्सीन के लिये डरा धमका रहे हैं। जबकि दो दिन पहले ही मोदी जी ने उन्हें Y श्रेणी की सुरक्षा मुहैया करवाया था।

जाहिर है सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला के देश से भागने के बाद देश में कोविशील्ड वैक्सीन का संकट बढ़ना ही था।

कोरोना के दूसरे वेव के बीच रूसी वैक्सीन स्पुतनिक को मंजूरी

भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के विस्फोट के बीच 12 अप्रैल को रूस निर्मित दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक-5 को सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) द्वारा आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी गई।   

वहीं फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन भी मंजूरी मिलने की कतार में शामिल हैं। फाइजर (Pfizer) दवा कंपनी भारत में अपने mRNA कोविड-19 वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग के लिए अप्लाई कर चुकी है। वहीं अमेरिकी वैक्सीन कंपनी नोवावैक्स भी भारत में अपनी वैक्सीन ला सकती है। इस वैक्सीन का नाम है कोवोवैक्स (Covovax)।  इस कंपनी ने भी यूके, अमेरिका, यूरोपियन यूनियन में अपनी वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की अनुमति के लिए आवदेन कर रखा है। इसके अलावा जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने भी अपने वैक्सीन के लिये भारत सरकार से बात की है।

ज़रूरत के मुताबिक राय देती संस्थायें

भारत में तमाम मेडिकल संस्थायें सरकार को बचाने के उद्देश्य से काम कर रही हैं। जैसे अप्रैल महीने में जब कोरोना मरीजों की संख्या प्रतिदिन 3-4 लाख के ऊपर जाने लगी और देश में रेमडेसविर जैसे एंटी वायरल की जबर्दस्त मांग होने लगी तो 24 अप्रैल को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने रेमडेसविर को ग़ैरज़रूरी बताते हुये कहा था कि डॉक्टर रेमडेसविर को आँख मूँदकर न लिखें। उन्होंने कहा कि कई डॉक्टर धड़ल्ले से इसे लिख रहे हैं जबकि रेमडेसविर कहीं से भी प्रमाणित नहीं है। और इसको लेकर जो रिसर्च हुये हैं वो भी उनके भी ठोस परिणाम नहीं आये हैं।      

कोविशील्ड वैक्सीन की देश में शॉर्टेज होने पर अब रेमडेसविर की ही तर्ज पर इसे लेकर भी तमाम रिसर्च और मेडिकल एसोसिएशन का हवाला देकर दो डोज के बीच समयांतराल बढ़ाने को वैक्सीन की एफिसिएंसी बढ़ाने से जोड़कर पेश किया जा रहा है।

गौरतलब है कि नोवल कोरोनावायरस के ख़िलाफ़ भारत में इस्तेमाल की जा रही कोविशील्ड को जनवरी, 2021 की शुरुआत में दो डोज के बीच 28 दिनों के अंतराल के साथ आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दिया गया था। अब कहा जा रहा है कि उस समय, ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका की इस वैक्सीन को मंजूरी देने वाला पहला देश यूनाइटेड किंगडम पहले ही 4-12 सप्ताह के अंतराल की सिफारिश कर चुका था।

इसके अलावा उस समय की  कई स्टडी समेत मेडिकल जर्नल द लैंसेट की स्टडी के हवाले से भारत की कार्पोरेट मीडिया बकती रही है कि 12 सप्ताह के अंतराल ने बेहतर प्रभावकारिता (Efficacy) पैदा की।

समयांतराल और प्रभावकारिता

फरवरी 2021 में, द लैंसेट ने 4 अलग-अलग ट्रायल्स के आंकड़ों के आधार पर एक अध्ययन प्रकाशित करके बताया कि कोविशील्ड की प्रभावकारिता 55.1% के करीब थी जब डोज का अंतराल 6 सप्ताह से कम था। 12 सप्ताह का अंतराल रखने पर प्रभावकारिता बढ़कर 81.3% हो गई।

जबकि फरवरी 2021 में में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) के एक लेख में कहा गया था कि वैक्सीनेशन के बाद पहले 90 दिनों में वैक्सीन की एक डोज ने सिम्पटोमेटिक कोविड -19 के खिलाफ कुल 76% सुरक्षा दी, लेकिन उसकी समय सीमा ये नहीं थी।

वहीं यूके रेगुलेटर्स और यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी (EMA) एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के लिए 12 सप्ताह के अंतराल की सलाह दी थी। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन दो डोज के बीच 8-12 सप्ताह के अंतराल की सिफारिश करता है। वहीं स्पेन और कनाडा जैसे कुछ देशों ने कुछ निश्चित आयु समूहों के लिए वैक्सीन के दो डोज के बीच समयांतराल को 16 सप्ताह तक बढ़ा दिया है। लेकिन 16-सप्ताह के अंतराल का प्रमाणित करने के लिए कोई ट्रायल नहीं किया गया है।

कोवैक्सिन के दो डोज के बीच के समयांतराल में बदलाव क्यों नहीं

वहीं कोविड वर्किंग ग्रुप पैनल ने कोवैक्सिन के दो डोज के बीच 28 दिन के समयांतराल में किसी भी तरह के बदलाव की सिफारिश नहीं की है। बता दें कि कोवैक्सिन निर्माता भारत बायोटेक ने अभी भी कोवैक्सिन के फेज 3 ट्रायल का पूरा डेटा जारी नहीं किया है न ही कोवैक्सिन की सिंगल डोज की प्रभावकारिता पर सार्वजनिक रूप से डेटा उपलब्ध है और न ही इसे लेकर कोई भी रियल-वर्ल्ड डेटा है जिसने इसकी जांच की हो।

बीएमजे में फाइजर के एमआरएनए (mRNA) वैक्सीन को लेकर एक स्टडी रिपोर्ट छपी थी जिसमें पहली डोज को प्राथमिकता देते हुए स्टैंडर्ड वैक्सीनेशन और दूसरी डोज में देरी को परखा गया है। परिणाम में पाया गया कि दूसरी डोज में देरी, कम से कम 65 साल से कम आयु के लोगों के लिए, कुछ विशेष परिस्थिति में क्यूमुलेटिव मृत्यु दर कम कर सकता है। हालांकि ये फाइजर वैक्सीन को लेकर ही किया गया एक सिमुलेशन था।

कोविड संक्रमण के बाद वैक्सीन के लिए 6 महीने का इंतजार

कोविड संक्रमण के बाद कोई व्यक्ति अपनी दूसरी डोज कब ले सकता है, इस पर भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 1 मई को दिशा-निर्देश जारी किए थे। जिसमें लक्षण कम होने के बाद 2-8 सप्ताह तक देरी की सिफारिश की गई थी। हालांकि नेशनल इम्युनाइजेशन टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप द्वारा की गई इस सिफारिश को अपनाया जाना फिलहाल बाकी है, जिसके मुताबिक कोविड संक्रमण होने के बाद वैक्सीन के लिए 6 महीने का इंतजार करना होगा।

यूएस सीडीसी भी ये सिफारिश करता है कि अगर आपका इलाज मोनोक्लोनल एंटीबॉडी या प्लाज्मा से हुआ हो, तो आपको वैक्सीन लेने से पहले 90 दिन इंतजार करना चाहिए।

कोरोना काल में कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी सीरम इंडिया ने कमाया मोटा मुनाफा

वहीं कोरोना काल में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने बड़ा मुनाफा कमाया है। कॉर्पोरेट डेटाबेस के मुताबिक भारत की 418 कंपनियों ने साल 2019-20 में 5 हजार करोड़ से ज्यादा रेवेन्यू जनरेट किया है और इसमें टॉप पर अदार पूनावाला का सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया है। हालांकि मौजूदा वित्त वर्ष का डेटा अभी जारी नहीं किया गया है। साल 2019-20 के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी ने कुल 2251 करोड़ का मुनाफा कमाया। गौरतलब है कि विश्व में सबसे ज्यादा वैक्सीन बनाने में भारत के सीरम इंस्टीट्यूट का नाम आता है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।) 

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