Wednesday, October 20, 2021

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असम की तर्ज़ पर हाईकोर्ट के रास्ते बिहार में दस्तक देती एनआरसी

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17 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक साथ कई हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे। गौरतलब है कि इसी दिन देश के मजदूर कारखानों में विश्वकर्मा पूजा मना रहे थे। दूसरी ओर देश भर के बेरोज़गार युवा राष्ट्रीय बेरोज़गार दिवस मना रहे थे। जबकि भक्त लोग नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मना रहे थे। यूथ कांग्रेस भी बेरोज़गारी के मुद्दे को लेकर सभी 29 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में प्रदर्शन कर रहे थे। तो एक ओर जहां  #HappyBdayModiji ट्रेंड कर रहा था वहीं दूसरी ओर #राष्ट्रीय_बेरोज़गार_दिवस’ ‘#NationalUnemploymentDay’, ‘#मोदी_रोज़गार_दो’, ‘#अखंड_पनौती_दिवस’ ट्रेंड कर रहा था। इन्हीं सबके बीच एक और हैशटैग #BiharRejectNRC ट्रेंड कर रहा था जिस पर उतना ध्यान नहीं गया।

बिहार सरकार ने जारी किया नोटिस

दरअसल बिहार के गृह विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टर को घुसपैठ की जांच करने को कहा है। इस संदर्भ में बिहार सरकार द्वारा संदिग्ध अवैध विदेशियों की जानकारी देने के लिये नोटिस जारी किया गया है। बिहार सरकार ने ये आदेश 18 अगस्त के पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी किया है जिसमें कोर्ट ने सरकार पर एक डिटेंशन सेंटर के निर्माण पर दबाव डालते हुये राज्य सरकार को उनके द्वारा अवैध विदेशियों के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई के बारे में अवगत कराने के लिए कहा था। साथ ही कोर्ट ने सरकार से राज्य के निवासियों को इस बारे में जागरूक करने की रणनीति बनाने के कहा था और सुझाव दिया था कि इसके लिए डिजिटल और प्रिंट मीडिया का उपयोग किया जाये।

इसी सिलसिले में पहले 29 अगस्त को, भारत के उत्तरी राज्य बिहार के सीवान जिले के पुलिस अधीक्षक द्वारा हस्ताक्षरित एक सार्वजनिक नोटिस सामने आया, जिसमें लोगों से ‘संदिग्ध अवैध प्रवासियों, विशेष रूप से बांग्लादेशियों’ को निकटतम पुलिस स्टेशनों में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया।

सीवान में सार्वजनिक नोटिस के ठीक तीन दिन बाद यानि 01 सितंबर को बिहार के एक अन्य जिले किशनगंज के जिला मजिस्ट्रेट ने जिला जनसंपर्क अधिकारी को एक पत्र जारी कर लोगों को ‘अवैध’ प्रवासियों की रिपोर्ट करने और इस मुद्दे पर जागरूकता पैदा करने के लिए तत्काल एक तंत्र विकसित करने का आदेश दिया। किशनगंज के ज़िलाधिकारी आदित्य प्रकाश की तरफ़ से जारी नोटिस में पटना हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि विभिन्न स्थलों, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास कर रहे अवैध प्रवासी लोगों की पहचान कर स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।

डिटेंशन सेंटर बनाने और अवैध लोगों की शिनाख्त के लिये तंत्र बनाने पर ज़ोर

बिहार में अवैध लोगों की पहचना के लिये एक शिक़ायत तंत्र बनाने, लोगों को मीडिया द्वारा इस बाबत जागरुक करने और राज्य में एक डिटेंशन कैम्प बनाने का आदेश पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एस कुमार ने दिया है।

दरअसल, मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने मरियम खातून की तरफ से दायर याचिका को सुनते हुए बिहार सरकार को यह भी बताने का आदेश दिया कि फॉरेनर्स एक्ट के तहत परिभाषित सक्षम प्राधिकार जो संदिग्ध विदेशी घुसपैठिये की पहचान और पड़ताल करती है वो क्या बिहार में काम कर रही है ? इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि सूबे में लोगों को इस बारे में जागरूक करना ज़रूरी है कि अनाधिकृत रूप से घुसे विदेशी लोगों को पहचान कर उनके डिपोर्ट करने से जुड़े एक क़ानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दें। साथ ही कोर्ट ने लोगों को उक्त प्रक्रिया के बारे में जागरूक करने हेतु एक प्रणाली तैयार करने को कहा जिसमें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल मीडिया के साथ एनजीओ की भी भागीदारी हो।

इस केस पर उनके तमाम आदेशों पर एक नज़र  

18 अगस्त 2021 को पटना हाईकोर्ट ने अपने आदेश में बिहार सरकार को स्थायी डिटेंशन सेंटर के निर्माण के लिए समय, स्थान और योजना समेत कई चीजों की जानकारी मांगी थी। जिसके जवाब में बिहार सरकार ने हलफनामा दायर करके बताया कि राज्य में जेलों या रिमांड होम में करीब 38 अवैध विदेशी रह रहे हैं, इसमें भी अधिकांश नेपाल से हैं। इसके बाद पटना हाईकोर्ट ने सरकार से राज्य के नागरिकों को अवैध रूप से रहने वाले विदेशियों के बारे में जानकारी देने के लिए एक तंत्र विकसित करने के लिए कहा।

31 अगस्त मंगलवार को पटना हाई कोर्ट ने राज्य में अवैध तौर पर घुसे विदेशी मामले में सुनवाई करते हुए बिहार सरकार ने संदिग्ध तौर पर घुसे अवैध विदेशी के मामले में राज्य सरकार से सवाल भी पूछा था। कोर्ट ने सरकार से कहा कि बांग्लादेशियों की पहचान, पड़ताल कर उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखने हेतु स्थाई डिटेंशन सेंटर कब तक बनकर तैयार होगा इसकी समय सीमा बतायें। जिसके जवाब में केंद्र सरकार की तरफ हलफनामा दायर कर कोर्ट को बताया गया कि बिहार में अवैध विदेशियों को रखने के लिए अस्थायी तौर पर पहला डिटेंशन सेंटर हाजीपुर में खोला गया है। कोर्ट ने बिहार सरकार से यह भी पूछा कि स्थाई रूप के डिटेंशन सेंटर कब तक बन जाएंगे।

इससे पहले 5 जुलाई को चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से अब तक की कार्रवाई की ब्यौरा मांगा था। पटना हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा कि बंग्लादेशी महिलाओं को नारी निकेतन में क्यों रखा जा रहा है। उन्हें डिटेंशन सेंटर में क्यों रखा गया है। तब बिहार सरकार ने अपने जवाब में हाईकोर्ट को बताया था कि राज्य में कोई भी डिटेंशन सेंटर नहीं है। जिस पर कोर्ट ने अपनी नाराज़गी जताई है और केंद्र से 26 मई तक जवाब देने को कहा था।

23 जुलाई को बिहार सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि बांग्लादेशी महिलाओं को बेऊर जेल में रखने के लिये अलग व्यवस्था है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि जेल में डिटेंशन सेंटर नहीं बनाया जा सकता है। कोर्ट ने सरकार से अलग से डिटेंशन सेंटर बनाये जाने के बारे में जवाब मांगा था। साथ ही इस बारे में बंग्लादेश के दूतावास की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश जारी देते हुये हाईकोर्ट ने पूछा था कि इन्हें वापस भेजने की क्या प्रक्रिया और व्यवस्था है।

21 मई को हाईकोर्ट ने केंद्रीय विदेश मंत्रालय को भी निर्देश दिया कि बांग्लादेश के दूतावास से संपर्क कर के इनकी वापसी को लेकर जवाब दें।

इससे पहले कोर्ट ने 07 अप्रैल 2021 को बिहार में दो बांग्लादेशी महिला प्रवासियों के मानवाधिकारों के मुद्दे पर चिंता जाहिर करते हुए पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक तीन सदस्यीय अधिवक्ता दल का गठन किया था, ताकि उन स्थितियों के बारे में पता चल सके जिनमें उन्हें आफ्टर केयर होम रखा जा रहा था। दल को एक सप्ताह के भीतर सीलबंद कवर में अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। यह देखते हुए कि राज्य सरकार द्वारा इस मुद्दे के संबंध में कोई हलफनामा दायर नहीं किया गया था, जस्टिस शिवाजी पांडे और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने बिहार राज्य को ऐसे अवैध प्रवासियों के लिए राज्य में होल्डिंग सेंटर या हिरासत केंद्र बनाने के संबंध में एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।

एमिकस क्यूरी के यह कहने पर कि ऐसे व्यक्तियों को लंबे समय तक केयर होम में नहीं रखा जा सकता है और उन्हें केंद्र सरकार के निर्देशानुसार होल्डिंग सेंटर या डिटेंशन सेंटर में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए, कोर्ट ने राज्य सरकार को अवैध प्रवासियों के लिए होल्डिंग केंद्र या डिटेंशन सेंटर के निर्माण के संबंध में हलफनामा दायर करने और केंद्र सरकार दो बंग्लादेशी महिला प्रवासियों को उनके मूल स्थान पर वापस भेजने के लिए बांग्लादेशी दूतावास के साथ उनकी बातचीत की वर्तमान स्थिति का ब्योरा  देगी और दूसरी यह कि किस तरह से अवैध प्रवासियों के मुद्दे को संभाला जा रहा है, जहां मूल देश अपने संबंधित नागरिक को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है के बाबत हलफनामा देने का निर्देश दिया था।

सीजेआई रंजन गोगोई की दिखाई राह पर पटना हाईकोर्ट, नागरिकता संशोधन क़ानून पर नहीं किया विचार

“बिहार के सेकुलर नेताओं को पटना उच्च न्यायालय के उस आदेश से करारा तमाचा लगा है, जिसमें कहा गया है कि राज्य में रह रहे विदेशियों की पहचान कर उन्हें उनके देश वापस भेजें। बता दें कि सेकुलर नेता सदैव यही कहते रहे हैं कि बिहार में एक भी अवैध विदेशी नहीं रहता है।”

उपरोक्त पंक्तियां आरएसएस के मुखपत्र पाञ्चजन्य में 06 सितंबर 2021 को प्रकाशित एक लेख पटना उच्च न्यायालय का आदेश – “घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से निकालो” की हैं। जो यह बताती हैं कि बिहार हाईकोर्ट का यह फैसला आरएसएस-भाजपा ने विभाजनकारी नफ़रती एजेंडे को कितना सूट करती हैं। 

साल भर पहले असम एनआरसी में 40 लाख लोग बेघर हुये थे। जबकी 03 करोड़ जनता को लाइन में लगना पड़ा था। जिसकी पटकथा तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई ने लिखी थी। कुछ उसी तर्ज पर बिहार एनआरसी की पटकथा पटना हाईकोर्ट लिख रहा है।

याचिकाकर्ता मरियम ख़ातून की ओर से पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता उपेंद्र कुमार सिंह ने द वॉयर को एक रिपोर्ट में बताया है कि रिमांड होम में दो बांग्लादेशी महिलाएं थीं, जिनका मामला अदालत ने उठाया था। जबकि अन्य महिलाएं वापस लौटना चाहती थीं, यह महिला यहीं पर रहना चाहती थी। मैंने कोर्ट में यह कहा था लेकिन उनसे कहा गया कि अगर वह हिंदू होती तो यह एक संभावना हो सकती थी लेकिन चूंकि वह मुस्लिम है, इसलिए हमें उसे निर्वासित करना होगा।

आखिर पटना हाईकोर्ट ने मरियम ख़ातून की याचिका के बहाने नागरिकता संशोधन क़ानून-2019 पर विचार क्यों नहीं किया। पटना हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ही 22 जुलाई, 2021 के अदालत के आदेश पर उक्त महिला को बांग्लादेश भेज दिया गया। आदर्श रूप से याचिकाकर्ता के डिपोर्टेशन के बाद याचिका समाप्त हो जानी चाहिए थी। लेकिन बिहार हाईकोर्ट को कुछ और ही ठानकर बैठा है। याचिकाकर्ता के डिपोर्टेशन के बाद भी अदालत ने इस पर सुनवाई जारी राखी। अदालत ने 18 अगस्त, 2021 को अपने आदेश में बिहार सरकार से एक स्थायी निरोध केंद्र (डिटेंशन सेंटर) के निर्माण के लिए समय, स्थान और योजना सहित कई चीजों के बारे में पूछा। अदालत ने माना कि राज्य में एक डिटेंशन सेंटर की ज़रूरत है। सरकार से ‘अवैध विदेशियों’ के बारे में जनता को जागरूक करने की रणनीति, डिजिटल और प्रिंट मीडिया के उपयोग का सुझाव देने की बात भी अदालत की तरफ से की गयी है।

कहां से शुरु हुआ मामला

दरअसल याचिका के अनुसार, मरियम खातून, मौसमी ख़ातून और एक अन्य महिला को 6 अक्टूबर, 2015 को मानव तस्करों द्वारा भारत लाया गया और 10 अक्टूबर 2015 को उन्हें पटना रेलवे स्टेशन से रेलवे पुलिस (जीआरपी) द्वारा गिरफ्तार किया गया था और पटना स्थित रिमांड होम भेज दिया गया था। क़रीब 05 साल बाद, पटना के एक वकील उपेंद्र कुमार सिंह इत्तफाक से कुछ महिलाओं के प्रतिनिधित्व करते हुये एक दिन एक केस के लिए वकालतनामा साइन करवाने रिमांड होम चले गये। तभी वहां के एक कर्मचारी ने उन्हें बांग्लादेश की इन महिलाओं के बारे में बताया और उसे उन महिलाओं की मदद करने का अनुरोध किया।

इसके बाद उपेंद्र कुमार सिंह ने पटना हाईकोर्ट में एक अक्टूबर 2020 में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करके कहा कि – “महिलायें पांच साल से रिमांड होम में फंसी हैं। उन दो महिलाओं को अवैध रूप से वहां रखा गया था। जबकि उनके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक आरोप नहीं लगाया गया था और न ही उनका कोई आपराधिक इतिहास था। अगर वे यहां अवैध रूप से हैं, तो उन पर फॉरेनर्स एक्ट के तहत मुक़दमा चलाया जाना चाहिए था, जो कि नहीं हुआ।

राजनीतिक दलों के बयान

AIMIM अध्यक्ष व सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बिहार सरकार चोर दरवाज़े से एनआरसी लागू कर रही है। 07 सितंबर को ट्वीट करके ओवैसी ने कहा कि अधिकारी आम लोगों से कह रहे हैं कि वो आस-पास रहने वाले ‘विदेशी नागरिक’ और ‘अवैध प्रवासियों’ की सूचना नज़दीकी पुलिस स्टेशन को दें। असम में भी ऐसे ही क़ानूनी कार्रवाई का दुरूपयोग बड़े पैमाने पर हुआ है।

एक दूसरे ट्वीट में ओवैसी ने कहा कि कई बा-इज़्ज़त भारतीयों पर झूठे मुक़दमे दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे लोगों को बहुत ही ज़्यादा मुश्किलात का सामना करना पड़ा है। संघ परिवार के लोग कई सालों से इस झूठ को फैला रहे हैं कि सीमांचल के ग़य्यूर अवाम घुसपैठिए हैं, इस बात में ज़रा भी सच्चाई नहीं है।

वहीं कल तक बिहार में एनआरसी नहीं लागू करने का दम भरने वाली सत्ताधारी जनता दल यूनाईटेड (JDU) के नेता अजय आलोक ने ओवैसी के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि विदेशी नागरिक और अवैध प्रवासी आपके लिए भाई-बहन होंगे साहब, बिहार सरकार के लिए नहीं। अगर इनके बारे में सूचित करने को आप एनआरसी लागू करना कहते हैं तो पूरा देश और देशवासी यही काम कर रहे हैं।”

प्रदेश के भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री व भाजपा नेता रामसूरत राय ने 17 सितंबर को कहा है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर घुसपैठ हो रही है। अवैध तरीके से लोग गलत पहचान पत्र बनाकर ज़मीन की ख़रीद-फ़रोख्त कर रहे हैं। यहां तक कि मंदिर और मठों की जमीन पर अवैध तरीके से घुसपैठिए क़ब्ज़ा कर रहे हैं।

वहीं JDU ने मंत्री रामसूरत राय के आरोप को बेबुनियाद करार देते हुये किशनंगज में BJP नेताओं पर ही ज़मीन क़ब्ज़ाने का आरोप लगाते हुये कहा कि ‘घुसपैठ की बात करने की जगह अगर मंत्री उसका सबूत पेश करें तो ज्यादा बेहतर होगा।

बिहार कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी का कहना है कि अवैध घुसपैठियों की पहचान तो की ही जानी चाहिए और यह भी जानने की कोशिश करनी चाहिए कि वो किन परिस्थितियों में अपना देश छोड़कर भारत आए और उनका मकसद क्या है। लेकिन यह काम बहुत ही पारदर्शी तरीके से करना होगा। क्योंकि बिहार में भूमिहीनों की आबादी बहुत बड़ी है और बहुत ही आसानी से इन भूमिहीनों को घुसपैठिया बताकर इनका शोषण किया जा सकता है। इसलिए सरकार को यह बताना चाहिए कि वह किस आधार पर किसी को घुसपैठिया घोषित करेगी।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा है कि जिनके पास ज़मीन के दस्तावेज़ नहीं हैं उनकी भी कई पीढ़ियों ने इसी मिट्टी पर जन्म लिया है और इसी मिट्टी में मिले हैं‌। और आधार कार्ड से ले कर वोटर कार्ड तक, कोई भी ऐसा राष्ट्रीय दस्तावेज नहीं है, सिवाय ज़मीन दस्तावेज़ के, जिससे किसी व्यक्ति की स्थायी भारतीय नागरिकता साबित की जा सके। तो क्या किसी अवैध प्रवासी की पहचान किसी नागरिक की महज पहचान या फोन कॉल के आधार पर की जाएगी ? बिहार कांग्रेस प्रवक्ता आगे कहते हैं, “इसके लिए एक साफ – सुथरी व्यवस्था बने और उस साफ -सुथरी व्यवस्था के तहत घुसपैठियों की पहचान की जाए। इसमें कोई जल्दबाजी न हो। हड़बड़ी में किसी को डिटेंशन सेंटर में न डाला जाए। पहचान के नाम पर लोगों का शोषण ना हो। अदालती आदेश की आड़ में सरकार संघ का एजेंडा न लागू करे। गुपचुप तरीके से एनआरसी पर अमल न किया जाए।

अकेले दम बिहार की सत्ता में आने के लिये ज़रूरी है नफ़रत और सांप्रदायिक विभाजन 

गौरतलब है कि भाजपा अभी तक बिहार में अकेले दम पर सत्ता में नहीं आ पायी है। उसे बिहार की सत्ता में बने रहने के लिये कभी नीतीश कुमार को ब्लैकमेल करना पड़ा है तो कभी गठबंधन करके चुनाव लड़ना पड़ा है। भाजपा बिहार के सीमांचल क्षेत्र में सबसे ज़्यादा कमजोर रही है। चूंकि, यह इलाका पश्चिम बंगाल से लगा हुआ है, अतः आरएसएस भाजपा के लिए यहां बांग्लादेश घुसपैठियों का मुद्दा उठाकर सांप्रदायिक विभाजन पैदा करना आसान और मुफीद है। गौरतलब है कि सीमांचल क्षेत्र में राजद, कांग्रेस और अब AIMIM का क़ब्ज़ा है। दरअसल बिहार का सीमांचल क्षेत्र मुस्लिम बहुलता वाला क्षेत्र है। किशनगंज जिले में मुस्लिम आबादी 70%, पूर्णिया जिला में 38%, कटिहार जिला में 43% और अररिया जिला में 42% मुस्लिम आबादी है। यही कारण है कि आरएसएस और भाजपा लगातार बिहार के सीमांचल इलाक़े के किशनगंज, कटिहार, अररिया आदि ज़िलों सहित कई अन्य जगहों पर बड़ी संख्या में अवैध निवासियों के प्रवास करने की फर्जी ख़बरे लगातार फैलाते चले आ रहे हैं।

बता दें कि अभी हाल ही में संसद सत्र में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद के निचले सदन को बताया था कि जो विदेशी नागरिक वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना देश में प्रवेश करते हैं, उन्हें अवैध प्रवासी माना जाता है। साथ ही मंत्री ने कहा था कि देश में रहने वाले ऐसे प्रवासियों की संख्या के बारे में सटीक आंकड़े सरकार के पास केंद्रीय रूप से उपलब्ध नहीं है। केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अवैध प्रवासियों की त्वरित पहचान के लिए उचित कदम उठाने के लिए कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को संवेदनशील बनाने के निर्देश जारी किए हैं। केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कानून के प्रावधानों के मुताबिक जानकारी जुटाने, अवैध प्रवासियों के जीवनी और बायोमेट्रिक विवरण जमा करने, नकली भारतीय दस्तावेजों को रद्द करने और कानून के प्रावधानों के अनुसार निर्वासन का कार्रवाई शुरू करने को कहा है। राय ने सदन में यह भी बताया था कि 30 मार्च, 2021 को ओवरस्टे और विदेशी नागरिकों के अवैध प्रवास के मुद्दे से निपटने के लिए समेकित निर्देश भी जारी किए गए हैं।

(जनचौक के विशेष संवादाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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