Saturday, January 22, 2022

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दलित नेता-आरटीआई एक्टिविस्ट केदार सिंह जिंदान हत्याकांड: अदालत ने सुनाई दोषियों को उम्र कैद की सजा

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हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित केदार सिंह जिंदान हत्याकांड में आखिरकार 44 गवाहों की गवाही के बाद विशेष न्यायाधीश सिरमौर आरके चौधरी की अदालत ने तीन दोषियों को सजा सुना दी है। तीन साल पहले दलित नेता और आरटीआई एक्टिविस्ट केदार सिंह जिंदान को तथाकथित उच्च जाति के दबंगों ने सिरमौर जिला के बकरास गांव में क्रूरता के साथ पीट-पीट कर मार डाला था और सबूत को छुपाने के लिए उसको एक्सीडेंट में तब्दील कर दिया था। लाश को सड़क पर डाल कर उस पर एसयूवी चढ़ाई गई और बुरी तरह से कुचल दिया था। यह केवल जातीय उत्पीड़न का मामला नहीं था बल्कि यह मामला दलितों में बढ़ती चेतना और कोई केदार न उभरने देने का भी प्रयास था।

जिला न्यायवादी बीएन शांडिल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मामला वर्ष 2018 का है। सात सितंबर 2018 मृतक केदार सिंह जिंदान, रघुवीर सिंह व जगदीश बीआरसी दफ्तर से बाहर निकले। इसी दौरान दोषी पाए गए जय प्रकाश उप प्रधान ग्राम पंचायत बकरास, कर्म सिंह उर्फ काकू व गोपाल सिंह सड़क पर पहले से ही खड़े थे। इसी बीच जय प्रकाश व कर्म सिंह उर्फ काकू स्कार्पियो गाड़ी से उतर कर नैन सिंह को मिले। दोनों ने नैन सिंह से हाथ मिलाया। वहीं बातचीत में नैन सिंह को ऐसा लगा कि केदार सिंह को मारने की योजना बनाई गई है।

करीब 12 बजे दोपहर जब मृतक केदार सिंह जिंदान, रघुवीर सिंह व जगदीश चंद कार्यालय से बाहर निकले, तो आरोपी जयप्रकाश ने मृतक केदार सिंह जिंदान को सड़क पर आने को लेकर आवाज लगाई। मृतक केदार सिंह जिंदान नीचे सड़क पर चला गया। वहीं रघुवीर सिंह व जगदीश चंद भी बीआरसी दफ्तर के बाहर खड़े रहे। नीचे सड़क पर आरोपी जय प्रकाश की काले रंग की स्कार्पियो पहले से ही खड़ी थी। जैसे ही मृतक केदार सिंह जिंदान गाड़ी के नजदीक पहुंचे, तो जय प्रकाश ने मृतक केदार सिंह जिंदान को गाड़ी के बोनट के पास चलने को कहा, तो वहां आरोपी गोपाल सिंह व कर्म सिंह उर्फ काकू भी खड़े हो गए।

जिसके बाद तीनों में बहस शुरू हो गई। इसी दौरान तीनों आरोपियों ने स्कार्पियो से डंडे निकालकर केदार सिंह जिंदान से मारपीट शुरू कर दी। इस मारपीट में मृतक केदार सिंह सड़क पर गिर गए। जब वह उठने की कोशिश कर रहे थे, तो आरोपी जयप्रकाश एक लोहा का गाडर उठा कर लाया और मृतक केदार सिंह जिंदान के सिर पर उससे 4-5 बार वार किया। फिर आरोपी जयप्रकाश ने गाड़ी को स्टार्ट किया। आरोपी कर्म सिंह उर्फ काकू व गोपाल सिंह ने मृतक केदार सिंह जिंदान को उठाकर गाड़ी के आगे सड़क पर रखा और आरोपी जय प्रकाश ने एक बार स्कॉर्पियो को मृतक केदार सिंह जिंदान के शरीर के ऊपर से आगे, फिर पीछे किया।

इसके बाद गाड़ी को शरीर के ऊपर से सीधा आगे ले जाकर मृतक के शरीर से करीब 160 फुट आगे खड़ा कर दिया। उसके उपरांत उसने गाड़ी की बाईं साइड के पिछले टायर के ब्रेक आयल पाइप को तोड़ दिया, ताकि पुलिस को संशय बने कि यह हत्या नहीं बल्कि सड़क दुर्घटना हुई है। इस दौरान आरोपी जयप्रकाश गाड़ी से उतरा, तो कर्म सिंह उर्फ काकू व गोपाल सिंह ने आरोपी जय प्रकाश को बताया कि जगदीश ऊपर से देख रहा है।

इसके बाद आरोपी जयप्रकाश ने ऊपर जगदीश को देख कर कहा कि तू क्या देख रहा है, शाम तक तेरा भी यही हाल करेंगे। इसी मामले में अभियोग पक्ष ने विशेष अदालत में 44 गवाह पेश किए और बचाव पक्ष ने दो गवाह पेश किए। लिहाजा अदालत में तीनों दोषियों को उपरोक्त सजा सुनाई।

केदार सिंह जिंदान की हत्या के मामले में आरोपी जय प्रकाश को आईपीसी की धारा 302 सहित एससी व एसटी एक्ट की धारा 3(2) के तहत दोषी करार देते हुए उम्र कैद व एक लाख रुपए जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोषी जय प्रकाश को धारा 201 के तहत 5 वर्ष का कारावास व 25 हजार रुपए जुर्माना अदा करने के भी आदेश अदालत ने जारी किए हैं। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

इसी मामले में एक अन्य आरोपी गोपाल सिंह को भी आईपीसी की धारा 302 व एससीएसी एक्ट की धारा 3(2)(वी) के तहत उम्र कैद व 50,000 रुपए जुर्माना अदा करने की की सजा सुनाई गई है। वहीं जुर्माना अदा न करने की सूरत में एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जबकि आईपीसी की धारा 201 के तहत पांच वर्ष का कारावास व 25000 रुपये जुर्माना अदा करना होगा। वहीं जुर्माना अदा न कर पाने की सूरत में एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना में होगा।

इसके अलावा जिंदान हत्याकांड में आरोपी कर्म सिंह को आईपीसी की धारा 323 के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास व एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा और धारा 325 के तहत तीन वर्ष का कारावास व 5000 रुपये जुर्माना अदा करना होगा। वहीं जुर्माना अदा न कर पाने की सूरत में एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा धारा 201 के तहत एक वर्ष का कारावास व 5000 रुपये जुर्माना अदा करना होगा। जुर्माना अदा न करने की सूरत में एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

कौन थे केदार सिंह जिंदान और क्या बनी मौत की वजह

केदार सिंह जिंदान एक जिंदादिल और क्रांतिकारी इंसान थे। उसने सदियों से दबी-कुचली जनता पर हो रहे जुल्मों का विरोध करना शुरू कर दिया था। उसने अपने गांव ही नहीं पूरे इलाके में तथाकथित उच्च जातियों के उत्पीड़न का विरोध किया, लोगों को संगठित करना शुरू किया और लोगों में उम्मीद जगानी शुरू कर दी थी। उसने जातीय भेदभाव को समाप्त करने के लिए अंतरजातीय विवाहों का समर्थन किया। महिला और बच्चों की समलिंग का पर्दाफाश किया। अमीर लोगों द्वारा बीपीएल सूची में नाम दर्ज कर गरीबों का हक मारने के खिलाफ आरटीआई फाइल कर खुलासा किया। उन्होंने पढ़-लिख वकालत की और अपने लोगों के केस लड़ने शुरू किये। एक तरह से कहा जाए तो वह गरीब-दलितों के नेता बनकर उभरने लगे थे। और केवल दिखावे के लिए और चापलूस नेता नहीं बल्कि एक जुझारू लड़ाकू नेता के तौर पर उन्होंने संघर्ष किया।

जो उनकी मौत का कारण बनी वह जून 2018 की घटना है। उन्होंने शिमला के अंदर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और तथाकथित उच्च जाति के दबंग अमीर लोगों द्वारा बीपीएल श्रेणी में नाम दर्ज करवा कर गरीबों का हक मारने का पर्दाफाश किया। केदार सिंह जिंदान द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो देखें। उन्होंने साफ तौर पर बताया कि किस तरह से उप प्रधान (गांव का उप सरपंच) जय प्रकाश (जिसने बाद में जिंदान की हत्या की) ने अपने परिजनों के बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) में नाम दर्ज करवा रखे हैं, इस का फायदा उनको नौकरियों में हुआ है और उनके पास एसयूवी, महिंद्रा, अल्टो गाड़ी है, कई जगह घर है। आरटीआई से हुए इस खुलासे से पूरे इलाके के दबंग घबरा गए थे और स्थानीय उत्पीड़ित लोगों में लड़ने का हौसला आने लगा था। यह उनकी मौत का कारण बना।

 विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा की गई जांच रिपोर्ट के अनुसार 44 वर्षीय केदार का जन्म सिरमौर जिला के ब्लाक शिलाई, ग्राम पंचायत गुनडाह, गांव पाब में स्वर्गीय रतन सिंह के घर  हुआ था। उनका परिवार अनूसूचित जाति (कौली) से संबंध रखता है। सिरमौर जिले में कौली लगभग भूमिहीन दलित हैं जो पारंपरिक रूप से हरकारे सहित ब्राह्मणों और राजपूतों के खेतों में बेगार और बंधुआ मजदूरी का काम करते थे। अभी भी जिंदान के भाई राजपूतों की आज्ञा से उनको 5000 रुपये और बकरी देकर शामलात जमीन पर थोड़ी बहुत खेती करते हैं।

एक जमीनी झगड़े में जिंदान ने अपने बाप को जवानी में ही खो दिया था। उच्च जाति के दबंगों के उकसावे में दलितों में आपसी झगड़ा हुआ जिस में उनकी मौत हो गई थी। जिंदान ने 2010 में शिलाई थाने में जब एफआईआर दर्ज करवाई थी तो ये मामला उठाया था। जब गांव के प्राथमिक स्कूल में उन्होंने ठेके पर रखे अध्यापक के घोटाले का पर्दाफाश किया तो उन्होंने लिखवाया था कि उसको उच्च जाति के लोगों से खतरा है जिसमें लाईन थी – “हमने तुम्हारे बाप को तुम्हारे कौली परिवारों से ही मरवाया लेकिन तुम्हें हम अपने हाथों से ही मारेंगे।”

केदार ने नवोदय विद्यालय से पढ़ाई पूरी की और फिर कानून की डिग्री हासिल की थी। उन्होंने नौजवान छात्रों को शिक्षित-प्रशिक्षित करने के लिए एक शैक्षिक अकादमी की शुरुआत भी की थी। इस दौरान वह कोली समाज की आवाज बनकर उभरे थे। वह अखिल भारतीय कोली महासभा का उप अध्यक्ष और हरिजन लीग के पदाधिकारी भी बने। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट से एक बार चुनाव भी लड़ा था। वह लगातार आरटीआई कार्यकर्ता के तौर पर इलाके के विकास कार्यों में होने वाली धांधलियों और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश कर रहे थे। यही कारण था कि वह पूरे इलाके के दबंगों के आंख की किरकिरी बन गये थे।

ध्यान देने वाली बात यह है कि वह लगातार पुलिस और प्रशासन के संपर्क में था और उनके पास गुहार लगा रहा था। लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। इस से पहले नवंबर 2017 में भी शिलाई गांव के पास जिंदान पर हमला हुआ था। उसको बस से उतार कर लगभग 50 लोगों ने बुरी तरह मारपीट की थी। वो उसको मरा समझ कर छोड़ कर गए थे। पीटने के बाद जब वह लहूलुहान हो बेहोश हो गया था उसके ऊपर कई तसले मिट्टी के डाल दिये गये थे। इस मामले को जिंदान ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के समक्ष उठाया था। इसकी जांच के आदेश हुए। इसके बाद जिंदान ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी उसमें उन्होंने 30 लोगों के नाम दिये थे जिनसे उनको खतरा था। उनमें से एक नाम उनकी हत्या के दोषी पाए गए जयप्रकाश का भी था।

तीन केश जो उनकी जान के दुश्मन बने वह ये थे – आरटीआई के खुलासे के बाद उनके गांव के अनुबंधित अध्यापक को बरखास्त किया गया। उन्होंने 2014 में दवरा, और 2017 में मनाली गांव में अंतरजातीय विवाह का समर्थन किया और जिस कारण उन पर दिसंबर 2017 का हमला भी हुआ। तीसरा बीपीएल योजना का दुरुपयोग कर बकरास पंचायत में फायदा उठाने वालों का पर्दाफाश जिस कारण उनकी 7 दिसंबर को हत्या हुई।

फैसले का स्वागत

जिंदान की हत्या से चिंतित मानव अधिकार कार्यकर्ताओं व पर्यवारणवादियों द्वारा सबसे पहले की गई तथ्य अन्वेषण रिपोर्ट The moment of reckoning और इसकी सदस्य रही हिमधरा क्लेक्टिव की मानशी असेर ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि  –  संविधान दिवस पर ये खबर मिलना कि केदार सिंह जिन्दान के कातिलों को सज़ा सुनाई गयी सभी न्याय के पक्षधरों के लिए ख़ुशी की बात है। यह फैसला ऐतिहासिक है क्योंकि हिमाचल राज्य में सरकारी आंकड़ों के अनुसार जातीय उत्पीड़न में सजा की दर मात्र 9% है। तीन साल में इस तरह का फैसला न्यायालय से आना जहां दोषियों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई जाए ये अपने आप में बड़ी बात है। इस केस में कोर्ट और पुलिस दोनों की ही भूमिका सराहनीय थी पर इसमें सबसे बड़ी जीत उन सभी लोगों की है जो लगातार न्याय के लिए संघर्षरत रहे – चाहे वो जिन्दान के परिवारन हों या उनके साथ खड़े संगठन। केदार सिंह जिन्दान ने जो मुद्दे उठाये और जिस मुहिम के चलते अपनी जान गवाई – यह उसकी भी जीत है। हिमाचल में जातिगत भेद भाव और हिंसा का मुद्दा आज भी काफी हद तक नजरअंदाज किया जाता है। अभी भी और बहुत सारे सामाजिक प्रयासों की जरूरत है। राज्य में अनूसूचित जाति आयोग और मानव अधिकार आयोग दोनों को मज़बूत करने का काम सरकार को करना चाहिए। परन्तु उससे बड़ा काम है सामाजिक मानसिकता को बदलने का ताकि हमारे संवैधानिक मूल्यों पर हम खरे उतर सकें। 

सामाजिक-आर्थिक समानता का जन अभियान की तरफ से सुखदेव विश्वप्रेमी ने फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिंदान की हत्या से पूरा समाज दुखी था। इस की लड़ाई में, कोर्ट से लेकर सड़कों तक सभी तरह के संगठनों और सभी तरह के समुदायों का समर्थन हासिल हुआ। आज हिमाचल में तरह-तरह की यात्राओं के नाम पर लोगों को जाति और आरक्षण के नाम पर आपस में लड़ाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे लोग मानव अधिकार की रक्षा करने वाले संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ लोगों को उकसा रहे हैं। ऐसे में जिंदान के दोषियों को सजा देना स्वागत योग्य है और यह पूरे समाज की जीत है। 

वहीं अखिल भारतीय कोली समाज ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। सिरमौर जिला अध्यक्ष संजय पुंडीर ने जारी एक बयान में  बताया कि अखिल भारतीय कोली समाज और अन्य संगठनों ने मिल कर दलित शोषण मुक्ति मंच का गठन किया और लड़ाई लड़ने में निर्णायक भूमिका अदा की। दलित शोषण मुक्ति मंच जिला सिरमौर कमेटी और अनुसूचित जाति वर्ग के सभी संगठनों वाल्मीकि समाज, रविदास समाज, समता सैनिक दल, कबीर पंथी समाज, हरिजन लीग,महिला समिति ,छात्र संगठन, मजदूरों और किसानों के संगठन का भी उन्होंने धन्यवाद किया है।

संजय पुंडीर ने बताया कि ये माकपा विधायक ने जाति विशेष से ऊपर उठ कर जिन्दान को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जब शिलाई क्षेत्र में जिन्दान के शव को जलाने का विरोध होने लगा उस समय भी राकेश सिंघा ने स्वयं जिन्दान की पत्नी और बच्चों के साथ जिन्दान के गांव पहुंच कर जाति विशेष से ऊपर उठ कर जिन्दान के गाँव मे ही दाह संस्कार करवा कर दलित समुदाय के अन्दर से भय के माहौल को खत्म किया था। संजय पुंडीर ने कहा कि हम उन सभी संगठनों का धन्यवाद करते है जिन्होंने इस लड़ाई में जाति से ऊपर मानवता को माना और इस शोषण के खिलाफ जंग में साथ दिया।

दलित शोषण मुक्ति मंच के आशीष ने बातचीत करते हुए कहा कि हमारे संगठन ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। हमारा संगठन हर तरह के शोषण के खिलाफ है चाहे वह सवर्ण समाज का हो या फिर दलित समाज का। 

(हिमाचल प्रदेश से गगनदीप सिंह की रिपोर्ट।)

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