Subscribe for notification

वेस्टलैंड ट्रेड कंपनी घोटाले में गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, सीबीआई, ईडी को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

वेस्टलैंड ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड की ओर से की गई कथित धोखाधड़ी की जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन, प्रवर्तन निदेशालय और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस एसएफआईओ) और अन्य को नोटिस जारी किया है। इस केस में याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस मामले में अभी तक किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि वेस्टलैंड ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड ने हाइपर सुपरमार्केट जैसी कई फर्जी कंपनियां बनाई हैं और कई तरीकों से लोगों को धोखा दिया है।

चीफ जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एएस बोपन्ना व जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, सीबीआई, ईडी, एसएफआईओ, पुलिस आयुक्त दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा को नोटिस जारी किया है। इसमें वेस्टलैंड ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और लाभार्थियों पर मनी लॉन्ड्रिंग और काले धन की जमाखोरी का आरोप है। याचिकाकर्ताओं के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण उपस्थित हुए और प्रस्तुत किया कि शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। नोएडा में केवल एक एफआईआर दर्ज की गई। यह मुद्दा राष्ट्रीय प्रकृति का है।

गोपाल शंकरनारायण ने कहा की न तो राज्य और न ही केंद्रीय एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं। याचिकाकर्ताओं ने मामले की जांच सीबीआई, ईडी और एसएफआईओ या एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा कराने की मांग की थी, जिसमें वेस्टलैंड ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और लाभार्थियों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग और काले धन की जमाखोरी शामिल थी।

वकील गोपाल शंकरनारायण, अश्विनी कुमार उपाध्याय, अश्विनी कुमार दुबे और अन्य द्वारा पेश किए गए लगभग 38 याचिकाकर्ताओं के एक समूह द्वारा सितम्बर में दायर की गई याचिका में दावा किया गया है कि वेस्टलैंड ट्रेड लिमिटेड द्वारा उन्हें धोखा दिया गया। याचिका में कहा गया है कि कंपनी ने कई राज्यों में अपने फ्रेंचाइजी स्टोर चलाने के लिए पैसे लिए और लगभग 500 निवेशकों को धोखा दिया। 38 व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि वेस्टलैंड ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड ने उन्हें धोखा दिया है, जिसने हाइपर सुपर मार्केट, हाइपर मार्ट आदि के नाम से कंपनियां बनाई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने तीन लाख रुपये की फ्रेंचाइज फीस एकत्र की और कुछ भुगतान का आश्वासन दिया। हालांकि, कंपनी ने लॉकडाउन के दौरान भुगतान नहीं किया।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने बेईमानी कर उन्हें उनकी गाढ़ी कमाई देने के लिए प्रेरित किया। गौरतलब है कि ‘फ्रेंचाइजी धोखाधड़ी’ के सिलसिले में उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। दरअसल, दर्जनों लोगों से कथित तौर पर 30 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी।

याचिका में कहा गया है कि आरओसी और बैंक स्टाफ के साथ मिलीभगत करके कंपनी के निदेशकों ने कई फर्जी और घोस्ट कंपनियों और ब्रांडों जैसे हाइपर सुपरमार्केट, हाइपर मार्ट, बिग मार्ट, सुपर मार्ट, लॉआईज सैलून, मिडनाइट कैफे, फ्रेंचाइजी वर्ल्ड, बीएम मार्ट, एच मार्ट और एस मार्ट आदि को पंजीकृत किया। ऐसा करते हुए, घोस्ट कंपनियों ने खुदरा क्षेत्र में कारोबार शुरू करने के लिए व्यक्तियों की मदद करने का दावा किया, लेकिन अनुबंध का उल्लंघन करते हुए याचिकाकर्ताओं की गाढ़ी कमाई को काले धन और बेनामी संपत्तियों में बेईमानी से दुवियोजित और परिवर्तित कर दिया।

याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 19 और 21 के तहत जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा और व्यापार की गारंटी के अधिकार का हनन भी किया गया है। आरओसी और बैंक स्टाफ के साथ मिलीभगत करते हुए निदेशकों के भागीदारों और कर्मचारियों ने याचिकाकर्ताओं को चोट पहुंचाने और धोखाधड़ी करने के इरादे से झूठे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कंपनी ने समझौते में सूचीबद्ध फोर्स मजेरे क्लॉज को लागू किया और कहा कि अप्रैल-मई महीने के लिए कोई भुगतान नहीं होगा। यह अजीब था क्योंकि लॉकडाउन के दौरान भी, किराने की दुकानें खुली थीं और व्यापार हमेशा की तरह था।

याचिका में कहा गया है कि मई 2020 तक, याचिकाकर्ताओं ने यह खोजना और समझना शुरू किया कि जो वास्तव में कंपनी चला रहा था उसके संबंध में जल्द ही डरावनी जानकारी बाहर आने लगे । रजिस्टर्ड पते पर ताला लगा हुआ था और वहां कोई नहीं था। पंजीकृत प्रधान कार्यालय, जो नोएडा में है, मुश्किल से दो लोग काम कर रहे थे और उन्हें पता नहीं था कि मालिक या मास्टर माइंड कौन है। डायरेक्टर कुणाल केशव ने हमें एक नोट भेजा जिसमें कहा गया था कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि अरुण मोदी ने खुद को एक अधिवक्ता के रूप में पेश किया और याचिकाकर्ताओं को धमकी देते रहे। आरोप है कि वेस्टलैंड ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के भागीदारों और लाभार्थियों ने याचिकाकर्ताओं को धोखा दिया और उनकी गाढ़ी कमाई को काले धन और बेनामी संपत्ति में बदल दिया और यह स्टोर सिर्फ एक फर्जी व्यापार मॉडल का वादा करके निर्दोष लोगों को लुभाने का एक तरीका था।

सीबीआई, ईडी और एसएफआईओ की जांच को जरूरी बताते हुए याचिकाकर्ताओं का दावा है कि तत्काल मामला शरारत जालसाजी आपराधिक विश्वास भंग करने, संपत्ति की बेईमानी से पैसा देने, धोखाधड़ी, खातों में मिथीकरण, संपत्ति की आड़, बेईमानी से धांधली, कॉर्पोरेट धोखाधड़ी, बेनामी लेनदेन और काले धन की जमाखोरी का एक संगठित अंतरराष्ट्रीय रैकेट द्वारा प्रतिबद्ध का साधारण मामला नहीं है, लेकिन मनी लॉन्ड्रर्स के एक संगठित अंतरराष्ट्रीय रैकेट द्वारा किया गया भारत का सबसे बड़ा फ्रेंचाइजी घोटाला है ।

याचिका में यह यह भी कहा गया है कि ईडी की जांच इसलिए जरूरी है क्योंकि याचिकाकर्ता की गाढ़ी कमाई को देश से बाहर निकालकर काले धन और बेनामी संपत्तियों में तब्दील कर दिया गया है और ईडी भारत में आर्थिक अपराध से लड़ने के लिए जिम्मेदार एक विशेषज्ञ आर्थिक खुफिया एजेंसी है।

एसएफआईओ द्वारा जांच जरूरी है क्योंकि इसमें वित्तीय क्षेत्र, पूंजी बाजार, अकाउंटेंसी, फॉरेंसिक ऑडिट, आईटी, कंपनी कानून, कराधान कानून, सीमा शुल्क और जांच और याचिकाकर्ताओं की गाढ़ी कमाई के विशेषज्ञ हैं, जिन्हें जालसाजों ने देश भर में घोस्ट कंपनियां बनाकर लूटा है। याचिकाकर्ताओं ने रिसीवर या फोरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति के लिए भी प्रार्थना की है और याचिकाकर्ताओं की गाढ़ी कमाई की वसूली के लिए शीघ्रता से उचित निर्देश पारित किए हैं और भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी को रोकने के लिए केंद्र को कदम उठाने का निर्देश भी दिया है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on November 4, 2020 12:16 pm

Share