देवेन्द्र फडणवीस को सुप्रीम झटका, चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों का खुलासा ना करने पर मुकदमा चलेगा

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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को झटका देते हुए उच्चतम न्यायालय ने उस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें चुनावी हलफनामे में दो आपराधिक मामलों का खुलासा ना करने पर नागपुर की अदालत में ट्रायल को बहाल कर दिया था। जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की तीन जजों वाली बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि पुनर्विचार याचिकाओं के लिए कोई आधार नहीं मिला है, इसलिए इन्हें खारिज किया जाता है।

उच्चतम न्यायालय ने 18 फरवरी को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा उच्चतम न्यायालय के अक्तूबर के फैसले के खिलाफ दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। आदेश 18 फरवरी को पारित किया गया था और मंगलवार को इसे उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर डाला गया।

फडणवीस पर 2014 के चुनावी हलफनामे में कथित रूप से अपने खिलाफ लंबित दो आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं देने का आरोप है। उच्चतम न्यायालय  ने इस मामले में 2019 में फडणवीस के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया था, जिसकी समीक्षा के लिए फडणवीस ने याचिका दायर की थी। अक्टूबर 2019 में उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में देवेंद्र फडणवीस द्वारा दो लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के मामले में बांबे हाईकोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि फडणवीस को इन कथित अपराधों के लिए जनप्रतिनिधत्व कानून के तहत मुकदमे का सामना करने की जरूरत नहीं है।

फडणवीस के लिए पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया था कि जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 33 ए (1) के अनुसार, किसी आपराधिक मामले के बारे में जानकारी प्रस्तुत करने की कोई आवश्यकता नहीं है जब तक कि ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय नहीं गया हो। 

रोहतगी ने कहा था कि न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने के कारण आपराधिक मामले का खुलासा करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने पूछा था कि अगर कल संज्ञान लिया गया और मैं कल अपना चुनावी हलफनामा दाखिल करूं तो क्या होगा? रोहतगी ने मुख्य फैसले पर रोक की मांग की  लेकिन पीठ ने इनकार कर दिया था। रोहतगी ने कहा था कि यह एक सवाल है जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 तक फैला हुआ है।

दरअसल 23 जनवरी को पीठ ने फडणवीस के आवेदन को खुली अदालत में समीक्षा याचिका की मौखिक सुनवाई की अनुमति दी थी। 1 अक्तूबर 2019 को चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों का खुलासा ना करने के आरोपों वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए फडणवीस पर ट्रायल चलाने का आदेश दिया था।

याचिकाकर्ता सतीश यूके ने हाईकोर्ट में नागपुर के ज्यूडि़शियल मजिस्ट्रेट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें ऐसी ही याचिका को खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि 2009 और 2014 में नागपुर के दक्षिण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से नामांकन भरते समय फडणवीस ने उनके खिलाफ लंबित दो आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। यह जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 125-ए का स्पष्ट उल्लंघन है। याचिकाकर्ता के मुताबिक 1996 और 1998 में फडणवीस के खिलाफ विभिन्न आरोपों में दो मामले दर्ज किए गए थे।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ ही कानूनी मामलों के जानकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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