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बेलारूस में कई लाख नागरिक सड़कों पर, पुनर्मतदान और राष्ट्रपति के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी

बेलारूस की राजधानी मिंस्क में 16 अगस्त को रविवार की शाम देश में राष्ट्रपति लुकासेंका के इस्तीफे और स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान कराए जाने की मांग को लेकर तीन लाख के करीब नागरिक सड़कों पर उतर आए हैं। आंदोलनकारियों की कुल संख्या शहर की कुल आबादी की 15 प्रतिशत है।

जर्मनी की दीवार गिरने के बाद से यूरोप ने इतना विशाल जनांदोलन पहली बार देखा है, जब लाखों लोग एक साथ सड़क पर उतरे हैं।

सरकारी कारखानों के कामगार भी विरोध प्रदर्शन में उतर आए हैं।

राष्ट्रपति लुकाशेंको की काउंटर रैली
ये सत्ताधारी तानाशाहों द्वारा एक तरह से नया रणनीतिक फैशन बना दिया गया है, किसी जनांदोलन के खिलाफ़ सत्तापक्ष द्वारा काउंटर-प्रोटेस्ट प्रयोजित करवाना। एनआरसी-सीएए मुद्दे पर पहले भारत में नरेंद्र मोदी सरकार ने और फिर ब्राजील में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जनांदोलन के विरोध में राष्ट्रपति बोल्सोनारो अपने समर्थकों का एक काउंटर-प्रोटेस्ट आयोजित करवा चुके हैं।

ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने सत्ता पक्ष द्वारा आयोजित करवाए जाने वाले काउंटर प्रोटेस्ट को असवैंधानिक और अलोकतांत्रिक कहा था। राष्ट्रपति द्वारा सेंट्रल मिंस्क में अपने पक्ष में आयोजित काउंटर रैली में तुलनात्मक रूप से बहुत कम करीब 5000 लोग ही जुटे।

बेलारूस के राष्ट्रपति ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मांगी मदद
बेलारूस के राष्ट्रपति एलेंक्जेंडर लुकाशेंको ने रविवार को प्रस्तावित जनांदोलन से एक दिन पहले लंबे समय के सहयोगी रशिया से अपनी सत्ता को बचाने में मदद मांगी है। विवादित चुनाव परिणाम के बाद से लगातार उनके खिलाफ देश और वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे विरोध के बीच राष्ट्रपति लुकाशेंको पर इस्तीफा देने का जनदबाव बढ़ रहा है।

बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने कहा कि उन्होंने शनिवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात करके अपने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सहायता प्रदान करने के सिलसिले में बात की है। उन्हें रूसी राष्ट्रपति की ओर से प्रतिबद्धतापूर्ण आश्वासन मिला है।

विपक्षी उम्मीदवार स्विअतलाना ने पड़ोसी मुल्क में ली शरण
9 अगस्त को चुनावी नतीजे आने के बाद 11 अगस्त को विपक्ष की राष्ट्रपति उम्मीदवार स्विअतलाना त्सिकौंसकाया (Sviatlana Tsikhanouskaya) अपनी सुरक्षा के मद्देनज़र मंगलवार को पड़ोसी देश लिथुआनिया चली गई हैं। उन्हें भय था कि उन्हें भी उनके पति की तरह जेल में डाला जा सकता है।

बता दें कि विवादित मतदान नतीजों के बाद से ही स्विअतलाना की मांग है कि मतों की पुनर्गणना कराई जाए और सत्ता हस्तांतरण की सुविधा के लिए एक राष्ट्रीय परिषद का गठन किया जाए।

11 सितंबर 1982 में जन्मी स्विअतलाना एक बेलारूसी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं और मुख्य विपक्षी उम्मीदवार के तौर पर उन्होंने 2020 के बेलारूस के राष्ट्रपति चुनाव के लिए वर्तमान राष्ट्रपति लुकाशेंको के खिलाफ़ चुनाव में खड़ी हुई थीं।

वे एक्टिविस्ट सियारही त्सिकानुस्की (Siarhei Tsikhanouski) की जीवनसंगिनी हैं। दरअसल उनके जीवनसाथी लुकाशेंको के खिलाफ विपक्षी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में खड़े थे, लेकिन उनके पति को 29 मई 2020 को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया इसके बाद उनके स्थान पर खुद चुनाव लड़ने के लिए स्विअतलाना ने घोषणा की। आरोप है कि राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको को आधिकारिक तौर पर व्यापक चुनावी धोखाधड़ी करके खुद को चुनाव में विजेता घोषित करवा लिया, जबकि त्सिकानुसकाया ने 60 प्रतिशत मतों के साथ राष्ट्रपति चुनाव जीतने का दावा करते हुए तमाम अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से उन्हें विजेता के रूप में मान्यता देने की अपील की। ​​

राष्ट्रपति के अभियान से पहले, बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने जोर देकर कहा कि ये देश एक महिला राष्ट्रपति के लिए तैयार नहीं है। स्विअतलाना के कैंपेन को ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ के तौर पर लिया गया, जिसमें बेलारूस की महिला विपक्षी कार्यकर्ताओं के भेदभावपूर्ण व्यवहार की निंदा की गई थी। स्वेतलाना ने बताया कि उन्हें चुनावी कैंपेन के दौरान यौन हिंसा की धमकी दी गई और उनके बच्चे को उनसे दूर करके राज्य संचालित अनाथालय में भेजने की भी धमकी दी गई।

कैंपेन के दौरान ही इन धमकियों और खतरों के जवाब में, तिखनसोस्काया ने अपने बच्चों को अपनी दादी के साथ रहने के लिए विदेश भेज दिया। कैंपेन के दौरान ही उन्होंने कहा था कि कि उन्हें बार-बार धमकी दी जा रही है। एक फोन कॉल ने उन्हें धमकाते हुए कहा, “हम आपको सलाखों के पीछे डाल देंगे और आपके बच्चों को एक अनाथालय में भेज देंगे। त्सिकानुसकाया ने कहा कि उन्होंने फिर भी अपनी कैंपेन को जारी रखने का फैसला किया, अब उनकी कैंपेन को “स्वतंत्रता के प्रतीक के तौर पर होना चाहिए।”

और फिर उन्होंने अपने चुनावी कैंपेन में बेलारूस के सभी क़ैदियों की रिहाई, रूस के यूनियन ट्रीटी से बेलारूस को अलग करने, लोकतंत्र की स्थापना के लिए चुनावी सुधार करने और भविष्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने जैसे मुद्दों को अपना राजनीतिक उद्देश्य बताया था।

बेलारूस के पश्चिमी सीमा में नाटो द्वारा मिलिट्री हस्तक्षेप का आरोप
रैली में एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने आरोप लगाते हुए कहा, “नाटो (NATO) बेलारूस के पश्चिमी सीमा पर मिलिट्री टैंक और लड़ाकू विमान तैनात कर रहा है। लाखों की संख्या में जुटे विरोध प्रदर्शन की रैली की तुलना में राष्ट्रपति द्वारा अपने पक्ष में आयोजित रैली में बहुत कम करीब 5000 लोग ही जुटे।

अपने समर्थकों की काउंटर रैली को संबोधित करते हुए लुकाशेंको ने पुनर्मतदान की मांग को खारिज करते हुए कहा कि बेलारूस के नागरिक अपने देश की रक्षा करें।

उन्होंने कहा, “मैंने आपको यहां मेरा बचाव करने के लिए नहीं बुलाया है, बल्कि अपने शासन के 26 सालों में पहली बार अपने देश और उसकी स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए बुलाया है।”

लुकाशेंको जो कि पिछले 26 सालों से बेलारूस की सत्ता में हैं ने चुनावी धांधली के आरोप को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि बेलारूस में वर्तमान अशांति के पीछे पूरी तरह से विदेशी हस्तक्षेप है।

लुकाशेंको ने समर्थकों को संबोधित करते हुए आगे कहा, “मिलिट्री ताकतों का पश्चिमी सीमा पर जमावड़ा हो रहा है। लिथुआनिया, पोलैंड, यूक्रेन हमें पुनर्चुनाव कराने का हुक्म दे रहे हैं। यदि हम उनकी सुनेंगे तो तबाह हो जाएंगे। अगर हम उनके सामने झुकेंगे तो हम उनके मकड़जाल में फंस जाएंगे और हम एक राज्य के रूप में, एक व्यक्ति के रूप में, एक राष्ट्र के रूप में तबाह हो जाएंगे।”

उसी मंच से एक वक्ता ने कहा, “मातृभूमि खतरे में है!” और फिर प्रतिक्रिया में लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए कहा, “हम एकजुट हैं।”

नाटो ने राष्ट्रपति लुकाशेंको के आरोप को नकारा
सीएनएन को दिए अपने बयान में नाटो की एक महिला प्रवक्ता ने कहा, “हम बेलारूस के हालात पर नज़र रख रहे हैं, लेकिन उस क्षेत्र में नाटो का कोई बिल्डअप नहीं है। एलायंस के पूर्वी हिस्से में नाटो की बहुराष्ट्रीय उपस्थिति किसी भी देश के लिए खतरा नहीं है। यह पूरी तरह से रक्षात्मक है, तथा आनुपातिक और संघर्ष को रोकने और शांति बनाए रखने के लिए बनाया गया है।”

नाटो की महिला प्रवक्ता ओना लुंगेसू (Oana Lungescu) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा “हम हालात पर नजदीकी नज़र बनाए हुए हैं और लुकाशेंको सरकार को ‘मौलिक आजादी’ का सम्मान करना चाहिए, जैसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार।”

आंदोलनकारियों के प्रति पुलिसिया बर्बरता
9 अगस्त को आए विवादित चुनाव परिणाम के बाद से बेलारूस की जनता लगातार सड़कों पर है। इस बीच बेलारूस की पुलिस का प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ बर्बरतापूर्वक दमन करते देखा गया।

पुलिस कार्रवाई में मारे गए प्रदर्शनकारी के लिए पुश्किन चौराहे पर भी प्रदर्शन किया गया।

इस हफ्ते की शुरुआत में राजधानी मिन्स्क में दंगा गियर में सज्जल बेलारूस के कुछ सुरक्षाकर्मियों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों से गले मिलते हुए अपने हथियार नीचे रख दिए थे। सप्ताहांत में, स्लोवाकिया में बेलारूसी राजदूत ने भी विपक्षी प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता व्यक्त की, उन्होंने कहा कि वह उन रिपोर्टों से हैरान हैं, जिनमें नागरिकों को पीटा गया है और प्रताड़ित किया गया है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on August 19, 2020 1:13 am

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