Wednesday, October 27, 2021

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mahatma gandhi

सांप्रदायिकताः फुनगी छोड़िए, समस्या की जड़ को पकड़िए

भारत के मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना ने मीडिया में बढ़ती सांप्रदायिकता पर चिंता जता कर अच्छी पहल की है। इससे देश के विभिन्न संस्थानों को एक संदेश जाएगा और मीडिया को भी आइना देखने का मौका मिलेगा। लेकिन...

अतिथि देवो भव वाले नये भारत ने अफगान महिला सांसद को एयरपोर्ट से किया डिपोर्ट

अफ़ग़ानिस्तान की महिला सांसद रंगीना करगर ने भारत सरकार पर संगीन आरोप लगाते हुये दावा किया है कि दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनके साथ अपराधियों जैसे सलूक किया गया और 20 अगस्त को उन्हें डिपोर्ट कर...

भारत छोड़ो आंदोलन और गांधीजी का यादगार भाषण

1920 से 1948 तक का कालखंड, भारतीय इतिहास में गांधी युग के नाम से जाना जाता है। अगर कोई एक वाक्य में गांधी की स्वाधीनता संग्राम में योगदान के बारे में पूछे तो, उसका उत्तर होगा, एक तो, गांधी ने...

9 अगस्त 1942 की कहानी, अगस्त क्रांति के सिपाही डॉ. जीजी परीख की जुबानी

98 वर्षीय डॉ. जीजी परीख 9 अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल थे। महात्मा गांधी ने 8 अगस्त के भाषण में हिन्दू-मुस्लिम एकता की अपील करते हुए घोषणा की थी कि देश का हर नागरिक आज के...

दलित लेखन : इतिहास की पुनर्व्याख्या

भारतीय समाज आदिकाल से ही वर्ण व्यवस्था द्वारा नियंत्रित रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो वर्ण व्यवस्था प्रारंभ में कर्म पर आधारित थी कालान्तर में जाति में परिवर्तित हो गई। वर्ण ने जाति का रूप कैसे धारण...

7 जून, 1893: गांधी ने नस्लभेद के विरुद्ध आंदोलन की नींव रखी थी

इतिहास में कुछ तारीखें इतिहास और मानव चिंतन की धाराएं बदल कर रख देती हैं। ऐसी ही तारीखों में आज 7 जून की तारीख भी है, जब दक्षिण अफ्रीका के एक अज्ञात रेलवे स्टेशन, पीटरमारिट्जबर्ग, पर 7 जून 1893...

‘आंदोलनजीवी’ किसानों ने ही बदला है देश का इतिहास

किसान आंदोलन अपने सौ दिन पूरे करने जा रहा है। पर न तो बातचीत हो रही है और न ही बातचीत की तारीख तय हो पा रही है। सब कुछ थमा है। पर किसानों के हौसले जस के तस...

तरक्की पसंद तहरीक का ब्लू प्रिंट है सज्जाद जहीर का उपन्यास ‘लंदन की एक रात’

‘‘इंसानी ज़िंदगी का दायरा सिर्फ इश्क और मुहब्बत तक महदूद नहीं। क्या इसके अलावा और बहुत से मसाइल और बहुत सी दिलचस्प और गैर दिलचस्प चीजें नहीं हैं, जिनसे हम बावस्ता हैं? इन चीजों को छोड़कर हम खला-ए-महज में...

सुप्रीम कोर्ट, माफी का आग्रह और महात्मा गांधी

ट्वीट से 'न्यायपालिका की चूलें हिल गई हैं,' ऐसा माननीय न्यायमूर्तियों ने 14 अगस्त को प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा था। भारतीय न्यायपालिका के ऊपर कभी केरल हाई कोर्ट के एक समारोह में बोलते हुए...

जब पूरा देश एक ही नारे से गूंज उठा! ‘लाल किले से आई आवाज-सहगल, ढिल्लन, शाहनवाज़’

हमारे देश की स्वतंत्रता में यूं तो असंख्य भारतीयों और अनेक तूफानी घटनाओं का योगदान है, लेकिन इन घटनाओं में से कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जो आगे चलकर आजादी में निर्णायक साबित हुईं। ‘लाल किला ट्रायल’ ऐसी ही एक...
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भाई जी का राष्ट्र निर्माण में रहा सार्थक हस्तक्षेप

आज जब भारत देश गांधी के रास्ते से पूरी तरह भटकता नज़र आ रहा है ऐसे कठिन दौर में...
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