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नॉर्थ ईस्ट डायरी: असम सरकार की वेबसाइट की एक हरकत से दहशत में जी रहा है एक दंगा पीड़ित परिवार

गुवाहाटी। असम सरकार की वेबसाइट पर ‘विदेशियों’ के रूप में चित्रित एक परिवार की तस्वीर ने कुछ वर्ग के लोगों के बीच विवाद पैदा कर दिया है और वेबसाइट पर प्रदर्शित परिवार के सदस्यों में डर पैदा हो गया है। असम सरकार के गृह और राजनीतिक विभाग की वेबसाइट पर ‘विदेशी और न्यायाधिकरण’ शीर्षक पेज पर सामान के साथ चल रहे एक परिवार की तस्वीर प्रदर्शित की गई है। मूल तस्वीर पर कांटेदार तार का चित्रण संपादित किया गया है।

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, तस्वीर में दिख रहे लोग इब्राहिम अली के परिवार के सदस्य हैं। कथित तौर पर तस्वीर बोडोलैंड टेरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्ट्स में 2012 में स्थानीय बोडो और बंगाली भाषी मुसलमानों के बीच दंगे के फैलने से कुछ दिन पहले चिरांग जिले में एक फोटो पत्रकार अब्दुल मालेक अहमद द्वारा ली गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि फोटोग्राफर ने तस्वीर तब क्लिक की जब लोगों का एक समूह सुरक्षा के लिए एक तरफ जलते हुए गांव से निकलकर आधे-अधूरे हाग्रामा पुल के दूसरी तरफ भाग रहा था। अहमद ने उस समय असमिया दैनिक के लिए तस्वीर ली थी जिसके लिए वह काम कर रहे थे और तस्वीर को रिपोर्ट में बताए गए अनुसार इसके पहले पन्ने पर प्रकाशित किया गया था।

2012 के दंगों से संबंधित खबरों के लिए तस्वीर को अगले कुछ महीनों में व्यापक रूप से प्रसारित किया गया था। हालाँकि अहमद, जो अब एक स्थानीय समाचार चैनल में काम करते हैं, इस बात के लिए तैयार नहीं थे कि हाल ही में यह तस्वीर नए रूप में सामने आ सकती है। पिछले महीने उन्होंने असम सरकार के गृह राजनीतिक विभाग की वेबसाइट पर ‘विदेशी’ ट्रिब्यूनल (एफटी)’ के बारे में एक पृष्ठ पर एक कांटेदार तार के चित्रण के साथ तस्वीर देखी। तस्वीर के बारे में 39 वर्षीय अली ने कहा कि फोटो में उनकी मां और भाई-बहन हैं। तस्वीर के उपयोग से हैरान अली ने कहा कि इसने उन्हें दंगों के उस काले समय की याद दिला दी।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इस तरह के प्रतिनिधित्व से लोगों को यह विश्वास हो सकता है कि वे ‘विदेशी’ हैं। “अगर लोग वेबसाइट पर जाते हैं और फोटो देखते हैं .. क्या वे ऐसा नहीं सोचेंगे कि हम विदेशी हैं? लेकिन हमारे सभी कागजात क्रम में हैं, एनआरसी में भी हमारे नाम हैं, ”इब्राहिम कहते हैं। कथित तौर पर ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन ने असम के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तस्वीर हटाने की मांग की है। “…असम सरकार द्वारा वास्तविक भारतीय नागरिकों को विदेशियों के रूप में चित्रित करना अपमानजनक, असंवैधानिक, अवैध है …”, एएमएसयू ने पत्र में कहा। यह तस्वीर अभी तक सरकारी वेबसाइट से नहीं हटाई गई है।

एएमएसयू के अध्यक्ष रिजाऊल करीम सरकार ने कहा कि जब लोग “दाढ़ी, टोपी, लुंगी” देखते हैं, तो वे तुरंत बांग्लादेश के बारे में सोचते हैं। वे वास्तव में विदेशी हैं या नहीं, इसकी जांच करने के लिए तथ्यों की जांच करने की जहमत नहीं उठाते।” सरकार ने दावा किया कि तस्वीर तब भी सामने आती है जब कोई असम में ‘विदेशी मुद्दे’ पर किसी लेख की खोज करता है। “जबकि वास्तव में परिवार विस्थापित दंगा पीड़ित है जिनके पास 1951 के दस्तावेज हैं।”

(दिनकर कुमार द सेंटिनेल के पूर्व संपादक हैं।)

This post was last modified on July 12, 2021 1:51 pm

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