कॉरपोरेट का अरबों रुपये माफ और गरीब महिलाओं को पसंगा नहीं! ये कैसा इंसाफ: ऐपवा

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इलाहाबाद में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। महिलाओं ने समूह द्वारा लिए गए कर्ज की वसूली बंद करने और माफ करने की मांग की। कोरांव फूलपुर शहर उत्तरी शहर दक्षिणी और जिले की अन्य जगहों की महिलाओं ने में प्रदर्शन हिस्सा लिया।

ऐपवा नेताओं ने कहा कि कोरोना वायरस संकट की वजह से लॉकडाउन हुआ है। सभी कामकाज बंद हैं। स्वयं सहायता चलाने वाली महिलाओं द्वारा लगातार कर्ज माफ़ी के सवाल को कई महीनों से उठाया जाता रहा है। महिलाओं के आंदोलन के बाद कुछ जगहों पर ये पीछे हटे हैं, लेकिन कई जगहों पर अभी भी महिलाओं को धमकाकर जबरन वसूली कर रहे हैं। एक जगह तो असमर्थता जताने पर कहा गया कि शरीर बेचकर पैसा जमा करो! कहीं कोई महिला अगर किस्त जमा करने की स्थिति में नहीं है तो उसके घर का सामान उठाकर ले जा रहे हैं।

लॉकडाउन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। छोटे रोजगार काम-धंधे बंद हैं। लॉकडाउन से पहले महिलाओं ने जो भी कर्ज लिए हैं, वह शौक से नहीं, मजबूरी में लिए हैं। आज जबकि भोजन का इंतजाम कठिन है, तब लोन की किस्त कहां से जमा करें? इसलिए हमारी मांग है कि  महिलाओं से कर्ज वसूली बंद की जाए।

जब पूजीपति अरबों रुपयों का कर्ज नहीं चुकाते हैं तो हमारी सरकार देश के खजाने से (जिसे जनता टैक्स भरती है) उनका कर्ज चुकाती है और महिलाएं जो कि  पहले हमेशा अपना कर्ज चुकाती रही हैं उन्हें इस संकट के समय में भी सरकार मदद नहीं कर रही है।

ऐपवा नेताओं ने कहा कि आज कोरोना संक्रमण तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोग भयभीत और निराश हैं, लेकिन फाइनेंसर कंपनियां नागरिकों की चिंता के बजाय अपने कर्जे की वसूली में लगी हुई हैं।

ऐपवा नेताओं ने इस वसूली को पर रोक लगाकर शीघ्र निम्न मांगों को पूरा करने को कहा…
1- स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सभी महिलाओं के सामूहिक कर्ज माफ किया जाए।
2- एक लाख रुपये तक का निजी कर्ज चाहे वो सरकारी, माइक्रोफाइनेंस संस्थानों अथवा निजी बैंकों से लिए गए हों, का लॉकडाउन के दौर की सभी किस्त माफ किया जाए।
3- सभी छोटे कर्जों की वसूली पर 31 मार्च 2021 तक रोक लगाई जाए।

4- स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार और उनके उत्पादों की खरीद सुनिश्चित की जाए।
5- एक लाख रुपये तक के कर्ज को ब्याज मुक्त बनाया जाए।
6- शिक्षा लोन को ब्याज मुक्त किया जाए।
7- सामूहिक कर्ज के नियमन के लिए राज्य स्तर पर एक अथॉरिटी बनाई जाए।
8- स्वरोजगार के लिए दस लाख रुपये तक के कर्ज की दर 0.4% हो।
9- जिस छोटे कर्ज का ब्याज मूलधन के बराबर या उससे अधिक दे दिया गया हो उस कर्ज को समाप्त किया जाए।

महिलाओं ने जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शन में ऐपवा संयोजक रूपा, मंजू गौतम, शिवानी, बबली, रितेश कुमार, बबली, जनक लली, वसंत कुंज, सोनी गुप्ता, बबलू गुप्ता, उषा देवी, वैजयंती, सोनी, उर्मिला, मुन्नी, चांदी सरस्वती, शारदा, गीता, जसवंत, रेशमा गुड्डी, रेशमा परवीन और महताब आदि शामिल हुए।

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