लॉक डाउन की धज्जियाँ उड़ाते हुए अल्पसंख्यकों को परेशान कर रहे हैं लोग, पीड़ितों का पीएम से गुहार लगाता वीडियो आया सामने

नई दिल्ली। दिल्ली के मुस्तफाबाद में लॉक डाउन की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। इसे लोगों को और परेशान करने का ज़रिया बना लिया गया है। बताया जा रहा है कि कभी पुलिस आती है तो कभी हिंदू कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोग आते हैं और उनके बच्चों को उठा ले जाते हैं। इससे जुड़ा सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है जिसमें मुस्तफाबाद की कुछ मुस्लिम महिलाओं को कैमरे के सामने अपनी आपबीती सुनाते देखा जा सकता है।

वीडियो में तक़रीबन 10-12 महिलाएँ मौजूद हैं जो बारी-बारी से अपनी बात रख रही हैं। बुर्का पहनी एक महिला बताती है कि यहाँ खुलेआम लॉक डाउन का उल्लंघन हो रहा है। जब मन करता है कोई न कोई बस्ती में चला आता है और किसी बच्चे को पकड़कर ले जाना शुरू कर देता है। मना करने या फिर रोकने पर धमकी दी जाती है। या फिर पैसों की माँग की जाती है। यहाँ तक कि उन्हें कोरोना संक्रमण तक का डर दिखाया जाता है। 

उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री से पूछा है कि यह कैसा लॉक डाउन है जिसमें एक समुदाय से जुड़े लोगों को अल्पसंख्यकों पर खुले हमले की छूट दे दी गयी है। एक ऐसे समय में जब सब की ज़िंदगी को इस महामारी से ख़तरा है तब धर्म और संप्रदाय के आधार पर चिन्हित कर लोगों को परेशान किया जा रहा है। यह न केवल मानवता के विरुद्ध है बल्कि भारतीय लोकतंत्र की असलियत को भी उजागर कर देता है।

वीडियो में एक महिला ने बताया कि लोग जबरन उनके घरों में घुस जा रहे हैं। यहाँ तक कि महिलाओं से भी बदतमीज़ी करने से बाज नहीं आते। कोई बुजुर्ग अगर घर पर है तो उसे कोरोना मरीज़ बताकर घसीटना शुरू कर देते हैं। और रोकने पर एक लाख-दो लाख रुपये की माँग की जाती है। और न मानने पर जेल तक भेजने की धमकी दी जाती है। महिलाओं ने बताया कि इलाक़े के सभी लोग बेहद डरे हुए हैं। लिहाज़ा उन लोगों ने सीधे पीएम से इस पर तत्काल रोक लगाने की माँग की है।

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इंदौर में हुए डाक्टरों पर हमले के पीछे की जो कहानी सामने आ रही है उसमें भी इसी तरह की कुछ बाते हैं। बताया जा रहा है कि वहाँ कुछ लोगों ने ह्वाट्सएप और सोशल मीडिया के दूसरे प्लेटफ़ार्मों के ज़रिये अफ़वाह उड़ा दिया कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को जाँच के नाम पर ले जाया जाएगा और फिर उनकी हत्याएं कर दी जाएंगी। या फिर उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित करा दिया जाएगा। लिहाज़ा इंदौर के टाटपट्टी इलाक़े में जब डॉक्टर एक मरीज़ की जाँच करने गए तो अचानक उन पर इलाक़े के लोगों ने हमले शुरू कर दिए। जिसके बाद पूरी टीम किसी तरीक़े से वहाँ से बच कर निकली।

हालाँकि इस तरह की घटनाएँ किसी एक सूबे, क्षेत्र या फिर समुदाय तक सीमित नहीं है। यूपी के मुज़फ़्फ़रनगर में लॉक डाउन को लागू कराने गए पुलिसकर्मियों पर गाँव वालों ने हमला बोल दिया जिसमें तीन पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। इस मामले में गाँव के सरपंच समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। और इंदौर वाले केस में भी तकरीबन चार लोगों को गिरफ्तार कर उनके ख़िलाफ़ एनएसए के तहत मकुदमा दर्ज किया गया है। 

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