मियामी में बसे प्रवासी भारतीयों ने सीएए को कहा ना! नये साल के मौके पर प्रदर्शन कर दिखायी एकजुटता

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मियामी/नई दिल्ली। सीएए और एनआरसी के खिलाफ अमेरिका के मियामी में पहली जनवरी को बड़ा प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल,पंजाब, दिल्ली, बिहार और यूपी से जुड़े ढेर सारे प्रवासी भारतीयों ने हिस्सा लिया। जिसमें ईसाई, मुस्लिम, हिंदू और सिख समेत सभी धर्मों के लोग शामिल थे। कार्यक्रम में महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर भागीदारी की।

इस मौके पर हुई सभा में वक्ताओं ने इस काले कानून के लागू होने पर चिंता जाहिर की। साथ ही उन्होंने सड़क पर उतर कर इसका विरोध करने वालों के साथ एकजुटता भी जताई। उनका कहना था कि एनआरसी के साथ सीएए के लागू होने से करोड़ों लोग आधिकारिक तौर पर दोयम दर्जे का नागरिक बन जाएंगे। साथ ही लाखों हासिए के लोगों का देशविहीन हो जाना तय है। उनका कहना था कि यह कानून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे को और मजबूत करता है।

विरोध-प्रदर्शन के इस कार्यक्रम में गोरे अमेरिकी परिवारों के साथ ही क्यूबा के कई नागरिक भी शामिल हुए। इन सभी लोगों ने भी भारत के सामने खड़ी इस मानवीय त्रासदी को समझने के बाद उस पर चिंता जाहिर की।

इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और छात्रों के पुलिस द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से इस उत्पीड़क और गैरसंवैधानिक कानून को जल्द से जल्द वापस लेने की मांग की। सभी वक्ताओं ने भारत के संविधान को लागू करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि सेकुलरिज्म और बहुलता भारतीय संविधान की बुनियाद है।

कार्यक्रम की शुरूआत अमेरिकी राष्ट्रगान के बाद भारतीय राष्ट्रगान से हुई। उसके बाद सभी लोगों ने मिलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़ी। फिर कम्युनिटी नेता साजन कुरियन के साथ ही विभिन्न दक्षिण फ्लोरिडा समुदायों के लोगों ने अपना भाषण दिया।

प्रदर्शनकारियों ने मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत पर दबाव डालने की अपील की। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही उत्तर प्रदेश में पुलिस हिंसा में 22 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इसमें 8 साल का वाराणसी का एक मासूम भी शामिल था। उत्तर प्रदेश की पुलिस ने खुद ही इस बात को स्वीकार किया है कि उसने 705 लोगों को हिरासत में लिया हुआ है। जिसमें सभी क्षेत्रों के नागरिक शामिल हैं।

इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने न्याय को सुनिश्चित करने के लिहाज से पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग की। इसके साथ ही उनका कहना था कि लोगों का उत्पीड़न करने वाले पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसरों में जबरन घुसने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।

(मियामी से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के हवाले से आयी रिपोर्ट।)  

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