Monday, November 29, 2021

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mahatma gandhi

जब पूरा देश एक ही नारे से गूंज उठा! ‘लाल किले से आई आवाज-सहगल, ढिल्लन, शाहनवाज़’

हमारे देश की स्वतंत्रता में यूं तो असंख्य भारतीयों और अनेक तूफानी घटनाओं का योगदान है, लेकिन इन घटनाओं में से कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जो आगे चलकर आजादी में निर्णायक साबित हुईं। ‘लाल किला ट्रायल’ ऐसी ही एक...

कन्हैया कुमार पर राजद्रोह के मुक़दमे की अनुमति और राजद्रोह का कानून

दिल्ली सरकार ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष और कम्युनिस्ट पार्टी के नेता कन्हैया कुमार के विरुद्ध दर्ज सेडिशन के मुक़दमे धारा 124A के अंतर्गत मुक़दमा चलाने की अनुमति 28 फ़रवरी को दे दी। इस पर कन्हैया कुमार...

गांधीवाद में मौजूद है वर्तमान समाज के कठिन सवालों का जवाब: प्रो. आनंद कुमार

“मौजूदा समाज पांच ऐसे सवालों से जूझ रहा है, जिनका उत्तर सिर्फ गांधीवादी विचारधारा में मिलता है। हिंसा, धार्मिक कट्टरता, कार्पोरेट जीवन शैली, फरेब और झूठ के तले दबते मानवीय रिश्ते इत्यादि आज के समाज की दयनीय दशा को...

स्मृति शेष: मोहनदास के महात्मा गांधी बनने की प्रमाणिक कथा लिखने वाले लेखक गिरिराज किशोर

अपने वृहद उपन्यास 'पहला गिरमिटिया' के जरिए महात्मा गांधी के 'महात्मा' होने से पहले की जीवन प्रक्रिया के अनगिनत अनछुए पहलू विस्तार से व्याख्ति करने वाले गिरिराज किशोर उस वक्त विदा हुए हैं जब एक विचारधारा विशेष से वाबस्ता...

मोदी के ‘कत्ल और कानून’ के राज में कहां खड़े हैं गांधीजन

आज महात्मा गांधी की 72वीं पुण्यतिथि है। 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में प्रार्थना सभा के लिए जाते हुए महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। हिंदू कट्टरपंथी नाथूराम गोडसे और उसके साथियों ने गांधी...

नागरिकता बिलः सेकुलर, लोकतांत्रिक गणराज्य को कठमुल्ला तंत्र में बदलने की घोषणा

इस विधेयक का विरोध इसलिए नहीं करना चाहिए कि यह मुसलमानों के साथ अन्याय करता है। इस विधेयक का विरोध इसलिए करना चाहिए, ​क्योंकि यह बिल 50 साल तक लड़ी गई आजादी की लड़ाई और 72 साल में निर्मित...

मशीन और पूंजी के नहीं श्रम के पक्षधर थे गांधी

अहिंसा महात्मा को सिर्फ बीती सदी तक ही सीमित करना, उनके साथ न्याय करना नहीं होगा। यह सही है, उनका कर्म रंग मंच 19वीं और 20वीं सदी रही हैं। लेकिन वे किसी राष्ट्र या भूभाग या नस्ल के...

गांधी:भारतीय समाज की स्पष्ट समझ और परख

यदि मैं मार्क्सवादी भाषा में कहूं तो उस समय का मुख्य अंतर्विरोध था साम्राज़्यवाद और उसकी दासता से आज़ादी उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के मध्य तक यह अंतर्विरोध प्रमुख बना रहा। गांधी जी अपनी दृष्टि, आस्था...

परिवर्तनशील, प्रयोगधर्मी व निरंतरता के गांधी

जब यह फ्रेम गांधी जी के लिए है ही नहीं तब क्यों उनकी प्रासंगिकता पर चिंतन किया जाए। ऐसा चिंतन फिजूल की क़वायद ही होगी।यह सही है, कोई भी नायक-महानायक अपने, चिंतन, विचारधारा और क्रिया में समय-समाज सापेक्ष होते हैं।...

आज और कल के दौर में गांधी

सर्व प्रथम यह सपष्ट कर दूं, मैं गांधीवादी या गांधी अनुयाई नहीं हूं। पचास साल पहले जब थोड़ी बहुत राजनीतिक या विचारधारात्मक चेतना मुझमें आयी थी तब मैंने महात्मा गांधी के विचारों और कार्यशैली की आलोचना की...
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भारत-माता का संदर्भ और नागरिक, देश तथा समाज का प्रसंग

'भारत माता की जय' भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान सबसे अधिक लगाया जाने वाला नारा था। भारत माता का...
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