Wednesday, October 20, 2021

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कृषि कानून: पटना के गर्दनीबाग में किसान महासभा का बेमियादी धरना शुरू

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पटना। अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर से आज पटना के गर्दनीबाग में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया है। इसमें सैकड़ों की संख्या में किसानों की भागीदारी हो रही है। धरने का नेतृत्व करने वाले नेताओं ने बताया कि सभी जिला मुख्यालयों और प्रखंड मुख्यालयों पर भी लगातार किसान धरना चल रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन सरकार के इशारे पर कई जगह कार्यक्रम की अनुमति नहीं दे रहा है। उनका आरोप है कि प्रशासन लोकतंत्र के दमन पर उतारू हो गया है।

धरने को संबोधित करते हुए धीरेंद्र झा ने कहा कि आज बिहार में धान खरीदने की जगह किसानों की पिटाई की जा रही है। यह बेहद निंदनीय है। एक तो बिहार में धान की खरीद इक्के- दुक्के पंचायतों में हो रही है, दूसरी तरफ धान के वाजिब दाम देने से पैक्स अध्यक्ष मना कर रहा है। सिवान ज़िला के दरौली प्रखंड के दोन पंचायत में किसानों से एक ट्रैक्टर धान की तौल करा ली गयी और तब जाकर कहा कि सरकारी दर नहीं मिलेगा। किसान ने उत्तर में कहा कि तब हम धान नही बेचेंगे।

इस पर कुशवाहा जाति के किसान पर टूट पड़े। किसान की बर्बर पिटाई की गई। उन्होंने कहा कि हम नीतीश कुमार से मांग करते हैं कि बिहार में मंडियों को फिर से बहाल किया जाए और पैक्सों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदने का दबाव बनाएं। हालांकि सरकार पैक्सों को बोरे खरीदने तक का पैसा नहीं दे रही है और संस्थागत भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।

रामाधार सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे एमएसपी पर आश्वासन बढ़ रहा है धान के दाम गिर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वार्ता तथा किसानों की समस्या को हल करने के प्रति गम्भीर नहीं है। जैसे-जैसे सरकार के एमएसपी के आश्वासन की बात तेज हो रही है, धान के दाम गिरते जा रहे हैं, जो अब 900 से 1000 रु. कुंतल बिक रहे हैं।

उमेश सिंह ने कहा कि कैबिनेट मंत्री गडकरी ने एमएसपी की मांग को गलत बताते हुए कहा कि यह बाजार के रेट से ज्यादा होती है। यह तब कहा कि जब सरकार कह रही है कि एमएसपी जारी रहेगी। मंत्रियों को ये पता होना चाहिए कि दुनिया के एक तिहाई भूखे लोग भारत में रहते हैं, जो उसकी जनसंख्या के हिस्से से दो गुना हैं। नीति आयोग के सदस्य लगातार कह रहे हैं कि सरकार न खाना खरीद सकती है, न उसका भंडारण कर सकती है, जबकि सरकारी पक्ष है कि खरीद जारी रहेगी।

धरना के माध्यम से खाद्य पदार्थों से एथेनॉल बनाने के फैसले की कड़ी निंदा की गई। कहा गया कि इससे खाद्य असुरक्षा बढ़ेगा। बिहार में भंग कृषि उत्पादन बाजार समिति को बहाल नही कर रही है।1868/1888 के खुद का तय किया गया रेट पर धान नही खरीद रही है। उन्होंने कहा कि हम किसानों के लिए मर जाएंगे लेकिन किसान विरोधी कानून नहीं चलने देंगे।

राज्य व्यापी आह्वान पर भोजपुर, सिवान, अरवल, दरभंगा, भागलपुर, नालन्दा, गया, जहानाबाद, रोहतास, वैशाली आदि सभी जिलों में किसान धरना आरम्भ हो गया है, जिसमें व्यापक पैमाने पर किसानों की भागीदारी हो रही है।

पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर अखिल भारतीय किसान महासभा के बिहार राज्य सचिव रामाधार सिंह, राज्य सह सचिव उमेश सिंह और जिला सचिव कृपानारायण सिंह के नेतृत्व में धरना आरम्भ हुआ। धरना में अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के महासचिव धीरेंद्र झा, फुलवारी विधायक गोपाल रविदास, ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव, मुर्तजा अली, पप्पू शर्मा, बृजमोहन दास, देवेंद्र वर्मा, साधुशरण दास, राजद के अमीर अहमद व बसरा जी, इंसाफ मंच की आफसा जबीं, इनौस के सुधीर कुमार व विनय कुमार, गुरुदेव दास आदि ने भी हिस्सा लिया।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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