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बेरूत विस्फोट के खिलाफ लेबनानियों का फूटा गुस्सा, कई मंत्रालयों की इमारतों पर प्रदर्शनकारियों ने किया कब्जा

5 अगस्त मंगलवार को लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए विस्फोट के बाद सरकार के विरोध में लेबनान में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन शुरु हो गए हैं। कई जगहों पर तो प्रदर्शनकारी बेहद हिंसक हो गए हैं।

कल शनिवार को गुस्साए लोगों की बड़ी भीड़ राजधानी बेरूत के शहीद चौक ‘अल बुर्ज’ पर इकट्ठे होकर सरकारी इमारतों को निशाना बनाया। इसमें विदेश मंत्रालय की इमारत भी शामिल है। शनिवार के विरोध-प्रदर्शन के दौरान, कुछ प्रदर्शनकारियों ने इकनॉमी मिनिस्ट्री में तोड़ फोड़ की और कागजों को उठाकर फुटपाथ पर फेंक दिया। वहीं दूसरे प्रदर्शनकारियों ने यही सब ऊर्जा मंत्रालय में दोहराया। ‘एसोसिएशन बैंक ऑफ लेबनान’ की दीवार पर, प्रदर्शनकारियों ने अरबी में “पथभ्रष्ट” लिख दिया।

शनिवार को सेंट्रल बेरूत के कई इलाकों में व्यापक झड़पें हुईं, प्रदर्शनकारियों ने संसद तक पहुंचने की कोशिश की और रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेड्स पर चढ़कर क्रांति का आह्वान किया! प्रदर्शनकारियों को रोक रहे सुरक्षा बलों पर ख़ूब पत्थर फेंका गया, वहीं सुरक्षा बलों ने भी हिंसक प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और रबर बुलेट दागी। हिंसक झड़प और आगजनी से आस-पास की इमारतों में आग लग गई, आसमान में धुंआ भर गया और एंबुलेंस झड़पों में घायल हुए लोगों को अस्पतालों में पहुंचाया गया। लेबनान रेड क्रॉस के मुताबिक इस विरोध-प्रदर्शन में 110 लोग घायल हुए हैं जबकि 32 लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्रालय की इमारत पर कई घंटों तक कब्जा जमाए रखा

करीब 200 प्रदर्शनकारियों की भीड़ जिसमें कई सेवानिवृत्त मिलिट्री ऑफिसर भी शामिल थे, ने विदेश मंत्रालय की इमारत पर कब्जा कर लिया और कई घंटों तक विदेश मंत्रालय की इमारत पर अपना कब्जा जमाए रखा। उन्होंने इमारत से तनी हुई मुट्ठी के साथ लाल बैनर लटकाया, जो कि विस्फोट में क्षतिग्रस्त हो गया था, और बेरुत को एक “निहत्था” शहर घोषित किया। सेना के आने के बाद ही प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्रालय की इमारत को छोड़ा।

प्रदर्शनकारियों ने सत्ताधारी नेताओं के पुतलों को फांसी पर लटकाया

देश के शीर्ष राजनेताओं के खिलाफ़ प्रदर्शनाकरियों मे जबर्दस्त गुस्सा दिख रहा था, और कई प्रदर्शनकारियों ने “फाँसी पर लटकाओ” जैसे नारे लगाए। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति मिशेल एउन (Michel Aoun), संसद के स्पीकर नबीह बेर्री (Nabih Berri) और हसन नसरल्लाह, और शक्तिशाली तानाशाह समूह और राजनीतिक दल हिजबुल्ला समूह के सचिव जनरल हसन नसरल्लाह के बोर्ड कटआउट को फांसी पर चढ़ाकर उन लोगों के प्रति अपने गुस्से और नाराजगी का प्रदर्शन किया। इसके अलावा ‘आतंकवादी, आतंकवादी, हेजबुल्ला आतंकवादी है’ जैसे नारे भी लगाए।

भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण है बेरूत में हुआ विस्फोट

3 दिसंबर 1984 को भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड प्राइवेट पेस्टीसाइड प्लांट में हुई गैस त्रासदी सरकारी भ्रष्टाचार और पूंजीवादी मिलीभगत का सबसे भयावह परिणति थी। जिसमें 15 हजार से अधिक लोगों की जान गई थी जबकि साढ़े पांच लाख से अधिक लोग ज़ख्मी हुए थे।

5 अगस्त 2020 को लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए अमोनियम नाइट्रेट विस्फोट को भी बेरूत निवासी भ्रष्टाचार की परिणति कहकर सरकार का विरोध कर रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि ये विस्फोट सरकार के भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण है। सरकार के खिलाफ़ मोर्चा खोलने वाली प्रदर्शनकारी बेरूत में इस हफ्ते हुए विस्फोट को देश के राजनीतिक अभिजात वर्ग के भ्रष्टाचार और लापरवाही की नवीनतम और सबसे खतरनाक प्रत्यक्षीकरण के तौर पर देख रहे हैं।

चार सासंदों ने दिया इस्तीफा, प्रधानमंत्री ने मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा की

5 अगस्त को हुए धमाके में 158 लोगों की मौत और भयानक तबाही के बाद से ही लेबनान के लोगों में बहुत गुस्सा है। शनिवार को रात भर देश के राजनीतिक अभिजात वर्ग को हटाने की मांग करने वाले नाराज प्रदर्शनकारियों ने तीन सरकारी मंत्रालयों में भारी तोड़ फोड़ किया है। ख़बर है कि, मुट्ठी भर सांसदों ने इस्तीफा दे दिया था, और प्रधानमंत्री ने मध्यावधि चुनावों की घोषणा कर दी है। यह संकेत है कि विस्फोट ने लेबनान की राजनीतिक प्रणाली को झकझोर कर रख दिया है। संसद की एक स्वतंत्र सदस्य पाउला याकोबियान ने भी इस्तीफा दे दिया, उन्होंने एक टेक्स्ट मेसेज में पुष्टि की है।

विस्फोट के बाद ही विदेश मंत्री नासिफ़ हित्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसे स्वीकारते हुए प्रधानमंत्री हसन दियाब ने चार्बेल वाहबे को नया विदेश मंत्री नियुक्त किया था। लेबनान की कातेब पार्टी (Kataeb Party) के तीन सांसदों में भी पार्लियामेंट से इस्तीफा दे दिया है। ये घोषणा खुद पार्टी के मुखिया सैमी गेमायाल (Samy Gemayel) ने पार्टी के ही अगुआ सदस्य के अंतिम संस्कार के मौके पर की जिनकी 5 अगस्त को बेरूत बंदरगाह पर हुए विस्फोट में मौत हो गई थी।

कोरोना, अर्थव्यवस्था में संकट, बेरोजगारी ने रखी विरोध की नींव

अल बुर्ज चौक जो कि संसद के करीब भी है, देश के शीर्ष राजनेताओं को हटाने की मांग के साथ ही विरोध भड़क गया है।

इस सप्ताह हुए विस्फोट से पहले से ही लेबनान की जनता कई संकटों से जूझ रही थी। अर्थव्यवस्था डूब गई है, बैंकों ने जमाकर्ताओं को उनके पैसे वापस देने से इनकार कर दिया है, और बेरोजगारी और मुद्रास्फीति बेतहासा बढ़ गई है। विस्फोट से पहले के हफ्तों में, प्रतिदिन रिपोर्ट किए जा रहे कोरोनावायरस मामलों की संख्या में वृद्धि शुरू हो गई थी, जिससे निपटने में सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। वहीं गर्मी के मौसम में देश के कई हिस्सों में बिजली में लंबे समय तक होने वाली कटौती से भी लोग परेशान थे।

यह सब सरकार की जनविरोधी नीतियों और जन उपेक्षा वाली राजनीति में ही निहित था, लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा तो था ही लेकिन विस्फोट ने जनसैलाब में तनाव को अचानक से ही उबाल बिंदु पर धकेल दिया है।

5 अगस्त को क्या हुआ था बेरूत बंदरगाह पर

लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार 5 अगस्त को बेरूत बंदरगाह में तब विस्फोट हुआ था जब 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट,( एक यौगिक जो अक्सर उर्वरक और बम बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है) में आग पकड़ लिया था। इसके पीछे का कारण तलाशते हुए लेबनानी अधिकारी बताते हैं कि शायद पास में काम करने वाले वेल्डरों द्वारा काम के दौरान ही आग लग गई थी। उक्त बंदरगाह पर साल 2014 से ही औद्योगिक रसायन का भंडारण में किया जा रहा था।

विस्फोट में मरने वालों में 43 सीरियाई नागरिक भी शामिल हैं जैसा कि सीरिया राज्य समाचार एजेंसी का कहना है। बता दें कि लेबनान में लगभग एक मिलियन सीरियाई शरणार्थी आते हैं, और कई अन्य सीरियाई देश में रहते हैं और काम करते हैं।

विस्फोट में कुल 5 हजार लोगों के घायल होने और ढाई लाख लोगों के बेघर होने का अनुमान है। प्रधानमंत्री ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। और जिम्मेदार लोगों को पकड़कर सज़ा दिलवाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

बता दें कि राष्ट्रपति एउन ने शुक्रवार को कहा कि विस्फोट एक बम या “विदेशी हस्तक्षेप” के कारण हो सकता है, जब कि अपनी बात के पक्ष में उन्होंने कोई विवरण या सबूत नहीं पेश किया।

वहीं टीवी पर अपने भाषण में, नसरल्लाह ने रसायनों, या बंदरगाह में हुए विस्फोट के पीछे अपने समूह का कोई संबंध होने से साफ इनकार कर दिया। बता दें कि हिजबुल्लाह, जो कि ईरान द्वारा समर्थित है और सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता में बनाए रखने में मदद करने के लिए लड़ाकू विमानों को भेजा है, का उपयोग व्यापक रूप से हथियारों की तस्करी और स्टोर करने के लिए किया जाता है। इस समूह को रसायन या विस्फोट से जोड़ने वाला कोई सबूत सामने नहीं आया है।

एक भाषण में, प्रधानमंत्री हसन दीब ने कहा कि वह सोमवार को अपने मंत्रिमंडल से संसदीय चुनावों को मंजूरी देने के लिए कहेंगे।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on August 16, 2020 4:15 pm

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