Sunday, October 24, 2021

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परमबीर सिंह की अर्जी नामंजूर, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-आरोप गंभीर, पहले हाईकोर्ट जाएं

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उच्चतम न्यायालय ने आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह से बाम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करने को कहा है। सिंह ने महाराष्‍ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर पुलिस के जरिए ‘मनी कलेक्‍शन स्‍कीम’ चलाने के आरोप लगाए हैं। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है, आप हाई कोर्ट में याचिका लगाएं। इसके बाद सिंह ने उच्चतम न्यायालय  से याचिका वापस ले ली और कहा कि वे हाईकोर्ट जाएंगे। इसके पहले बाम्बे हाईकोर्ट में अधिवक्ता डॉ. जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करके परमबीर सिंह की भूमिका और महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के प्रकाश में सीबीआई, ईडी या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की मांग की है।

उच्चतम न्यायालय ने आदेश में कहा कि हमे संदेह नहीं कि यह मामला बेहद गंभीर है। हाईकोर्ट जाने की छूट दी जाती है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के अनुसार वे आज ही हाईकोर्ट में याचिका लगाएंगे और चाहेंगे कि मामला कल सुना जाए। इस बारे में हाईकोर्ट से ही गुजारिश करनी होगी।

जस्टिस कौल ने कहा कि याचिकाकर्ता कुछ आरोप लगा रहे हैं और मंत्री भी कुछ आरोप लगा रहे हैं। मुझे नहीं समझ आता कि आपको हाईकोर्ट क्‍यों नहीं जाना चाहिए। हम मानते हैं कि मामला गंभीर है लेकिन आर्टिकल 226 की शक्तियां काफी विस्‍तृत हैं। सिंह के वकील मुकुल रोहतगी अदालत से दरख्‍वास्‍त करते हैं कि हाईकोर्ट को कल मामले पर सुनवाई करने का निर्देश दिया जाए क्‍योंकि सीसीटीवी सबूत शामिल हैं।

रोहतगी ने आर्टिकल 32 के तहत याचिका दायर करने पर तर्क देते हुए कहा कि यह देश के लिए जनहित का गंभीर मुद्दा है। एक पुलिस अधिकारी को प्रशासनिक आधार पर ट्रांसफर किया गया लेकिन गृहमंत्री ने खुद टीवी पर कहा कि यह एक प्रशासनिक ट्रांसफर नहीं था। कोर्ट ने इससे कम अहम मुद्दों पर आर्टिकल 32 की याचिकाओं को सुना है। रोहतगी ने कहा पूरा राज्‍य हिल गया है। पुलिस सुधार नहीं हुए हैं।

इस पर जस्टिस कौल ने कहा कि यह तो केवल इसी राज्‍य की बात नहीं है। उत्‍तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्‍य प्रदेश हर जगह यही हाल है। मुझे लगता है कि गंभीर मामला है लेकिन हाईकोर्ट इसे देख सकती है। जस्टिस एसके कौल ने पूछा कि याचिका आर्टिकल 32 के तहत क्‍यों डाली गई, 226 क्‍यों नहीं? दूसरा जिस व्‍यक्ति के खिलाफ याचिका है, उसे पार्टी तक नहीं बनाया गया है। इसपर रोहतगी ने कहा कि उन्‍हें (देशमुख) पार्टी के तौर पर जोड़ने की याचिका दाखिल कर चुके हैं।

परमवीर सिंह को मशहूर कारोबारी मुकेश अंबानी के घर के पास विस्‍फोटक सामग्री मिलने और पुलिस अधिकारी सचिन वझे की गिरफ्तारी के बाद मुंबई पुलिस कमिश्‍नर के पद से हटा दिया गया था। उन्‍होंने अपनी याचिका में होमगार्ड डीजी के पद पर ट्रांसफर किए जाने को भी चुनौती दी है।

परमवीर सिंह ने दावा किया है कि सांसद मोहन डेलकर की आत्महत्या में अनिल देशमुख की तरफ से भाजपा के कुछ नेताओं की भूमिका की जांच करने और किसी तरह उन्हें फंसाने के लिए दबाव डाला गया। गृहमंत्री देशमुख ने उन्हें पुलिस में पोस्टिंग या तबादलों में भ्रष्टाचार सहित विभिन्न तरीकों से हर महीने 100 करोड़ रुपये जमा करने का लक्ष्य दिया था। पिछले साल अगस्त में रश्मि शुक्ला (तत्‍कालीन कमिश्नर इंटेलिजेंस, स्टेट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट) ने टेलिफोनिक इंटरसेप्शन से देशमुख के पोस्टिंग या ट्रांसफर में कथित भ्रष्‍टाचार के बारे में जानकारी निकाली। वह इसे तत्कालीन पुलिस महानिदेशक के ध्यान में लाई, जिन्‍होंने इस बारे में अतिरिक्त गृह मुख्य सचिव को बताया। देशमुख के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाय शुक्ला को बाहर कर दिया गया। मार्च के बीच में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं को गृहमंत्री की हरकतों के बारे में बताया था। 20 मार्च को मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया।

परमबीर सिंह ने अनिल देशमुख के कथित भ्रष्टाचार मामले की सीबीआई से तत्काल निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की थी । उन्होंने कहा कि सबूत नष्ट होने से तुरंत पहले तत्काल सीबीआई जांच करवानी चाहिए। सिंह ने देशमुख के आवास के सीसीटीवी फुटेज को तुरंत कब्जे में लेने का निर्देश देने की अपील की थी। सिंह ने अपने तबादले के आदेश को भी रद्द करने की गुहार लगाई थी । गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ जितने सनसनीखेज और गंभीर आरोप लगे हैं, उससे महाराष्‍ट्र में राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ है।

मुंबई के वकील, डॉ. जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख और मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ दुर्भावना के आरोपों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि देशमुख गृहमंत्री के पद को संभालने के लिए भरोसेमंद नहीं हैं, क्योंकि यह सामने आया है कि यह दिखाते हुए कि वह अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे थे और अधिकारियों को आम नागरिकों और व्यवसायी व्यक्तियों से धन निकालने का निर्देश दे रहे थे।

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