Saturday, February 4, 2023

mahatma gandhi

देश की फ़िज़ा से आज भी यह आवाज़ आती है कि ‘डरो मत’

पारंपरिक परिवार, रूढ़िवादी समाज से लेकर देश-दुनिया की तमाम हुक़ूमतें, सत्ता की तरफ़ से पैदा किए गए डर के ज़रिए चलायी जाती हैं। रामचरित मानस के महाकवि तुलसी दास ने भी सामान्य मनोविज्ञान को एक विशेष परिघटना के दौरान...

गणतंत्र दोराहे पर: 26 जनवरी के मूल्य बनाम 30 जनवरी के हत्यारे गिरोह के मंसूबे

26 जनवरी और 30 जनवरी हमारे राष्ट्रीय इतिहास की दो अहम तारीखें हैं- 26 जनवरी, हमारा गणतंत्र दिवस, उन मूल्यों की याद दिलाता है जिनके लिए आज़ादी की जंग लड़ी गयी और 30 जनवरी, जिस दिन उस ऐतिहासिक लड़ाई...

 गांधी जयंती विशेष: बापू क्या इस भारत को पहचानेंगे भी?  

राष्ट्रपिता गाँधी को रवींद्रनाथ टैगोर ने महात्मा कहा और गांधी जी ने उन्हें गुरुदेव की उपाधि दी। टैगोर ने गाँधी जी को महात्मा सिर्फ इसलिए नहीं कहा क्योंकि वे सिर्फ देशव्यापी राजनीतिक आन्दोलन से जुड़े एक महान नेता थे, जिन्होंने...

गांधी की दांडी यात्रा-7: एक अहिंसक क्रांति का आह्वान 

आणंद से रवाना होकर, गांधी और उनके सहयात्री, अपने लक्ष्य की ओर बढ़े। यात्रा सुबह, एक प्रार्थना के बाद शुरू हो जाती थी और सुबह के दस बजे तक जितनी दूरी तय की जा सकती थी, वह दूरी तय...

‘अंग्रेज़ों! भारत छोड़ो’ आंदोलन और गांधी जी का यादगार भाषण

1942 के पहले जब 1938–39 में इस बात की संभावना बन गयी थी कि द्वितीय विश्वयुद्ध होगा ही, तब नेताजी सुभाष का विचार था कि युद्ध के समय पर ही अंग्रेजों के खिलाफ आज़ादी की एक निर्णायक जंग छेड़ी...

द कश्‍मीर फाइल्‍स: लोगों को बांटने का खतरनाक खेल

अल्‍पसंख्‍यकों के बारे में गलतफहमियां फैलाना और उनके खिलाफ नफरत भड़काना साम्‍प्रदायिक राष्‍ट्रवाद का पुराना और आजमाया हुआ हथियार है। हमारे देश में यह प्रक्रिया लम्‍बे समय से जारी है। हाल में साम्‍प्रदायिक राष्‍ट्रवादियों के हाथों में एक नया...

जन्मदिन पर विशेष: लोहिया ने रखी देश में विपक्ष की नींव

आज (23 मार्च) एक कुजात गांधीवादी का जन्मदिन है, हालांकि उस कुजात गांधीवादी ने अपना जन्मदिन कभी नहीं मनाया। उसी के जन्मदिन के दिन ही शहीद ए आज़म भगत सिंह को साल 1931 में फांसी पर लटका दिया गया...

नेताजी सुभाष का साम्प्रदायिक ताकतों से टकराव 

सुभाष चन्द्र बोस भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अप्रतिम योद्धा थे। योद्धा शब्द सच में केवल उन्हीं के लिये कहा जा सकता है। अंग्रेज़ी हुक़ूमत के खिलाफ 1857 का विप्लव एक विद्रोह था जो चर्बी मिले कारतूस के मुद्दे पर...

नेहरू और सुभाष के बीच पत्र व्यवहार

पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा संपादित एक ग्रंथ है जिसमें उन्हें संबोधित अनेक पत्र प्रकाशित किए गए हैं। इन पत्रों का चयन स्वयं जवाहरलाल नेहरू ने किया था। इस पुस्तक का नाम है ‘‘ए बंच ऑफ ओल्ड लेटर्स‘‘। इस ग्रंथ में 368 पत्र...

वैचारिक उथल पुथल और जिज्ञासा की ख़ुराक़ है -“उसने गांधी को क्यों मारा?”

गांधी अपने समय से हमारे समय तक के सबसे चर्चित नाम है। गांधी इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महात्मा गांधी के अतिरिक्त एक पक्ष वकालत की डिग्री लिए हुए वकील मोहनदास करमचंद गांधी भी का है। जो व्यक्ति के...

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गुरमीत राम रहीम के सत्संग और अमृतपाल की खिलाफत: ‘काले दिनों’ के मुहाने पर पंजाब

भारत का सबसे प्रमुख दक्षिणपंथी दल भारतीय जनता पार्टी है और इस वक्त केंद्र की शासन-व्यवस्था नरेंद्र मोदी की...