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Friday, September 17, 2021

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अतिथि देवो भव वाले नये भारत ने अफगान महिला सांसद को एयरपोर्ट से किया डिपोर्ट

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अफ़ग़ानिस्तान की महिला सांसद रंगीना करगर ने भारत सरकार पर संगीन आरोप लगाते हुये दावा किया है कि दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनके साथ अपराधियों जैसे सलूक किया गया और 20 अगस्त को उन्हें डिपोर्ट कर दिया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अफ़ग़ान महिला सांसद रंगीना करगर 20 अगस्त को इस्तांबुल से दुबई की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचीं थीं। उन्होंने बताया कि उनके पास राजनयिक/आधिकारिक पासपोर्ट है, जो भारत के साथ समझौते के तहत वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा देता है।

उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान संसद का सदस्य होने के बावजूद भारत में उनके साथ मुजरिमों जैसा सलूक किया गया।

अफ़ग़ान सांसद रंगीना करगर ने कहा कि दिल्ली एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने उनसे कहा कि उन्हें इसको लेकर अपने सीनियर से बात करनी होगी। इसके बाद उन्हें दो घंटे तक इंतज़ार कराया गया और उसके बाद, उन्हें उसी एयरलाइन द्वारा दुबई के रास्ते इस्तांबुल वापस भेज दिया गया।

अफ़ग़ान महिला ने इंडियन एक्सप्रेस को आगे बताया, “उन्होंने मुझे डिपोर्ट कर दिया, मेरे साथ एक अपराधी जैसा व्यवहार किया गया। मुझे दुबई में मेरा पासपोर्ट नहीं दिया गया। यह मुझे सीधे इस्तांबुल में वापस दिया गया।”

अफ़ग़ान महिला सांसद ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि वो इस पासपोर्ट पर कई बार भारत की यात्रा कर चुकी हैं और उन्हें हर बार आने दिया गया था। लेकिन इस बार इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रुकने को कहा और जब उन्होंने वजह पूछी तो अधिकारियों ने बताया कि उन्हें अपने वरिष्ठों से बात करनी होगी।

करगर ने बताया कि 20 अगस्त को उनका साउथ दिल्ली के एक अस्पताल में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट था और 22 अगस्त का इस्तांबुल का वापसी टिकट बुक था।

अफ़ग़ान महिला सांसद ने भारतीय मीडिया से कहा, “मुझे गांधी के भारत से ये उम्मीद कभी नहीं थी। हम भारत के हमेशा दोस्त रहे, रणनीतिक और ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं। लेकिन इस बार (मोदी राज में) उन्होंने एक महिला और सांसद के साथ ऐसा बर्ताव किया! उन्होंने मुझसे एयरपोर्ट पर कहा कि माफ़ कीजिए हम आपकी कोई मदद नहीं कर सकते।”

अफ़ग़ान महिला सांसद ने कहा कि – “उन्होंने मेरे साथ जो किया वह अच्छा नहीं था। काबुल में स्थिति बदल गई है और मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार अफगान महिलाओं की मदद करेगी।” उन्होंने कहा कि डिपोर्ट करने के पीछे कोई कारण नहीं बताया गया, लेकिन “यह शायद काबुल में बदली हुई राजनीतिक स्थिति और सुरक्षा से संबंधित था।”

अफ़गान महिला सांसद के आरोप के साथ ही नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का सांप्रदायिक और अमानवीय चेहरा भी दुनिया के सामने उजागर हो गया है।

इस घटना के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान पर भारत सरकार की नीति भी उजागर हो गयी है।

वहीं विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि उन्हें करगर से जुड़ी घटना की जानकारी नहीं थी। रंगीना करगर दिल्ली के एयरपोर्ट से डिपोर्ट होने के दो दिन बाद, भारत ने दो अफ़ग़ान सिख सांसदों, नरिंदर सिंह खालसा और अनारकली कौर होनरयार का भारत में स्वागत किया। होनरयार पहली सिख महिला हैं जिन्होंने अफगान संसद में प्रवेश किया है।

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने भारत के नागरिकता क़ानून में साल 2019 में संशोधन किया है जिसके मुताबिक़ छः गैर मुस्लिम समुदाय हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए भारतीय नागरिकता देने की बात कही गयी है। इसमें भारत की नागरिकता पाने के लिए भारत में कम से कम 12 साल रहने की आवश्यक शर्त को कम करके सात साल कर दिया गया।

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