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Friday, September 17, 2021

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मध्य प्रदेशः कांग्रेस नेता के कत्ल की सुनवाई कर रहे जज ने कहा- मेरे साथ हो सकती है अप्रिय घटना

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देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में आरोपियों को मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार का इस हद तक राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है कि दमोह में पुलिस पर ‘हटा’ के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने, अपने साथ कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है, के गंभीर आरोप लगाए हैं। जज आरपी सोनी ने जिला सत्र न्यायाधीश को इस संबंध में पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने आशंका जताई है कि भविष्य में उनके साथ कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। साथ ही उन्होंने पुलिस अधीक्षक द्वारा अपने अधीनस्थों के साथ मिलकर उनके विरुद्ध गंभीर झूठे आरोप लगाए जाने की भी आशंका जताई है। जज कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले में सुनवाई कर रहे हैं।

देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा हटा के द्वितीय अपर सत्र न्यायालय को आदेश दिया गया है कि संबंधित मामले में अभियुक्त की गिरफ्तारी कर कोर्ट में पेश किया जाए, जिसके अंतर्गत हटा एसडीओपी को संबंधित मामले में अभियुक्‍तों की गिरफ्तारी को लेकर कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत करना था।

हटा द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश आरपी सोनी ने दमोह पुलिस अधीक्षक पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिला सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखा है। उन्‍होंने लिखा कि इस मामले में अभियुक्‍तों के साथ-साथ दमोह पुलिस अधीक्षक द्वारा अपने अधीनस्थों संग उन पर झूठा एवं मनगढ़ंत दबाव बनाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक (दमोह) द्वारा अपने अधीनस्थों के साथ मिलकर उनके विरुद्ध भविष्य में गंभीर झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं। उनके साथ कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है।

देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में बसपा विधायक रामबाई ठाकुर के पति गोविंद ठाकुर आरोपी हैं। उनके अलावा मामले में अन्य आरोपी भी हैं। अपर सत्र न्यायाधीश आरपी सोनी का आरोप है कि मामले में सुनवाई को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। अभियुक्तों के साथ ही पुलिस भी उनके खिलाफ साजिश कर रही है। इसको लेकर जिला सत्र न्यायाधीश को पत्र लिख गया है।

हटा के द्वितीय अपर सत्र न्यायालय में कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले की सुनवाई चल रही है। पथरिया से बीएसपी विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह मामले में मुख्य आरोपी हैं। कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया की मार्च 2019 में हत्या कर दी गई थी।

द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने एक ऑर्डर शीट में लिखा है कि जिस मामले की वे सुनवाई कर रहे हैं, इसकी कार्रवाई उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर की जा रही है। मगर अभियुक्तगण अत्यधिक प्रभावशाली और राजनीतिक हैं। उनके खिलाफ वे जिला न्यायाधीश को आवेदन कर चुके हैं, जिसे जिला न्यायाधीश ने मिथ्या पाया और आवेदन भी निरस्त कर दिया, लेकिन अब अभियुक्तगण पुलिस के साथ मिलकर उनके खिलाफ झूठा और मनगढ़ंत दबाव बनाया जा रहा है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने इस प्रकरण को किसी अन्य न्यायालय में स्थानांतरित करने की अपेक्षा सत्र न्यायाधीश से की है।

15 मार्च 2019 को कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया की चुनावी रंजिश को लेकर हत्या कर दी गई थी। मामले में पथरिया से बसपा विधायक रामबाई के देवर, भतीजा मुख्य आरोपी बनाए गए थे। मामले को लेकर पीड़ित पक्ष के लोग उच्चतम न्यायालय तक गए। उच्चतम न्यायालय मामले की जल्द सुनवाई कर फैसला देने के आदेश हटा न्यायालय को दिए। मामले में कोर्ट में पीड़ित पक्ष के लोगों के बयान हुए। इससे पहले पीड़ित पक्ष ने कोर्ट में गोविंद सिंह को आरोपी बनाए जाने को लेकर आवेदन भी दिया था। पीड़ित पक्ष का कहना था कि वारदात के समय गोविंद सिंह भी मौके पर मौजूद थे। बयानों के आधार पर कोर्ट ने गोविंद सिंह को भी मामले में आरोपी बनाया है।

आरोप है कि गोविंद सिंह, चंदू सिंह, गोलू सिंह, लोकेश सिंह ने पुरानी रंजिश के चलते उक्त आरोपियों के साथ मिलकर 15 मार्च 2019 को डामर प्लांट के ऑफिस के पास कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया, महेश चौरसिया और सोमेश चौरसिया पर धारदार हथियारों और लोहे के सरिया से हमला किया। देवेंद्र की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि सोमेश और महेश को गंभीर चोटें आईं। सोमेश की शिकायत पर हटा थाने में आरोपियों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 323, 324, 392, 506, 120बी, 102 सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि गोविंद सिंह और देवर चंदू सिंह पर पहले से अलग-अलग थानों में 17-17 मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या के तीन मामलों में हाई कोर्ट से सजा भी हो चुकी है, लेकिन वे जमानत पर हैं। देवेंद्र चौरसिया हटा क्षेत्र में बसपा के कद्दावर नेता माने जाते थे। वर्ष 2004 में देवेंद्र बसपा प्रत्याशी के रूप में हटा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। वहीं, वर्ष 2014 में वह दमोह लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। वर्षों तक वह बसपा में रहे। 12 मार्च 2019 को कांग्रेस में शामिल हो गए। बताया जाता है, यही बात आरोपियों को नागवार गुजरा।

पुलिस ने हत्याकांड में विधायक के देवर चंदू सिंह, भतीजे गोलू सिंह और भाई लोकेश समेत 35 लोगों को आरोपी बनाया है। पुलिस ने जांच में गोविंद सिंह को आरोपी न मानते हुए उन्हें राहत दे दी थी। इस बात को लेकर वारदात का इकलौते गवाह सोमेश चौरसिया हाई कोर्ट और उच्चतम न्यायालय तक गए थे। उसके बाद उच्चतम न्यायालय  ने मामले की फिर से सुनवाई जल्द करने के आदेश दिए।

इसके पहले देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में जेल में बंद हत्यारोपियों को किस तरह का राजनीतिक संरक्ष्ण प्राप्त है, यह हटा अपर सत्र न्यायालय में जिला जेलर के लिखित बयानों को लेकर सामने आया था। दमोह जेलर एनएस राणा ने स्वीकार किया है कि मामले में दो से तीन आरोपी राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हैं, जो जेल नियमों का पालन नहीं करते हैं। नियमों का विरोध करने पर आरोपियों को दूसरी जेल में शिफ्ट करने के लिए तत्कालीन जेल अधीक्षक सैयाम ने पत्र व्यवहार किया था, लेकिन उनका ही स्थानांतरण हो गया।

दमोह जेलर एनएस राणा ने न्यायालय के नोटिस के जवाब में लिखित बयान दिए कि इस प्रकरण में निरुद्ध दो-तीन व्यक्तियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिनके नाम चंदू उर्फ कौशलेंद्र सिंह, लोकेश पटेल, गोलू उर्फ दीपेंद्र हैं एवं अन्य सभी इनके साथी हैं। राजनीतिक दृष्टि से प्रभावशाली होने से उक्त अभियुक्त द्वारा जेल में जेल अनुशासन का पालन न कर विशेष सुविधाओं के लिए जेल प्रशासन पर दबाव बनाकर हमेशा बाहरी सुविधाएं जैसे घर का भोजन, असीमित मुलाकात, जानबूझकर बीमारी का बहाना बनाकर अस्पताल जाने के लिए दबाव बनाया जाता है।

सवाल उठा कि जिला जेल के अंदर इतनी संदिग्ध गतिविधियां संचालित हैं, लेकिन जेल अधीक्षक ने इन आरोपियों को दूसरे जेल में शिफ्ट करने के लिए अब तक जेल महानिदेशक को पत्र क्यों नहीं लिखा। जेलर एनएस राणा का कहना है कि यह उनके अधिकार क्षेत्र का नहीं है। जेल अधीक्षक ही कुछ कह सकते हैं। हम लोगों पर इतना अत्यधिक दबाव है कि हम उनके द्वारा बाहरी सुविधाओं या जेल अनुशासन का पालन न करने आदि का उल्लेख जेल नियमावली के अनुसार शिकायत पुस्तिका में नहीं कर सकते। यदि उनकी शिकायत का उल्लेख हम लोगों ने किया तो ये लोग हम लोगों के साथ कुछ भी कर सकते हैं।

न्यायालय ने रिकॉर्ड पर बयान दर्ज करते हुए टिप्पणी की कि उक्त कथनों से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उपरोक्त अधिकारी अपने शासकीय कर्तव्यों का निर्वहन करने में अक्षम हैं, क्योंकि वह अभियुक्तगण की ओर से होने वाली कार्रवाई से डर रहे हैं जो अभी हुई भी नहीं, कथनों को अभिलेख पर लिया है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और इलाहाबाद में रहते हैं।)

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